श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब मनावें? – शास्त्रोक्त मंथन व निष्कर्ष
*निशीथे तमउद्भूते जायमाने जनार्दने।
देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णु: सर्वगुहाशय:॥*
(श्रीमद्भागवत महापुराण १०/०३/०८)*
मंथन:
दिनांक १४/०८/२०१७ को सूर्योदय से सप्तमी व रात्रि ७:४५ के उपरान्त अष्टमी तिथि है जो कि अर्धरात्रि के समय भी रहेगी। अतएव एक मत के अनुसार आज रात्रि में केवल अष्टमी तिथि ग्राह्य होने के कारण कुछ लोग श्रीकृष्ण जन्म आज मना रहे हैं।
परन्तु; निर्णय सिन्धु के अनुसार “पूर्वविद्धाष्टमी या तु उदये नवमीदिने। मूहुर्तमपिसंयुक्ता सम्पूर्णौ साष्टमी भवेत्॥ कलाकाष्ठामुहूर्तापि यदा कृष्णाष्टमीतिथि:। नवम्यां सैव ग्राह्या स्यात्सप्तमीसंयुता न हि॥ (निर्णय सिंधु परिच्छेद २, पृष्ठ १९१)
अर्थात् सूर्योदय से युक्त अष्टमी संग नवमी तिथि को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मान्य करनी चाहिये। अष्टमी युक्त नवमी ग्राह्य है, परन्तु; सप्तमी युक्त अष्टमी नहीं। यही बात ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी स्पष्ट है कि प्रात: संकल्पकालव्याप्तेराधिक्यात्। वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमीसंयुताष्टमी। इति ब्रह्मवैवर्ताच्च (निर्णय सिंधु पृष्ठ १९०)
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण का प्राकट्य भादों कृष्णपक्ष, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चन्द्र तथा सिंह राशि के सूर्य आदि में हुआ।
दिनांक १५/०८/२०१७, मंगलवार को सूर्योदय से सायं ५:३९ तक अष्टमी, तदोपरान्त नवमी है तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार उपरोक्त योग भी बन रहा है। प्रात: ९:३६ के बाद वृष के चन्द्रमा रहेंगे, जो रात्रि १२ बजे भी है तथा रात्रि २:३० बजे के उपरान्त रोहिणी नक्षत्र भी आ जायगा।
निष्कर्ष: उपरोक्त शास्त्र-मंथन वैदिक यात्रा शोध-केन्द्र द्वारा प्रमाणित है। अत: दिनांक १५/०८/२०१७ को अर्धरात्रि में ही श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव मनाना चाहिए।
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वैदिक यात्रा परिवार
वैदिक यात्रा गुरुकुल (भागवत विद्यालय)
श्री अमरनाथ धाम, श्री श्रीनाथ शास्त्री मार्ग, वृन्दावन
Editorial Review Note
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