RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

कबसे है गुप्त नवरात्रि 2018 : देवी भागवत पुराण से अनुसार महत्व और पूजा विधि

कबसे है गुप्त नवरात्रि 2018 : देवी भागवत पुराण से अनुसार महत्व और पूजा विधि

कबसे है गुप्त नवरात्रि 2018 : देवी भागवत पुराण से अनुसार महत्व और पूजा विधि
Visual Archive

कबसे है गुप्त नवरात्रि 2018 : देवी भागवत पुराण से अनुसार महत्व और पूजा विधि

कबसे है गुप्त नवरात्रि 2018 : देवी भागवत पुराण से अनुसार महत्व और पूजा विधि

आषाढ़ गुप्त नवरात्री 2018

प्रारंभ : 13 जुलाई  (शुक्रवार) 2018

समापन : 21 जुलाई  (शनिवार) 2018

देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए वर्ष के सबसे पवित्र और सिद्ध दिन नवरात्रि के माने गए हैं। इन नौ दिनों में देवी अपने भक्तों और साधकों पर पूर्ण कृपा बरसाने को आतुर रहती है। जो लोग जीवन में धन, मान, सुख, संपत्ति, वैभव और सांसारिक सुखों को पाना चाहते हैं, उन्हें नवरात्रि में देवी के सिद्ध दिनों में साधना जरूर करना चाहिए। अधिकांश लोग वर्ष की दो नवरात्रियों के बारे में ही जानते हैं। ये नवरात्रियां चैत्र और शारदीय नवरात्रि कहलाती हैं, लेकिन इन दो के अलावा दो और नवरात्रियां होती हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के इलाकों में खास तौर पर मनाई जाती है। इन नौ दिनों में मां भगवती के गुप्त स्वरूप काली, तारा, बगला, षोडशी, आदि की आराधना की जाएगी। इन दिनों में मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाएगी।

गुप्त नवरात्र पौराणिक कथा

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती। मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें। तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है। यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ। 

क्या है गुप्त नवरात्र की पूजा विधि

जहां तक पूजा की विधि का सवाल है मान्यतानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान भी पूजा अन्य नवरात्र की तरह ही करनी चाहिये। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा को घटस्थापना कर प्रतिदिन सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है। अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। वहीं तंत्र साधना वाले साधक इन दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं। लेकिन एस्ट्रोयोगी की सभी साधकों से अपील है कि तंत्र साधना किसी प्रशिक्षित व सधे हुए साधक के मार्गदर्शन अथवा अपने गुरु के निर्देशन में ही करें। यदि साधना सही विधि से न की जाये तो इसके प्रतिकूल प्रभाव भी साधक पर पड़ सकते हैं।

वर्ष 2018 में कब हैं गुप्त नवरात्र ?

वर्ष 2018 में आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्र के रूप में मनाये जायेगें। अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार यह नवरात्र 13 से 21 जुलाई 2018 तक रहेंगें। नवरात्र पारण 21 जुलाई को नवमी-दशमी के दिन होगा।

माघ मास में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र 5 फरवरी 2019 से शुरु होंगे व 14 फरवरी तक रहेंगें। नवरात्रि व्रत का पारण 14 फरवरी 2019 को होगा।

आषाढ़ नवरात्र गुप्त नवरात्रों के नाम से भी जाने जाते हैं. आषाढ़ महीने यानी जून और जुलाई  माह में पड़ने के कारण इन नवरात्रों को आषाढ़ नवरात्र कहा जाता है, हालाँकि देश के अधिकतर भाग में गुप्त नवरात्रों के बारे में लोग नहीं जानते हैं. उत्तरी भारत जैसे हिमाचल प्रदेश, पंजाब , हरयाणा, उत्तराखंड के आस पास के प्रदेशों में गुप्त नवरात्रों  में माँ भगवती की पूजा की जाती है. माँ भगवती  के सभी 9 रूपों की पूजा नवरात्रों के भिन्न – भिन्न दिन की जाती है , अतः आइये देखते हैं  इन दिनों में किस देवी की पूजा  कब की जानी चाहिए

