RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

मौनी अमावस्या: जानिये मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा

मौनी अमावस्या: जानिये मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा

मौनी अमावस्या: जानिये मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा
Visual Archive

मौनी अमावस्या: जानिये मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा

माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. शास्त्रीय मान्यता है कि इस अमावस्या के दिन मौन रहकर व्रत और भगवत भक्ति करने से अनेक प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं. आइये जानते हैं मौनी अमावस्या से जुडी पौराणिक कथा



मौनी अमावस्या व्रत कथा

एक प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार कांचीपुरी में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी धनवती और सात पुत्रों-एक पुत्री के साथ रहता था. पुत्री का नाम गुणवती था. ब्राह्मण ने अपने सभी पुत्रो की शादी के बाद अपनी पुत्री का वर ढूंढना चाहा. ब्राह्मण ने पुत्री की कुंडली पंडित को दिखाई. कुंडली देख पंडित बोला कि पुत्री के जीवन में वैधव्य  दोष है. यानी वो विधवा हो जाएगी. पंडित ने इस दोष के निवारण के लिए एक उपाय बताया.

धोबिन का पूजन

उन्होंने बताया कि कन्या अगर सोमा (धोबिन) का पूजन करेगी तो यह दोष दूर हो जाएगा. गुणवती को सोमा को अपनी सेवा से खुश करना होगा. ये उपाय जान ब्राह्मण ने अपने छोटे पुत्र और पुत्री को सोमा को लेने भेजा. सोमा सागर पार सिंहल द्वीप पर रहती थी. छोटा पुत्र सागर पार करने की चिंता में एक पेड़ की छाया के नीचे बैठ गया. उस पेड़ पर गिद्ध का परिवार रहता था. शाम होते ही गिद्ध के बच्चों की मां अपने घोसले में वापस आई तो उसे पता चला कि उसके गिद्ध बच्चों ने भोजन नहीं किया.

गिद्ध के बच्चे अपनी मां से बोले की पेड़ के नीचे दो प्राणी सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं. जब तक वो कुछ नहीं खा लेते, तब तक हम भी कुछ नहीं खाएंगे. ये बात सुन गिद्धों की मां उस दो प्राणियों के पास गई और बोली – मैं आपकी इच्छा को जान गई हूं. मैं आपको सुबह सागर पार करा दूंगी. लेकिन उससे पहले कुछ खा लीजिए, मैं आपके लिए भोजन लाती हूं.

यह भी पढ़ें-मौनी अमावस्या : जानिए क्या है मौनी अमावस्या के दिन दान करने का महत्व

सोमा के घर पहुंची गुणवती

दोनों भाई-बहन को अगले दिन सुबह गिद्ध ने सागर पार कराया. दोनों सोमा के घर पहुंचे और बिना कुछ बताए उसकी सेवा करने लगे. उसका घर लीपने लगे. सोमा ने एक दिन अपनी बहुओं से पूछा, कि हमारे घर को रोज़ाना सुबह कौन लीपता है? सबने कहा कि कोई नहीं हम ही घर लीपते-पोतते हैं. लेकिन सोमा को अपने परिवार वालों की बातों का भरोसा नही हुआ.

एक रात को इस रहस्य को जानने के लिए सुबह तक जागी और उसने पता लगा लिया कि ये भाई-बहन उसके घर को लीपते हैं. सोमा ने दोनों से बात की और दोनों ने सोमा को बहन के दोष और निवारण की बात बताई. सोमा ने गुणवती को उस दोष से निवारण का वचन दे दिया, लेकिन गुणवती के भाई ने उन्हें घर आने का आग्रह किया. सोमा ने ना नहीं किया वो दोनों के साथ ब्राह्मण के घर पहुंची.

सोमा ने अपनी बहुओं से कहा कि उसकी अनुपस्थिति में यदि किसी का देहांत हो जाए तो उसके शरीर को नष्ट ना करें, मेरा इंतज़ार करें. ये बोलकर वो गुणवती के साथ उसके घर चली गई. गुणवती के विवाह का कार्यक्रम तय हुआ. लेकिन सप्तपदी होते ही उसका पति मर गया. सोमा ने तुरंत अपने पुण्यों का फल गुणवती को दिया. उसका पति तुरंत जीवित हो गया. सोमा ने दोनों को आशार्वाद देकर चली गई. गुणवती को पुण्य-फल देने से सोमा के पुत्र, जमाता और पति की मृत्यु हो गई.



सोमा ने पुण्य फल को संचित करने के लिए रास्ते में पीपल की छाया में विष्णुजी का पूजन करके 108 परिक्रमाएं की और व्रत रखा. परिक्रमा पूर्ण होते ही उसके परिवार के मृतक जन जीवित हो उठे. निष्काम भाव से सेवा का फल उसे मिला.

यह भी पढ़ें-Coronavirus : मथुरा-वृंदावन में दो धार्मिक संगठनों ने गरीबों की मदद की

यह भी पढ़ें-KUMBH MELA 2021: जानिए हरिद्वार कुम्भ 2021 के शाही स्नान के बारे में | kumbh mela

[video_ads]
[video_ads2]
You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta February 11, 2021 4 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

अमावस्या से उभरती रोशनी—पहले चंद्र दर्शन का रहस्य और शुभता

अमावस्या से उभरती रोशनी—पहले चंद्र दर्शन का रहस्य और शुभता हिंदू परंपराओं में चंद्रमा का विशेष स्थान है। चंद्रमा मन, भावनाओं, शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना…

Read now
Hinduism

Chandra Darshan: अमावस्या के बाद चंद्रमा का प्रथम दर्शन क्यों होता है शुभ?

Chandra Darshan: अमावस्या के बाद चंद्रमा का प्रथम दर्शन क्यों होता है शुभ? भारतीय संस्कृति में चंद्रमा का विशेष महत्व है। अमावस्या के अगले दिन जब पहली बार…

Read now
Hinduism

आषाढ़ अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?

आषाढ़ अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है? आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि हिन्दू धर्म में एक विशेष महत्व रखती है। यह दिन पितरों को…

Read now