- अग्नि अखाड़ा के स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज बनें आचार्य महामण्डलेश्वर
- सबसे युवा आचार्य महामण्डलेश्वर
- पंचायती निरंजनी अखाड़ा दूसरा सबसे बडा शैव अखाड़ा है
14 जनवरी को मकर संक्रांति के खास दिन हरिद्वार में स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज को बड़े धूमधाम के साथ श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा में आचार्य महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक कर अलंकृत किया गया। निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद जी महाराज का पट्टा अभिषेक समारोह हुआ जिसमें उत्तराखंड ही महामहिम गवर्नर श्रीमती बेबी रानी मौर्य सहित भारी संख्या में गणमान्य व्यक्ति वह संत महात्मा उपस्थित रहे।

आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज के पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी में पट्टकाभिषेक एवं सम्मान समारोह में मां काली मंदिर चंडी घाट से पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी मायापुर तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें भारत भर से गुरु जी के शिष्य एवं प्रख्यात हस्तियां भी शामिल हुईं।

वैसे आचार्य महामंडलेश्वर पद पर उनकी नियुक्ति 2 जनवरी को संन्यास के बाद ही हो गई थी। पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष व श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा के श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि 1 जनवरी को जगद्गुरु आश्रम कनखल में जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम से स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने दीक्षा ली थी। संन्यास दीक्षा के बाद दो जनवरी को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर नियुक्ति नियुक्त किया गया था।

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के पंच परमेश्वर की ओर से इसकी घोषणा की गई थी। उसी दिन स्वामी कैलाशानंद गिरी आचार्य महामंडलेश्वर बन गए थे। उसी दिन भंडारे का आयोजन भी किया गया था। आज मकर संक्राति के दिन उनका अखाड़ा में बाकायदा पट्टाभिषेक हुआ जिसमें सैकड़ो संत शामि हुए।
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