भारतवर्ष में अहिंसा और अनेकांत की नीति को प्रशस्त करने वाले जैन धर्म के अंतिम 24वें तीर्थंकर श्री वर्धमान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को बिहार प्रान्त के वैशाली गणराज्य के कुंडग्राम के महाराजा सिद्धार्थ के नंद्यावर्त महल में महारानी प्रियकारिणी त्रिशला की कुक्षि से हुआ ।
तब उनके पुण्यप्रताप से स्वर्गों के देवताओं ने इस मृत्युलोक में आकर जन्मकल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन किया, तीर्थंकर बालक वर्धमान श्री महावीर स्वामी का सौधर्म इंद्र के ऐरावत हाथी पर आसीन होकर सुमेरु पर्वत पर पहुंचना और वहां स्थित पांडुक शिला पर जन्माभिषेक आदि उस कालखंड का अतुलनीय समायोजन था ।
उसी की अदभुत स्मृति में आज तक उनके समस्त अनुयायी उनके जन्मोत्सव को प्रतिवर्ष बड़े हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाते आये हैं , चूंकि वे जैन धर्म के अंतिम तीर्थेश हैं तो वर्तमान में उन्हीं का जिनशासन भी चल रहा है, इसलिए उनकी जन्मतिथि पर इतना आनंदमयी उत्सव और अधिक प्रासंगिक हो जाता है ।
भगवान महावीर के विचार अहिंसा , अनेकांत, अपरिग्रह, स्याद्वाद, शाकाहार आदि शुभ भावनाओं से ओतप्रोत हैं, जो कि वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व के लिए अनुकरणीय हैं ।
भगवान महावीर स्वामी के जन्मकल्याणक के पावन अवसर पर सम्पूर्ण विश्व में समग्र जैन धर्मावलंबियों द्वारा जैन मंदिरों में उनकी पूजन, आरती, रथयात्रा, प्रसादी वितरण, सम्मेलन आदि अनेकों कार्यक्रम का आयोजन होता है ।
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इस वर्ष 2020 में भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव दिनांक 6 अप्रैल, सोमवार को है , लेकिन वर्तमान समय के कोरोना (Covid19) की वैश्विक संकट की स्थिति में सम्पूर्ण भारत मे लॉक डाउन चल रहा है, जिसमें सोशल डिस्टेनसिंग एवं सुरक्षा के महत्वपूर्ण कारणों के चलते सभी सामूहिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं ।
ऐसे समय में हम राष्ट्रधर्म निभाते हुए किस प्रकार अहिंसा के अधिनायक श्री महावीर स्वामी के जन्मकल्याणक महोत्सव को मनाएं इस संदर्भ में कुछ प्रस्ताव आपके समक्ष रख रहा हूँ –
सर्वप्रथम तो देश के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर जन्मकल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या यानी 5 अप्रैल, रविवार को रात्रि 9 बजे, 9 बार णमोकार मंत्र जपते हुए दीपोत्सव का आयोजन अवश्य करें । सम्पूर्ण भारतवासी इस अनुष्ठान को संपादित करेंगे तो निश्चित ही एक अद्भुत ऊर्जामयी, अकल्पनीय वातावरण बनेगा, जो इस कोरोना के वैश्विक संकट को अतिशीघ्र ही भस्मीभूत करेगा ।
सोमवार, 6 अप्रैल को प्रातःकाल 8 बजे अपने घर पर परिवार के साथ जैनधर्म की ध्वजा लगाएं, तत्पश्चात भगवान महावीर के जयघोष, जियो और जीने दो, घंटानाद, शंखनाद आदि के द्वारा सम्पूर्ण आकाश में अनहद नाद करें । फिर भगवान महावीर स्वामी की अपने पूरे परिवार के साथ सामूहिक पूजन, जाप करें एवं कोरोना के वैश्विक संकट से उबरने के लिए परमपिता परमात्मा के चरणों मे प्रार्थना करें ।
‘जिओ और जीने दो’ का संदेश देते हुए जरूरतमन्द या लॉक डाउन या कोरोना से प्रभावित गरीब बंधुओं में पूरी सुरक्षा एवं सावधानी के साथ ही भोजन, मिठाई आदि वितरण कर सकते हैं ।
परिवार के साथ घर की गैलरी या दरवाजे पर खड़े होकर अपने पड़ोसी मित्रों को तथा फोन, SMS, whatsaap, faceebook सोशल मीडिया से अपने सभी दूरस्थ मित्र बंधुओं को “जय-महावीर” कहकर शुभकामनाएं दें।
नगर-शहर में सेवारत कोरोना-सेनानियों (पुलिस, डॉक्टर, मीडिया कर्मी आदि) को धन्यवाद, जय महावीर बोलकर उन्हें मिष्टान्न आदि भेंट कर सकते है।
संध्याकाल में सांय 7 बजे श्री महावीराष्टक स्तोत्र, चालीसा आदि का पाठ – प्रार्थना करते हुए 24 दीपको से मंगल आरती अवश्य करें फिर उन सभी दीपको को अपने घर आंगन, बालकनी आदि में रखकर अपने घर और अंतर्मन को प्रकाशित करें ।
तो आओ इस तरह इस वर्ष के संकटकाल में भी श्री महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव को राष्ट्रीय नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाकर जन जन तक भगवान महावीर के द्वारा प्रवर्तित अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह, स्याद्वाद, शाकाहार, जियो ओर जीने दो आदि अमर संदेशों को पहुंचाने का प्रयास करें ।
धर्मयोगी (डॉ.) योगभूषण महाराज
(संस्थापक : धर्मयोग फाउंडेशन)
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