क्यों कहते हैं माँ स्कंदमाता को संतान सुख और समृद्धि देने वाली देवी?
नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ दुर्गा के पाँचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण स्कंदमाता कहा जाता है। माँ स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत दिव्य और ममतामयी है। उनकी गोद में बाल स्कंद विराजमान रहते हैं और उनके चार हाथों में कमल और शिशु होते हैं। वे न केवल संतान सुख देती हैं बल्कि अपने भक्तों को समृद्धि, शक्ति और आंतरिक शांति भी प्रदान करती हैं।
संतान सुख का आशीर्वाद
माँ स्कंदमाता को विशेष रूप से संतान सुख देने वाली देवी माना जाता है। जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, वे नवरात्रि के पंचमी तिथि पर माँ की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी पूजा से संतान प्राप्ति होती है और संतान का जीवन सुखमय तथा दीर्घायु होता है। माँ स्कंदमाता के भक्तों का विश्वास है कि उनका आशीर्वाद संतान के स्वास्थ्य, बुद्धिमत्ता और करुणा को भी बढ़ाता है।
समृद्धि और खुशहाली
माँ स्कंदमाता की पूजा से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। जिन घरों में आर्थिक तंगी या निरंतर अशांति रहती है, उनकी आराधना से सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रवेश होता है। माँ की कृपा से परिवार में प्रेम, सहयोग और सौहार्द्र भी बढ़ता है।
आध्यात्मिक उन्नति
माँ स्कंदमाता साधक को केवल सांसारिक लाभ ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी दिखाती हैं। उनकी आराधना से मन शांत होता है, भक्ति और ज्ञान का विकास होता है और मोक्ष की ओर कदम बढ़ते हैं। उनका आशीर्वाद साधक के जीवन में साहस और विश्वास की भावना जगाता है।
मातृत्व का स्वरूप
माँ स्कंदमाता मातृत्व और पालन-पोषण की देवी हैं। उनका स्वरूप ममतामयी, करुणामयी और शक्तिशाली है। उनकी पूजा से भक्त के जीवन में करुणा, धैर्य और संवेदनशीलता आती है। वे अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट और नकारात्मक प्रभाव से बचाती हैं।
पूजा विधि
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पंचमी तिथि को सुबह स्नान कर माँ स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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उन्हें कमल का फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
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“ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जप करें।
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दुर्गा सप्तशती या देवी पाठ का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।
माँ स्कंदमाता की पूजा करने से न केवल संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि मिलती है, बल्कि भक्त को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और साहस का अनुभव भी होता है। यही कारण है कि नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा अत्यंत शुभ और पवित्र मानी जाती है।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो
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