RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

गुरु ग्रन्थ साहिब प्रकाश पर्व विशेष : जानिए गुरु ग्रन्थ साहिब जी से जुड़े तथ्य

गुरु ग्रन्थ साहिब प्रकाश पर्व विशेष : जानिए गुरु ग्रन्थ साहिब जी से जुड़े तथ्य

गुरु ग्रन्थ साहिब प्रकाश पर्व विशेष : जानिए गुरु ग्रन्थ साहिब जी से जुड़े तथ्य
Visual Archive

गुरु ग्रन्थ साहिब प्रकाश पर्व विशेष : जानिए गुरु ग्रन्थ साहिब जी से जुड़े तथ्य

गुरु ग्रन्थ साहिब प्रकाश पर्व विशेष : जानिए गुरु ग्रन्थ साहिब जी से जुड़े तथ्य

मनुष्य अपनी हर एक समस्या का हल धार्मिक ग्रंथों में ही खोजता है। ऋग्वेद, बाइबल, जैन ग्रंथ तथा पाक कुरान शरीफ़ जैसे महान ग्रंथों को मनुष्य ने अपने कठिन समय में खंग़ालकर अपने दुखों का निवारण किया है।

“आज्ञा पई अकाल दी, तबे चलायो पंथ, सब सिखन को हुक्म है गुरु मानयो ग्रंथ”… सिख कौम के दसवें नानक गुरू गोबिंद सिंह जी ने यह अनमोल वचन अपने मुख से बोले थे। जिसके अनुसार आज से गुरु ग्रंथ साहिब ही हमारे गुरु हैं और इसके अलावा किसी भी सिख को अन्य मानवीय गुरु के आगे सिर झुकाने की अनुमति नहीं है।

इस महान ग्रंथ में ही सिख संगत की हर समस्या का हल छिपा है, वे जब चाहें अपने प्रश्नों का उत्तर गुरु ग्रंथ साहिब में ढूंढ़ सकते हैं।

 ग्रन्थ में ईश्वर की झलक

इन पवित्र ग्रंथों में मनुष्य को अपने ईश्वर की झलक दिखाई दी। ईश्वर से  जुड़ने का एक ज़रिया यही धार्मिक ग्रंथ हैं। इसी ईश्वरीय शक्ति के साथ हमारे बीच एक और पवित्र वजूद है सिखों के ग्यारहवें गुरु ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ का।

1,430 पन्नों में उल्लेखित रागमयी गुरुबाणी गुरु ग्रंथ साहिब जी की शोभा को बढ़ाती है। इस महान ग्रंथ के संकलन, आलेखन एवं उच्चारण से जुड़ा इतिहास इसके सुनहरे शब्दों की तरह ही सुनहरा है। इस पवित्र ग्रंथ में 12वीं सदी से लेकर 17वीं सदी तक भारत के कोने-कोने में रची गई ईश्वरीय बानी लिखी गई है।

गुरु नानक देव जी की बाणी

श्री गुरुग्रन्थ साहिब जी का संपादन सिखों के पांचवें गुरु गुरु अर्जन देव जीद्वारा सन् 1604 ईसवी में कराया गया था, लेकिन इस महान ग्रंथ के संकलन एवं आलेखन का असली कार्य तो पहले गुरु गुरु नानक देव जी’ द्वारा ही आरंभ कर दिया गया था।

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईसवी में माता तृप्ता एवं पिता महता कालू के यहां रायभोए की तलवंडी, जिसे आज के समय में ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है, यहां हुआ। यह स्थान आज भारत में ना होकर पाकिस्तान में स्थित है।

सफ़र चार उदासी का

बचपन से ही गुरु नानक देव के चेहरे पर हर कोई एक अजब नूर देख सकता था। पिता ने इन्हें पढ़ाई के लिए भेजा लेकिन ये तो अध्यापक को ही एक ओंकारका पाठ पढ़ा आए। उनकी इस सोच को उनके माता-पिता भी समझ नहीं पाते थे, लेकिन नानक तो ईश्वरीय रूप थे। उन्होंने आखिरकार दुनिया की भलाई के लिए यात्रा आरंभ कर दी।

गुरु नानक साहिब जी द्वारा चार अलग-अलग दिशाओं में चार यात्राएं की गई, जिन्हें चार उदासियों का नाम दिया गया। आप द्वारा लोकमत की सेवा के लिए की गई यात्राओं को उदासी कहा गया। वे हरिद्वार से लेकर अयोध्या, प्रयाग, वाराणसी, गया आदि जगहों पर जाकर जीवन उपदेश दिए।

यह भी पढ़ें-गुरु नानक जयंती के लिए पाकिस्तान 1 सितंबर से वीजा प्रक्रिया शुरू करेगा

