Isha Kriya: शांति, ख़ुशी और उत्साह प्रदान करती है ईशा क्रिया
ईशा-क्रिया में ईशा का मतलब है, ‘वह जो सृष्टि का स्रोत है और क्रिया यानी , ‘आंतरिक कार्य. ईशा-क्रिया का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को उसके अस्तित्व के साथ संपर्क बनाने में मदद करना होता है. ऐसा करने से व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जी सकता है.
आज के इस युग में बढ़ती हुयी जिंदगी के साथ तालमेल बैठाना बहुत ही मुश्किल काम होता है. ईशा क्रिया द्वारा आप इस भागदौड़ भरी जिंदगी के साथ तालमेल आसानी से बिठा सकते है.
ईशा क्रिया असत्य से सच्चाई पर जाने के लिए एक सरल और शक्तिशाली माध्यम है. ईशा क्रिया योग विज्ञान के शाश्वत ज्ञान का हिस्सा है.
यदि आप भी आज के युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते है तो इस क्रिया का नियमित अभ्यास कर सकते है. जानते है Isha Kriya को करने के तरीके के बारे में.
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ईशा क्रिया को करने की विधि:-
इसे करने के लिए सबसे पहले एक योगा मैट बिछा ले और उस पर पूर्व दिशा की तरफ मुँह करके बैठ जाए.
बैठते समय पालथी लगाकर ही बैठे, फिर अपने हाथ को जांघों पर रखे.
हथेलियों को ऊपर की ओर खुले हुए रखे.
फिर अपने चेहरे को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाये साथ ही अपनी आँखों को बंद कर ले.
इसके बाद अपनी भोहों के मध्य ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करे.
इस क्रिया में आप जो ध्यान करेंगे वह 3 चरण में होता है.
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पहला चरण
- इस ध्यान में धीरे-धीरे आराम से सांस अंदर की ओर लें और छोड़े.
- प्रत्येक बार साँस लेते समय कहे की ‘मैं यह शरीर नहीं हूं और इस विचार के साथ सांस अंदर लेते रहें.
- और साँस छोड़ते समय कहे ‘मैं यह मन भी नहीं हूं और इस विचार के साथ सांस छोड़ते रहें.
- इस प्रक्रिया को 7 से 11 मिनट तक करे.
दूसरा चरण
- इस प्रक्रिया में मुँह को खोल ले और आ… (आऽऽऽ) की लम्बी आवाज़ को बाहर निकाले.
- ध्यान रहे की इसमें आप जो आवाज़ निकाल रहे है वह नाभि के ठीक नीचे वाले भाग से आनी चाहिए.
- इस बात का भी ध्यान रखना है की आपको इसे बहुत जोर से नहीं बोलना है.
- इस क्रिया को 7 बार करे.
- प्रत्येक बार आवाज़ करते हुए साँस को छोड़े.
तीसरा चरण
- इसमें चेहरे को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाये.
- इसके बाद भौंहों के मध्य ध्यान लगाए जो की 5-6 मिनट तक होना चाहिए.
- इस अभ्यास को 12 से 18 मिनट तक करे.
- साथ ही सामान्य साँस ले .
ईशा क्रिया को करने के फायदे
- ईशा क्रिया को करते रहने से मन को शांति मिलती है.
- ईशा क्रिया नियमित करने से जीवन स्वस्थ्य रहता है साथ ही जीवन में उत्साह की वृद्धि होती है.
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