RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

हलषष्ठी 2020: जानिये हलषष्ठी की पौराणिक व्रत कथा

हलषष्ठी 2020: जानिये हलषष्ठी की पौराणिक व्रत कथा

हलषष्ठी 2020: जानिये हलषष्ठी की पौराणिक व्रत कथा
Visual Archive

हलषष्ठी 2020: जानिये हलषष्ठी की पौराणिक व्रत कथा

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम जयंती यानी हल षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। उनका प्रमुख शस्त्र हल और मूसल है इसलिए इस दिन किसान हल की पूजा करते हैं।



साथ ही माताएं अपने पुत्रों के लिए व्रत करती हैं। इस दिन हल से जुता हुआ कुछ भी नहीं खाया जाता है। हल षष्ठी को लेकर भी एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसे इस दिन व्रत करते हुए सुनना चाहिए।

पौराणिक कथा 

हलषष्ठी 2020: जानिये हलषष्ठी की पौराणिक व्रत कथा

प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। जल्द ही उसका बच्चा होने वाला था। जहां एक तरफ वो प्रसव के दर्द से व्याकुल थी वहीं, दूसरी तरफ मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने के लिए परेशान था। ऐसे में उने सोचा की अगर प्रसव हो गया तो गौ-रस का क्या होगा। वो ऐसे ही पड़ा रह जाएगा। इसी सोच में उसने अपने सिर पर दूध और दही के घड़े रखे और चल दी। लेकिन कुछ ही देर बाद उसे असहनीय पीड़ा होने लगी। हड़बड़ी में वो झरबेरी की एक ओट में चली गई और वहां उसने एक बच्चे को जन्म दिय

दूध-दही बेचने के लिए उसने बच्चे को वहीं छोड़ा और चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। ग्वालिन ने गाय-भैंस के मिश्रित दूध को गांव वाले को केवल भैंस का दूध बताकर बेच दिया। जहां पर ग्वालिन ने बच्चा छोड़ा था वहीं पास में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक से बैल भड़क उठे और हल का फल बच्चे के शरीर में घुस गया। इससे बालक की मृत्यु हो गई। इस घटना से किसान को बहुत दुख हुआ। लेकिन उसने हिम्मत से काम लिया और झरबेरी के कांटों से बच्चे के पेट में टांके लगा दिए। किसान उस बच्चे को वहीं छोड़कर चला गया।

जब ग्वालिन दूध बेचकर वापस आई तो उसने बच्चे को मरा हुआ देखा और उसे लगा कि यह उसके पाप की सजा है। उसने सोचा की अगर वो झूठ बोलकर दूध नहीं बेचती तो उसका बच्चा न मरता। मिश्रित दूध से गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट हुआ और उसके बच्चे की मृत्यु हो गई। उसने सोचा कि वो वापस जाकर सभी को सच बता दे और प्रायश्चित कर ले। इसी सोच के साथ वो गांव पहुंची और जहां-जहां उसने दूध-दही बेचा था वहां-वहां जाकर उसने अपनी करतूत का बखान किया। तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया। उसे आशीर्वाद भी दिया।



आशीर्वाद पाकर जब वो वापस झरबेरी के नीचे पहुंची तो उसने देखा कि उसका पुत्र जीवित है। तभी उसने अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने का प्रण लिया।

[video_ads]
[video_ads2]
You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta August 9, 2020 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

Balram Jayanti 2025: बलराम जी का जन्मदिन कब और क्यों मनाया जाता है?

Balram Jayanti 2025: बलराम जी का जन्मदिन कब और क्यों मनाया जाता है? तिथि: 14 अगस्त 2025, गुरुवारपक्ष: श्रावण मास, पूर्णिमा तिथि (पौर्णिमा) भारत की धार्मिक परंपराओं में…

Read now
Hinduism

हरियाली तीज की पौराणिक व्रत कथा – पूजा में पढ़ें

हरियाली तीज की पूजा पर ये कथा पढ़ी जाती है। इसे पूजा करने के बाद पढ़े। भगवान शिव ने पार्वतीजी को उनके पूर्व जन्म के बारे में याद…

Read now
Hinduism

हरछठ व्रत: जानिए क्या है हलषष्ठी की सम्पूर्ण पूजन विधि

बलराम जयंती 9 अगस्त 2020 यानी आज मनाई जाएगी। बलराम को भगवान विष्णु के 8वां अवतार माना गया है। इस दिन भगवान शेषनाग ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण…

Read now