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क्या आप जानते हैं, गोवत्स द्वादशी क्यों मनाई जाती है?

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क्या आप जानते हैं, गोवत्स द्वादशी क्यों मनाई जाती है?

क्या आप जानते हैं, गोवत्स द्वादशी क्यों मनाई जाती है?

गोवत्स द्वादशी, जिसे वसु बारस भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और दीपावली से एक दिन पहले पड़ता है। गोवत्स द्वादशी का मुख्य उद्देश्य धन, समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए माता–पिता और बच्चों के कल्याण की कामना करना है।

गोवत्स द्वादशी का धार्मिक महत्व

गोवत्स द्वादशी पर गाय की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है क्योंकि यह जीवनदायिनी है। गाय दूध, घी और अन्य उपयोगी पदार्थ देती है, इसलिए इसे “संपत्ति और समृद्धि का प्रतीक” माना गया। इस दिन पूजा करने से घर में संपत्ति और सुख-शांति बनी रहती है।

धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति गोवत्स द्वादशी पर व्रत करता है और गाय की पूजा करता है, वह धन की कमी और रोगों से बचा रहता है। इसके साथ ही यह पर्व कृषकों और घर के सदस्यों दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।

गोवत्स द्वादशी की कथा

पुराणों के अनुसार, एक बार राजा युधिष्ठिर ने अपने राज्य में धन की कमी देखी। तब ऋषियों ने उन्हें बताया कि गोवत्स द्वादशी पर व्रत करने और गाय की पूजा करने से घर में समृद्धि आती है।
कहानी यह भी बताती है कि इस दिन गोधन (गाय) को भोजन और जल देने से धन और सुख की प्राप्ति होती है, क्योंकि गाय धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का प्रतीक है।

पूजा विधि

  1. स्नान और शुद्धता: गोवत्स द्वादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. गाय की सेवा: घर में या आस-पास किसी गौशाला में गाय को चारा और जल दें।

  3. पूजा का सेटअप: लाल कपड़े पर कलश रखें, उसमें जल, हल्दी, कुंकुम और फूल रखें।

  4. आरती और मंत्र: गाय के सामने दीपक जलाएं और गाय को पुष्प अर्पित करें। “ॐ गोमतीधनाय नमः” जैसे मंत्र का जाप करें।

  5. भोग और प्रसाद: पूजा के बाद गाय को भोजन दें और घर में गरीबों या बच्चों को प्रसाद वितरण करें।

गोवत्स द्वादशी का आधुनिक महत्व

आज के समय में गोवत्स द्वादशी केवल धार्मिक व्रत नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और पशु संरक्षण का प्रतीक भी बन गई है। लोग इस दिन गायों की सेवा करते हैं और उन्हें स्वस्थ रखने का प्रयास करते हैं। इससे बच्चों में सहानुभूति और करुणा की भावना भी बढ़ती है।

गोवत्स द्वादशी केवल एक व्रत या त्योहार नहीं है। यह धन, समृद्धि, संतुलन और परिवार के कल्याण का प्रतीक है। इस दिन गाय की पूजा और सेवा करने से घर में सुख-शांति आती है और सभी सदस्य स्वस्थ एवं प्रसन्न रहते हैं।
इसलिए हर वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी पर गोवत्स द्वादशी बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

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By Religion World October 10, 2025 3 min read
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