जैसा कि आप सब जानते हैं कि प्रयागराज के त्रिवेणी तट पर माघ मेला 2020 आरम्भ हो चुका है। इस स्थान की दिव्यता और पवित्रता की कोई तुलना नहीं है और ये सभी जानते हैं और मानते भी हैं। इस मेले में करोड़ो की संख्या में लोग शामिल होते हैं और यहां के अद्भुत वातावरण के सानिध्य में रहते हैं। इस साल भी ये मेला लगा हुआ है।
10 जनवरी यानि की पौष पूर्णिमा से माघ मेला लगा हुआ है और पूरे 45 दिन यानी की महाशिवरात्रि तक चलेगा। इलाहाबाद, हरिद्वार और उत्तर काशी में लगने वाला ये मेला अपने आप में खास है और खुद में हज़ारों कथाओं और किवदन्तियों को समेटे हुए है।
लाखों करोड़ों कल्पवासी

माघ मेले के दौरान प्रयागराज में एक नया शहर देखने को मिलता है. इस दौरान यहां लाखों करोड़ों की संख्या में लोग आते हैं और यहां कल्पवास करते हैं, कल्पवास मतलब अपने घर-परिवार से बिल्कुल कट कर रहना. मोह माया, लालच और किसी भी प्रकार के सांसारिक या भौतिक सुख को पूरी तरह से त्याग देना।
इस मेले के दौरान भक्तगण जमीन पर सोते हैं, सुबह- वक्त गंगा में नहाते हैं और सिर्फ एक बार खाना खाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि रामायण के वक्त में तीर्थराज प्रयाग में महर्षि भारद्वाज का आश्रम था और उस समय पर पूरे भारत देश के वे सभी लोग जो धर्म से संबधित कार्यों में रूचि रखते हैं, यहां साधक बनकर आते थे और कल्पवास का पालन करते थे।
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यहाँ से जुडी मान्यताएं

अगर इस स्थान की पवित्रता और यहां से जुड़ी मान्यताओं के संदर्भ में बात की जाए तो ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि यानि इस संसार की रचना करने से पहले एक यज्ञ किया था और इस यज्ञ की शुरूआत माघ के महीने में हुई थी। यही कारण है कि इस महीने गंगा किनारे के इन तीन शहरों उत्तरकाशी, हरिद्वार और इलाहाबाद में डुबकी लगाने का खास महत्व है।
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6 बड़े स्नान

माघ मेले के दौरान 6 बड़े स्नान होते हैं जिसमें से पहला स्नान पौष पूर्णिमा को और अंतिम स्नान महाशिवरात्रि के दिन होगा। इसके अलावा मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और माघ पूर्णिमा के दिन भी यहां बड़े स्नान होते हैं।
तो अब आप भी फुर्सत के कुछ पल स्वयं के लिए निकालिए और इस मेले का आनंद उठाइए।
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