13 जुलाई (शुक्रवार) ,2018 :  घट स्थापन एवं माँ शैलपुत्री पूजा

14 जुलाई (शनिवार) 2018 :  माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

15 जुलाई (रविवार) 2018 : माँ चंद्रघंटा पूजा

16 जुलाई (सोमवार) 2018:  माँ कुष्मांडा पूजा 

17 जुलाई (मंगलवार) 2018 :  माँ स्कंदमाता पूजा 

18 जुलाई (बुधवार)  2018 : माँ कात्यायनी पूजा

19 जुलाई (बृहस्पतिवार)  2018:  माँ कालरात्रि पूजा 

20 जुलाई (शुक्रवार) 2018 : माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी 

21 जुलाई (शनिवार ) 2018: माँ सिद्धिदात्री,  नवरात्री पारण

नवरात्रों में माँ भगवती की आराधना दुर्गा सप्तसती से की जाती है परन्तु यदि समयाभाव है तो भगवान् शिव रचित सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ अत्यंत ही प्रभाव शाली एवं दुर्गा सप्तसती का सम्पूर्ण फल प्रदान करने वाला है।

जो साधक तंत्र-मंत्र की सिद्धियां प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए गुप्त नवरात्रि के दिन बेहद खास होते हैं। इनमें वे साधक गुप्त स्थान पर रहते हुए देवी के विभिन्न स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की साधना में लीन रहते हैं।

भोग-विलास के साधन

गृहस्थ साधक जो सांसारिक वस्तुएं, भोग-विलास के साधन, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन पाना चाहते हैं उन्हें इन नौ दिनों में दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिए। यदि इतना समय न हों तो सप्तश्लोकी दुर्गा का प्रतिदिन पाठ करें। देवी को प्रसन्न करने के लिए और साधना की पूर्णता के लिए नौ दिनों में लोभ, क्रोध, मोह, काम-वासना से दूर रहते हुए केवल देवी का ध्यान करना चाहिए। कन्याओं को भोजन कराएं, उन्हें यथाशक्ति दान-दक्षिणा, वस्त्र भेंट करें।

गुप्त नवरात्रि की देवियां 

गुप्त नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या के लिए मां काली, तारादेवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्न माता, त्रिपुर भैरवी मां, धुमावती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी का पूजन करते हैं।

गुप्त नवरात्रि का महत्व : – देवी भागवत पुराण के अनुसार जिस तरह वर्ष में 4 बार नवरात्रि आती है और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के 9 रूपों की पूजा होती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेष कर तांत्रिक कियाएं, शक्ति साधनाएं, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। 

इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या-पूजन के साथ नवरात्रि व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

  • आचार्य दयानंद शास्त्री
RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World July 6, 2018 6 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

कन्या पूजन करने का सबसे आसान तरीका क्या है?

कन्या पूजन करने का सबसे आसान तरीका क्या है? नवरात्रि के अंतिम दिनों में किया जाने वाला कन्या पूजन हर भक्त के लिए अत्यंत पावन और आवश्यक अनुष्ठान…

Read now
Hinduism

नवमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है? जानिए असली वजह

नवमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है? जानिए असली वजह नवरात्रि के अंत दिनों — विशेषकर अष्टमी और नवमी — पर किए जाने वाला कन्या पूजन हिंदू…

Read now
Hinduism

दुर्गा अष्टमी पर क्यों जरूरी है कन्या पूजन? जानें महत्व और तरीका

दुर्गा अष्टमी पर क्यों जरूरी है कन्या पूजन? जानें महत्व और तरीका हिंदू धर्म में नवरात्रि का आठवाँ दिन, जिसे महाअष्टमी या दुर्गा अष्टमी कहा जाता है, अत्यंत…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *