लखनऊ, 5 फरवरी: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने की यूपी सरकार की घोषणा के बाद इस मामलें में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कूद पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही देने का ऐलान किया गया है। लेकिन, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का दावा है कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड जमीन कबूल करता है तो ये उसका अकेले का फैसला होगा, इसे भारतीय मुसलमानों का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। इससे पहले यूपी सरकार ने वहां अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मस्जिद के लिए जमीन देने की घोषणा की थी।
सुन्नी वक्फ बोर्ड सभी मुसलमानों का प्रतिनिधि नहीं‘

यूपी सरकार की ओर से अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मुहैया कराए जाने के ऐलान के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड सभी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, इसलिए अगर वह जमीन स्वीकार करता है तो ये सभी मुसलमानों का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना यासिन उस्मानी ने कहा है कि, “सुन्नी वक्फ बोर्ड पूरे मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि नहीं है। अगर वह जमीन लेता है तो इसे देश सभी मुसलमानों का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। ” उन्होंने दावा किया कि ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड और जो भी उसके साथ जुड़े हुए हैं, उन्होंने तय किया है कि “अयोध्या में कोई जमीन नहीं लेंगे।”
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अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद के लिए जमीन
गौरतलब है कि पिछले साल 9 नवंबर के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिसाहिक फैसले के मुताबिक बुधवार को ही यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का ऐलान किया है। ये जमीन अयोध्या के धन्नीपुर गांव में दी जाएगी। यूपी सरकार का ये ऐलान संसद में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र‘ ट्रस्ट की घोषणा के फौरन बाद किया गया है। यूपी सरकार के मंत्री श्रीकांत शर्मा के मुताबिक, ‘यूपी कैबिनेट ने श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत केंद्र की सहमति पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ये जमीन अयोध्या जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर सोहावल के धन्नीपुर गांव में मिलेगी।’ जानकारी के मुताबिक ये जगह तहसील सोहावल रौनाही थाने के दो सौ मीटर पीछे है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का निर्माण

बताते चलें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बारे में घोषणा की। इसकेबाद ट्रस्ट से जुड़े 15 सदस्यों के बारे में जानकारी मिली। अयोध्या विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य वकील रहे 92 वर्षीय के. पाराशरण को ट्रस्टी बनाया गया है। उनके अलावा एक शंकराचार्य समेत 5 सदस्य धर्मगुरु ट्रस्ट में शामिल हैं। अयोध्या के पूर्व शाही परिवार के राजा विमलेंद्र प्रताप मिश्रा, अयोध्या के ही होम्योपैथी डॉक्टर अनिल मिश्रा और कलेक्टर को ट्रस्टी बनाया गया है।
पहले कहा जा रहा था कि चार शंकराचार्यों को इस ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा, लेकिन सरकार ने ट्रस्ट में सिर्फ प्रयागराज के ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज को शामिल किया गया है। ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी जगह दी गई है, लेकिन अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास को ट्रस्ट की मीटिंग में वोटिंग का अधिकार नहीं होगा।
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