उत्तराखंड, 9 मई; कैलाश मानसरोवर यात्रा की दूरी अब दस किलोमीटर छोटी हो गई है. उत्तराखंड के धारचूला से चीन सीमा के लिपुलेख तक सड़क मार्ग को 10 किलोमीटर तक काट दिया गया है और अब से यह आसान और बहुत सुखद यात्रा होगी.
पहले पूरी यात्रा 2-3 सप्ताह में पूरी हो जाती थी लेकिन अब श्रद्धालु एक सप्ताह के भीतर ही पूरी कर लेंगे. धारचूला से लिपुलेख तक जाने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क का उद्घाटन रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया था. न्होंने पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के काफिले को कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रवाना किया था.
इससे पहले यात्रा करते समय 80 प्रतिशत मार्ग चीन के क्षेत्राधिकार में आता था. लेकिन अब इसे उलट दिया गया है क्योंकि अब से तीर्थयात्री भारतीय सड़कों पर 84 प्रतिशत भूमि यात्रा करेंगे और चीन में केवल 16 प्रतिशत भूमि यात्रा करेंगे.
अधिकारी के मुताबिक पिछले दो सालों में इस मार्ग पर काम तेजी से हुआ है. इससे पहले कि हम एक साल में केवल 2 किलोमीटर काम काम पूरा करने में कामयाब रहे, लेकिन पिछले साल लगभग 20 किमी काम पूरा कर लिया गया था.
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रक्षामंत्री ने कार्य को पूरा करने और इस महत्वपूर्ण सड़क संपर्क को स्थापित करने के लिए सीमा सड़क संगठन के प्रयासों की भी सराहना की.
गौरतलब है कि कैलाश-मानसरोवर की तीर्थयात्रा हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों द्वारा पवित्र और पूज्यनीय रही है. यह सड़क घियाबागढ़ से निकलती है और कैलाश मानसरोवर के प्रवेश द्वार लिपुलेख दर्रे पर समाप्त होती है.
वर्तमान में, कैलाश-मानसरोवर की यात्रा में सिक्किम या नेपाल मार्गों के माध्यम से लगभग दो से तीन सप्ताह लगते हैं. लिपुलेख मार्ग में ऊंचाई वाले इलाकों के माध्यम से 90 किलोमीटर का ट्रेक था और बुजुर्गों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.
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