हरिद्वार, 4 मार्च; हरिद्वार महाकुंभ के क्रम में बुधवार को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की भव्य पेशवाई निकाली गई. इस दौरान बड़े-बड़े ढोल और गाजे-बाजे के साथ पेशवाई का स्वागत किया गया. संत और महंतों पर फूलों की बारिश हुई.

ऊंट, हाथी, चांदी के सिंहासन और रथ पेशवाई के मुख्य आकर्षण रहे. पेशवाई में देवभूमि की संस्कृति की झलक दिख रही है और कोविड से बचाव का संदेश भी दिया जा रहा है. एसएमजेएन पीजी कॉलेज में श्री निरंजनी अखाड़े की अस्थायी छावनी में संतों और रमता पंचों ने डेरा डाला है.
श्री निरंजनी अखाड़ा की पेशवाई
बुधवार को धूमधाम से पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई निकाली गयी है . इसके लिए चांदी के सिंहासन, रथ, सजावट की सामग्री मंगलवार को हरिद्वार पहुंच गईं थीं. पेशवाई का नेतृत्व आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद कर रहे हैं. अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने बताया कि पेशवाई में शामिल संतों पर एक हेलीकॉप्टर और दो ग्लाइडर से पांच कुंतल फूलों की बारिश की गई.
देखिए पूरी पेशवाई यात्रा…
हेलीकॉप्टर से बरसे फूल
इसके लिए बिजनौर और मंगलौर से गुलाब के फूल मंगवाए गए थे. कनखल में हेलीकॉप्टर फूल बरसाए गए. इसके बाद शिव मूर्ति चौक के पास फूलों की बारिश हुई. वहीं 25 बैंडबाजों में 100 लोगों की टीम भी है.
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50 महिलाएं और 50 पुरुष शामिल
बैंडबाजों की टीम में 50 महिलाएं और 50 पुरुष शामिल हैं. पेशवाई के दौरान संत मास्क पहनकर कोविड से बचाव का संदेश दे रहे हैं. शाम छह बजे पेशवाई निरंजनी अखाड़े के पास पार्किंग स्थल में बनी स्थायी छावनी में प्रवेश करेगी.
कुमाऊं का छोलिया नृत्य, गढ़वाल एवं जौनसार की सांस्कृतिक टीमें पेशवाई का आकर्षण हैं. डमरू की थाप पर नागा संन्यासी भोलेनाथ का तांडव नृत्य करते हुए चल रहे हैं. सहारनपुर, हापुड़, देहरादून, नासिक के बैंड बाजों की गूंज है.

पेशवाई सुबह करीब साढ़े दस बजे एसएमजेएन पीजी कॉलेज की अस्थायी छावनी से रवाना हुई. सभी संत-महंतों ने दही-चावल और बूरा खाकर शगुन किया. शाम छह बजे पेशवाई अखाड़े की छावनी में प्रवेश करेगी.
सरकारी और प्राइवेट घाट पर स्नान के लिए छह फीट की दूरी रखनी अनिवार्य होगी. गंगा नदी पर 18 किलोमीटर घाटों पर कुल 10 लाख 80 हजार व्यक्ति ही स्नान कर सकते हैं.
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