हिंदु धर्म में एकादशी का व्रत सबसे पवित्र माना गया है। निर्जला एकादशी इस बार 2 जून 2020 को है। सदियों से इस व्रत को यथा पूर्वक मनाते आ रहे हैं।
वैसे तो वर्ष में चौबीस एकादशियां होती है किंतु मलमास की दौरान इनकी संख्या छब्बीस हो जाती है। वैसे तो सारी एकादशियों का अपना महत्व है। लेकिन मलमास में पड़ने वाली पदमीनी पदमा एकादशी का महत्व ज्यादा माना गया है।
निर्जला एकादशी का महत्व
निर्जला एकादशी व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। हर व्यक्ति को निर्जला एकादशी का व्रत रखना चाहिए। इस व्रत को करने से जिंदगी के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
घर के अंदर सुख शांति समृद्ध का निवासहोने लगता है और भाग्य उदय हो जाता है। कई लोग ऐसे भी है जो दोनों व्रत नहीं रख पाते है या किसी कारण वश उनका व्रत छूट जाता है जो कि नहीं छूटना चाहिए। इससे व्रत का मिलने वाला फल पूर्ण रुप से नहीं मिल पाता है।
आप लोगों ने शायद लोगों को यह कहते सुन होगा कि जो व्रत को बीच में छोड़ देते हैं व्यक्ति विधिवत नहीं कर पाते हैं। इस व्रत को केवल एकादशी का ही व्रत ऐसा है जो व्रत रखने वाले को तत्काल लाभ पहुंचाता है।
निर्जला एकादशी का नियमित रुप से व्रत रखने वाले व्यक्ति को मन वांछित फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी व्रत को रखने से सारे पाप कट जाते हैं। मन शांत रहता है और धर्म कर्म में लगा रहता है।
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निर्जला एकादशी व्रत के नियम
निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन किया जाता है। इस पावन व्रत के नाम से ही पता चलता है कि व्रती को मास मदिरा से दूर ही रहना चाहिए।
आपको आज कुछ खास बताने जा रहे हैं जो की एकादशी के व्रत में पूरी तरह से वर्जित है। इस नियम का पालन करते हुए व्रत रखने वाले की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। एकादशी के दिन चावल नही खाने चाहिए।
एकादशी के दिन पान, तंबाकू, जर्दा, सुपारी, शराब, आदि नशीली चीजों का सवेन भूल कर भी नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन ब्रश या दातून नहीं करना चाहिए। उंगली से ही दातों की सफाई करनी चाहिए।
निर्जला एकादशी के दिन किसी भी पेड़ से फल, पत्ते या डाली नहीं तोड़नी चाहिए। रात को सोना नहीं चाहिए, इस रात को जागते हुए श्री हरी भगवान की तस्वीर के आगे बैठकर भजन किर्तन करना चाहिए, अगर सारी रात ना जाग सके तो कम से कम आधी रात जागने की कोशिश करनी चाहिए।
क्रोध नहीं करना चाहिए। क्रोध करने से मन अशांत हो जाता है जिससे मन में नकारात्मका विचार आता है और मन स्थिर नहीं हो पाता है क्रोध करने से मन भटक जाता है इसलिए एकादशी के दिन अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें।
एकादशी के दिन उपवास करें या ना करें लेकिन ब्रह्मचार्य का पाल करना चाहिए। एकादशी के दिन मन को पूरी तरह से संयमित रखना चाहिए।
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