निशीथे तमउद्भूते जायमाने जनार्दने ।
देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णु: सर्वगुहाशय: ॥
( श्रीमद्भागवत महापुराण* (10/03/08)
शास्त्र विचार
शास्त्रों में स्मार्त, वैष्णव, शैव, शाक्त, गाणपत्य आदि अनेक आचार्यों के भिन्न-भिन्न मत अर्थात् सिद्धान्त हैं । इनमें, जो जिनका उपासक है तथा जिस पथ का पथिक है, वह अपने उन आचार्य ( गुरु ) के दिये गये शास्त्रसम्मत मतों ( सिद्धान्तों ) को मानकर उनका अनुगमन करते हैं । मुख्य रूप से हम यहाँ दो मतों की चर्चा करते हैं । स्मार्त तथा वैष्णव मत । वैष्णवों में भी प्रमुख चार सम्प्रदाय हैं –
वैष्णव सम्प्रदाय ( प्रवर्तक: श्रीरामानुजाचार्य जी महाराज )
ब्रह्म सम्प्रदाय ( प्रवर्तक: आचार्य श्री आनन्दतीर्थ जी महाराज )
रुद्र सम्प्रदाय ( प्रवर्तक: श्रीमद्वल्लभाचार्य जी महाराज )
सनक सम्प्रदाय ( प्रवर्तक: श्रीनिम्बार्काचार्य )
स्मार्त मत के अनुसार
स्मार्त मतानुसार वे चन्द्रोदय को स्वीकारते हुए पर्व के समय उस तिथि के होने को महत्त्व देते हैं – ‘अष्टमी चन्द्रोदयव्यापिनी यदा तदा जयन्ती व्रतम्’ ( कृत्यसार समुच्चय )
तद्युत्तरदिने चन्द्रोदयव्यापिनी नाष्टमी तदा सप्तमीसंयुता ग्राह्या । ( कृत्यसार समुच्चय )
अर्थात् वे चन्द्रोदय के अनुसार रात्रि के समय अष्टमी तिथि होने पर जन्माष्टमी पर्व मनाते हैं – ‘निशीथव्यापिनी अष्टम्याम्’ ।
वैष्णव मत के अनुसार
वैष्णव मतानुसार वे सूर्योदय के समय की तिथि को महत्त्व देते हैं । ‘उदयव्यापिनी अष्टम्यमलम्बिनां वैष्णवानाम्’ अर्थात् सूर्योदय में यदि अष्टमी है, तो रात्रि में अष्टमी न होने पर भी सूर्योदय के अनुसार उसे अष्टमी तिथि के रूप में ही ग्राह्य करते हैं और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को मनाते हैं ।
कलाकाष्ठामुहूर्तापि यदा कृष्णाष्टमीतिथि: ।
नवम्यां सैव ग्राह्या स्यात्सप्तमीसंयुता नहि ॥
( पद्मपुराण, निर्णय सिंधु परिच्छेद २ )
कुछ वैष्णव शुद्ध नक्षत्र को महत्त्व देते हैं, वे उस पर्व के समय रोहिणी नक्षत्र के होने पर ही पर्व को मनाते हैं – ‘शुद्धभोपासिनां ( रोहिणी मतावलम्बी ) केषाञ्चित् वैष्णवानाम्’ ।
यह भी पढ़ें-श्रीकृष्ण जन्माष्टमी – 12 अगस्त 2020 (बुधवार)
मंथन
उपरोक्त शास्त्रीय विचारों के अनुसार स्मार्तजन दिनाङ्क 11, वैष्णवजन ( सूर्योदय की तिथि को मानने वाले दिनाङ्क 12 तथा नक्षत्र प्रधान वाले वैष्णव दिनाङ्क 13 अगस्त को जन्माष्टमी मना रहे हैं ।
वैदिक निष्कर्ष
उपरोक्त शास्त्र-मंथन वैदिक यात्रा शोध-केन्द्र द्वारा प्रमाणित है । समस्त स्मार्त-वैष्णवादि सिद्धान्त तथा वैष्णवों के प्रबल पक्ष को देखने एवं जहाँ भगवान् श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ है, वहाँ के वैष्णवों के शास्त्रीय विचारों को महत्त्व देने पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व दिनाङ्क *12/08/2020 को अर्धरात्रि में ही मनाना चाहिए ।
वैदिक यात्रा परिवार
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