गुरु जी ने दिया नाम हिन्दुस्तान

वे पटना, जगन्नाथ पुरी और श्रीलंका भी गए। गुरु जी मुल्तान, बगदाद तथा मक्का मदीना भी गए। मक्का मदीना से संबंधित गुरु जी की एक साखी काफी प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि भारत देश के लिए हिन्दुस्तानशब्द का सबसे पहला इस्तेमाल गुरु जी ने ही अपनी बाणी में किया था।

उनके वचन में – खुरासान खसमाना किया, हिन्दुस्तान डराया। कहते हैं कि गुरु जी ने यात्रा के दौरान ही बाणी रची और धीरे-धीरे उसे एक पोथी का रूप भी दिया। 50 वर्ष की उम्र में जब वे वापस अपने घर लौटे तो उन्होंने करतारपुर नगर बसाया। यहां एक साधारण इंसान की तरह खेती में लग गए।

चार गुरुओं की बाणी

अपने जीवन के आखिरी चरण में गुरु जी ने इस पवित्र पोथी को भाई लैणा जी को सौंप उन्हें गुरु गद्दी पर बैठाया। भाई लैणा जी आगे चलकर गुरु अंगद देव जी के नाम से प्रसिद्ध हुए। आप सिख धर्म के दूसरे नानक थे, जिन्होंने गुरु नानक देव जी के नक्शे कदमों पर चलकर बाणी को एक नया रूप दिया। जो पोथी गुरु नानक देव जी ने दूसरी पातशाही को दी, उसमें आगे चलकर गुरु अंगद देव जी के साथ-साथ, गुरु अमरदास एवं गुरु रामदास जी की भी बाणी जोड़ी गई। अब यह पोथी एक महान ग्रंथ बनकर पांचवीं पातशाही गुरु अर्जन देव जी के पास पहुंची, जिन्होंने इस पवित्र ग्रंथ की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ली।

इस कार्य में लगे तीन वर्ष 

उस समय तक महान गुरुओं एवं सूफी संतों द्वारा लिखी गई सारी बाणी को एक जगह कराया और एक सेवक से कहकर उसे जिल्दबन्दी भी कराने को कहा। यह सारा कार्य श्री अमृतसर साहिब के पास हुआ। कहते हैं कि इस नए संकलन में पांच गुरु साहिबान, 15 भक्तों तथा सूफी संतों तथा 11 भट्टों और गुरु घर से संबंधित चार अन्य सेवकों की बाणी को जोड़ा गया।

इस कार्य को करने में गुरु जी को तीन साल लगे और अंत में गुरु जी ने इसे संगत के सामने पोथी साहिब के नाम से प्रस्तुत किया। यह ग्रंथ महान है, केवल इसलिए नहीं कि यह एक धार्मिक ग्रंथ है, वरन् यह दुनिया भर में मौजूद इकलौता ऐसा ग्रंथ है जिसमें ना केवल सिख गुरुओं बल्कि अन्य धार्मिक संतों की भी बाणी दर्ज है।

गुरुग्रन्थ साहिब है जातिवाद के विरुद्ध

पोथी साहिब में भगत कबीर, भगत रामानंद, भगत सूरदास, भगत रविदास तथा भगत भीखण की बाणी दर्ज है। इसके साथ ही भगत नामदेव, भगत त्रिलोचन, भगत परमानंद, भगत धन्ना, भगत पीपा, आदि भगतों ने धार्मिक उपदेश दिए। ना केवल हिन्दू संत बल्कि विभिन्न शेखों की रचना को भी पोथी साहिब में जगह दी गई। शेख फरीद, भगत जयदेव, भगत सैन, भगत बेनी, भगत सदना, सभी के उपदेश शामिल हैं इस महान ग्रंथ में।

इससे यह ज़ाहिर होता है कि एक धर्म को समर्पित यह धार्मिक ग्रंथ जातिवाद को बढ़ावा नहीं देता। यह सभी धर्मों-जातियों को एक मानता है। यह महान ग्रंथ इंसान को इंसान से मिलाता है।

पहला प्रकाशोत्सव 

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार आखिरकार अगस्त 1604 में श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश हुआ। संगतों ने कीर्तन दीवान सजाए, बाबा बुड्ढा जी द्वारा महान ग्रंथ के उपदेशों को पढ़ा गया। पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाली बाबा बुड्ढा जी इस महान ग्रंथ के पहले ग्रंथी नियुक्त हुए।

ग्रंथ साहिब जी कहाँ हुए विराजमान

गुरु रामदास जी के बाद गुरु अर्जन देव जी तथा उनकी शहादत के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्रंथ साहिब की सेवा संभाली। छठी पातशाही गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ही दरबार साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त साहिब का निर्माण कराया। यहां ग्रंथ साहिब जी को विराजमान किया, इनके बाद गुरु हरराय जी तथा गुरु हरकिशन जी ने भी ग्रंथ साहिब की सेवा ली।

