महापंडित राहुल सांकृत्यायन पर होगा मंथन

14 से 16 मार्च तक दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में महापंडित राहुल सांकृत्यायन के जीवन से जुड़े इन्ही पहलुओं पर चर्चा और मंथन होगा। भारत समेत विभिन्न देशों के विद्वान महापंडित के जीवन और योगदान से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को भी उजागर करेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में जुटेंगे कई देशों के विद्वान दर्जनों भाषाओं का ज्ञान, संस्कृत, वेदों और दर्शन शास्त्र का गहन अध्ययन, दुनिया के कई देशों का भ्रमण और बौद्ध साहित्य समेत दुर्लभ गंथ्रों को भारत लाने वाले राहुल सांकृत्यायन को इसीलिए महापंडित कहा गया।
यूपी के आजमगढ़ जिले में जन्मे राहुल सांकृत्यायन का वास्तवित नाम केदारनाथ पांडेय था। आठवीं क्लास से बाद आगे पढ़ाई नहीं की और कम उम्र में ही घर छोड़कर संन्यासी हो गए और दामोदर स्वामी के नाम से जाने जाने लगे। बौद्ध धर्म से वह बेहद प्रभावित थे और 1930 में श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म अपना लिया जिसके बाद उनका नाम राहुल सांकृत्यायन हुआ। डिग्रियों से नहीं बल्कि अपने जुनून से राहुल सांकृत्यायन बौद्ध अध्ययन और हिंदी साहित्य के प्रकांड विद्वान बन गए।
भारतीय संस्कृति पर संस्कृत में कार्य असली बौद्ध पांडुलिपियों की खोज में राहुल सांकृत्यायन ने कई बार तिब्बत की मुश्किल यात्राएं कीं। महापंडित राहुल सांकृत्यायन उन ग्रंथों की खोज में बार-बार तिब्बत गए जो कि 13वीं शताब्दी में महान प्राचीन विश्वविद्यालयों नालंदा और विक्रमशिला में आग लगने के बाद गुम हो गए थे। अपने अथक प्रयासों से उन्होंने कई दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को खोज निकाला जिनका भोट भाषा में अनुवाद भी किया। जिन महत्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथों की उन्होंने खोज की उनमें प्रमणा – वर्तिका और धर्माकृति, हेतु बिंदु, धर्मोत्तरा प्रदीप, अभिधर्म कोशा ऑफ वसुबंधु प्रमुख हैं। राहुल सांकृत्यायन घुमक्कड़ साहित्कार के नाम से भी जाने जाते थे।

अपनी तिब्बत यात्राओं के दौरान राहुल सांकृत्यानन ने तिब्बत भाषा में महारथ हासिल की। उन्होंने तिब्बत-हिंदी शब्दकोष भी तैयार किया। राहुल सांकृत्यायन दुर्लभ साहित्य को खच्चरों पर लादकर भारत लाए थे। तिब्बत और भारत के हजारों साल पुराने आध्यात्मिक रिश्तों और इन दोनों भूमियों से रिश्ता रखने वाले महापंडित राहुल सांकृत्यायन के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर दुनियाभर के विद्वान और शोधार्थी प्रकाश डालेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार के साथ ही महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा भारत लाई गई थंगका कलाकृतियों, पांडुलिपियों और लड़की की प्रतिमाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

कार्यक्रम की सूचना – http://ignca.gov.in/invitations/10112017_Sankrityayan.pdf
रिपोर्ट- देवेन्द्र शर्मा
Email – sharmadev09@gmail.com
Editorial Review Note
Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
Leave a Reply