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Navratri 2020: जानिए क्या है नवरात्रि मनाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण

Navratri 2020: जानिए क्या है नवरात्रि मनाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण

Navratri 2020: जानिए क्या है नवरात्रि मनाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण
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Navratri 2020: जानिए क्या है नवरात्रि मनाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण

नवरात्रि का आरंभ होते ही चारो और भक्तिमय वातावरण बन जाता है. यह वह समय होता है जब हवन, यज्ञ और पूजा पाठ करने से अत्याधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है. नवरात्रि को सिर्फ धार्मिक या आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभप्रद माना जाता है.  नवरात्रि आने पर सभी शुभ कामों की शुरुआत होती है. हवन और पूजा पाठ करने से न केवल मानसिक शक्ति मिलती है,बल्कि इससे विचारों में भी शुद्धि आती है. आइए जानते हैं नवरात्रि के पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है.



नवरात्रि में होता है वैदिक परम्परा से पूजन

वैदिक परंपरा से पूज करने वाले नवरात्रि त्यौहार पर हजारों लोग माता दुर्गा के दर्शनों के लिए जाते हैं.  इस पर 1005 कुंभाभिषेक और 2100 से अधिक चंडी होम आयोजित किए जाते हैं. नवरात्रि पर यज्ञ का भी आयोजन किया जाता है. इस समय में किया गया हवन, पूजा और यज्ञ बहुत अधिक लाभ पहुंचाता है. हवन और यज्ञ करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं. इसी कारण से नवरात्रि को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.

यह भी पढ़ें- नवरात्रि स्वास्थ्य: नौ दिन में अपनाएं ये नौ कदम, बनाएं अपनी हेल्थ जर्नी आसान

साल में 2 बार मनाई जाती है नवरात्रि

यह त्योहार साल में दो बार मनाया जाता है. एक तो चैत्र मास में जिसे चैत्र नवरात्रि कहा जाता है और दूसरी शारदीय नवरात्रि जो आश्विन मास में मनायी जाती है. चैत्र नवरात्रि और शारदिय नवरात्रि उत्तर भारत में मुख्य रूप से मनायी जाती है. लेकिन शारदीय नवरात्रि दक्षिण भारत में भी मनायी जाती है. नवरात्रि का समय अत्यंत ही महत्वपूर्ण और शुभ समय माना जाता है. इस समय में सभी प्रकार के शुभ कामों का आरंभ होता है. यही वह समय भी होता है जब ऋतु परिवर्तन भी होता है.



नवरात्रि मनाने का  वैज्ञानिक सिद्धांत

वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है. इसीलिए ऋषि – मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है. मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर – दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है. यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है. जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं , उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि , उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है.

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By Shweta October 20, 2020 3 min read
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