छोटी सी उम्र में गुरुगद्दी पर बैठे गुरु हरकिशन साहिब जी चेचक के बुखार के कारण अकाल चलाना कर गए, लेकिन जाते-जाते संगत को बबा बकाले का बचन दे गए। इसके बाद नौवीं पातशाही गुरु तेग बहादुर जी ने सिख धर्म की बागडोर संभाली। कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए आप जी ने अपनी सीस कुर्बान किया और केवल 10 वर्ष की उम्र में गोबिंद सिंह को गुरु गद्दी पर बैठाया गया।

शस्त्र विधा में माहिर, एक महान कवि ने सिख धर्म को एक नया रूप प्रदान किया। धर्म के मार्ग पर चलो लेकिन अधर्म को सहने की बजाय हथियार उठाओ, यह थे गुरु गोबिंद सिंह जी के वचन। उन्होंने सिखों को सिंह बनाया, शेर बनाया, पंज प्यारे सजाए। सिख औरतों को निडर यानी कि कौर की उपाधि दी।

ग्रंथ साहिब जी को सम्पूर्णता प्रदान की

गुरु जी स्वयं पंज प्यारों के उपदेशानुसार माछीवाड़े के जंगलों की ओर चले गए। यहां से निकलकर गुरु जी ने औरंगज़ेब को ज़फ़रनामा लिखा और फिर साबो की तलवंडी जिसे आज के समय में तख्त दमदमा साहिब कहा जाता है, वहां पहुंचे। यहां आकर उन्होंने ग्रंथ साहिब की नई बीड़ तैयार करने का फैसला किया, लेकिन एक दुविधा थी।

गुरु अर्जन देव जी द्वारा रची गई असली पोथी साहिब वहां मौजूद नहीं थी। यह पोथी गुरु हरगोबिंद जी के बड़े बेटे के बेटे धीरमल के वंशजों के पास थी। जब गुरु गोबिंद सिंह जी ने उनसे वह असली बीड़ मांगी तो उन्होंने देवे से साफ इनकार कर दिया। लेकिन ऐसा माना जाता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति के इस्तेमाल से भाई मनी सिंह जी को सारी बाणी अपने मुख से उच्चारित की, और ग्रंथ साहिब को सम्पूर्णता प्रदान की।

इस तरह से गुरु जी ने सन् 1700 ईसवीं में ग्रंथ साहिब जी को सम्पूर्णता प्रदान की। इसके बाद गुरु जी दक्षिण की ओर निकल गए और आखिरकार नांदेड साहिब पहुंचे। यहां आकर सन् 1708 को भारी संख्या में मौजूद सिख संगत के सामने एक बड़ा आदेश दिया।

ग्रंथ साहिब को गुरु बनाया

परम ज्योति के रूप में समा जाने से पहले गुरु जी ने संगत से कहा कि ‘हमारे बाद ग्रंथ साहिब ही गुरु है, आज से इन्हें ही गुरु मानिए और इन्हीं के जरिए अपने दुखों का निवारण करें’। गुरु जी द्वारा दिया गया यह संदेश आज भी बरकरार है, आज सिख संगत गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही अपना गुरु मानती है। उनकी मौज़ूदगी में ही सभी धार्मिक कार्य किए जाते हैं। शादी ब्याह भी गुरु जी की मौजूदगी में ही होना माना गया है।

@religionworldin

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta August 31, 2019 8 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Guru Nanak Birthday

देखें रौशनी में नहाये गुरुद्वारा साहिब करतारपुर की कुछ ख़ास तस्वीरें

पाकिस्तान स्थित गुरूद्वारे करतारपुर साहिब की कुछ ख़ास तस्वीरें रिलिजन वर्ल्ड आपके साथ  साझा कर रहा है. देखिये रौशनी में नहाये करतारपुर गुरूद्वारे की खूबसूरती देखते ही बनती…

Read now
Guru Nanak Birthday

गुरु नानक देव 550वी जयंती विशेष: यहाँ गुरु नानक देव जी ने रुकवाई थी गौ हत्या

श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के लिए शहरवासियों में खूब उत्साह है। भले ही प्रकाश पर्व 12 नवंबर को है, लेकिन इसकी तैयारियां हर…

Read now
Hinduism

क्या सत्य धर्म है या धर्म सिर्फ रूप और रिवाज़ ?

क्या सत्य धर्म है या धर्म सिर्फ रूप और रिवाज़ ? धर्म मानव जीवन का एक अत्यंत गहरा पक्ष है, जो जन्म से मृत्यु तक हमारी सोच, व्यवहार…

Read now