सुख-शान्ति की प्रार्थना के साथ Parliament of World Religions, Toronto का समापन

- सुख–शान्ति की प्रार्थना के साथ विश्व धर्म संसद का समापन
- सात दिनों तक चले पार्लियामेंट आॅफ वल्र्ड रिलिजन का नये संकल्पों के साथ समापन
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कनाडा की धरती पर 85 देशों से लोगों के साथ विश्व बन्धुत्व का संदेश देकर मनायी दीपावली
- गो ग्रीन और गो आर्गेनिक, बी आर्गेनिक बाई आर्गेनिक की ओर आगे बढ़ने का संदेश दिया
- पार्लियामेंट आॅफ वल्र्ड रिलिजन टोरंटो, कनाडा में आयोजित कार्यक्रम के समापन अवसर पर अनेक आदिवासियों ने भी सहभाग किया और धरती को बचाने का संकल्प लिया
सात दिनों तक चलने वाला पार्लियामेंट आॅफ वर्ल्ड रिलिजन का नये संकल्पों के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर विश्व के 85 देशों के धर्मगुरूओं, विद्वानों, विचारकों, पर्यावरण विशेषज्ञों एवं आदिवासियों ने सहभाग किया।
आदिवासियों ने कहा कि हमारे पूर्वज सदियों से पर्यावरण और पृथ्वी के लिये सदियों से काम करते रहे है और पर्यावरण के साथ मिलकर चलते रहे है। उन्होने कहा कि हम सभी को यहां से यही संदेश लेकर जाना होगा।
इस समारोह में अनेक उच्चाधिकारी एवं विश्व के 85 देशों से आये हुये लगभग दस हजार लोगों ने इस समारोह में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा, ’’जब आप सभी पार्लियामेंट से वापस जाये तो स्वर्गतुल्य आनन्द के साथ जाये बाहर लोगों को लगे कि कुछ बदले–बदले से लग रहे है, कुछ अलग क्रियाशील, संवेदनशील, सृजनशील होकर यहां से जाये। पृथ्वी के लिये हरित पर्यावरण के लिये उसके पहरेदार और पैरोकार बनकर जाये लोग देखे तो लगे की कुछ–कुछ हो गया है और ऐसा कुछ हुआ है जो अब धरती के लिये कुछ करने के लिये संकल्पबद्ध है। स्वामी जी ने कहा कि अपने कल्चर; नेचर और फ्यूचर अर्थात हमारा कल्चर है संगच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मानांअसि जानताम्, देवा भागं यथा पूर्वे, सजंनाना उपासते के इन मंत्रों के साथ आगे बढ़। अर्थात हम साथ–साथ चले, साथ–साथ मिलकर रहे, हम सब के मन और हृदय एक हो, मतभेद भले ही हो परन्तु मनभेद न हो। सब मन से एक–दूसरे के साथ जुड़े रहे, एक–दूसरे को समझने और निकट आने का प्रयास करे; शंका से नहीं श्रद्धा से आगे बढ़े और सभी मिलकर शान्ति के लिये कार्य करे, हम एक–दूसरे से तिरस्कार पूर्वक नहीं बल्कि स्वीकार पूर्वक संबंध स्थापित करे और आगे बढ़े।

स्वामी जी महाराज ने कहा कि हम अगली बार जब विश्व धर्म संसद में मिले तो कुछ ऐसी कहानियां, कुछ ऐसी कथायें और कुछ ऐसे सफलता के किस्से साथ लेकर आएं जिससे दूसरे भी प्रेरणा ले सकें। उन्होने कहा कि अकेले–अकेले बहुत चल लिये अब एक साथ चलने और काम करने का जो भाव है जाग्रत करे इससे परिवार, समाज, देश और पूरे विश्व की तस्वीर और तकदीर बदली जा सकती है।
स्वामी जी ने कहा कि आज समय आ गया है कि हमारी पृथ्वी ने अभी तक हमें सहेजा है पालन–पोषण किया हमें धारण किया अब समय आ गया है जिस धरती माँ ने हमें सुरक्षा प्रदान की अब हम उस पृथ्वी को सहेजे और सब मिलकर उस धरती माँ का पालन–पोषण करे। स्वामी जी ने जोर देते हुये कहा कि आने वाले समय में हमारे खाने–पीने, पहनने, विचार करने का हमारी धरती पर कितना असर होता है इस पर जरूर ध्यान दे। उन्होने कहा हमें परमात्मा ने स्वभाव से शाकाहारी बनाया है अतः शाकाहारी बने और शाकाहारी कर्म करे शाकाहारी स्वभाव से; विचार से; आहार से ही हमारा जीवन शांत, सुखी और स्वर्ग सा बनता है यही संस्कार अपने बच्चों को भी प्रदान करे।

स्वामी जी ने कहा कि हम संकल्प लें की हमारी अगली पार्लियामेंट ग्रीन पार्लियामंेट हो; पालिथिन और प्लास्टिक से मुक्त पार्लियामेंट हो जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी एक ग्रीन संदेश के साथ ग्रीन धरती, ग्रीन प्रकृति और स्वच्छ पर्यावरण दिया जा सके। स्वामी जी महाराज ने कहा कि यहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति इस संदेश को सौ–सौ लोगों तक पहंुचाये। यदि कोई व्यक्ति मांसाहारी है तो उसे नम्रतापूर्वक समझाये उससे होने वाले नुकसान के बारे में बताये तथा संकल्प कराये की मांसाहार को छोड़ न सके तो कम से कम कुछ प्रतिशत तो कमी लाये तो कोई भी व्यक्ति दुनिया में भूखा नहीं सोयेगा। आज लगभग 20 हजार लोग भूख से मर जाते है इस धरती पर इसलिये हमारा कर्तव्य है कि हम इस तरह के संकल्प ले और दूसरों को भी कराये ताकि हमारी पृथ्वी बची रहे और कोई भूखा न सोये। वहां उपस्थित लोगों ने स्वामी जी महाराज के सामने शाकाहारी जीवन अपनाने का संकल्प लिया।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि यह धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि पर्यावरण की; स्वास्थ्य की, जीवन की और धरती की बात है इसलिये इसे अपनाने और शाकाहारी बनने का प्रयास करे।
स्वामी जी ने कहा कि दीपावली और गोवर्धन उत्सव के अवसर हम केवल अपने परिवार से ही नहीं बल्कि विश्व परिवार से मिल रहे है उसमे अनेक धर्मो के विश्व के अनेक देशो के लोग अनेक विचारों के और अनेक वर्गो केे लोग आपस में मिल रहे है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि हम एक दीपक की तरह दूसरों को प्रकाश दे और स्वयं भी प्रकाशवान बनकर सभी को प्रकाशित करे; आज दीपक कही बाहर नहीं बल्कि अपने अन्दर जलाये और स्वयं को प्रकाशित करे। हम दूसरों के जीवन में शान्ति का, प्रेम का, एकता का, एकत्व का, सत्य का, अहिंसा का प्रकाश फैलाये ताकि समाज में परिवर्तन आ सके तभी हमारा दीपावली मनाना सार्थक होगा।
स्वामी जी महाराज ने टोरंटो, कनाडा की सिख संगत (कम्यूनिटी) को धन्यवाद दिया जिन्होने लगभग दस हजार लोगों को प्रतिदिन निष्काम भाव से लंगर सेवा प्रदान की।
स्वामी जी महाराज ने पार्लियामेंट आॅफ वल्र्ड रिलिजन के चेयरमेन और उनकी पूरी टीम को धन्यवाद दिया और कहा कि सात दिनों तक कड़ी मेहनत के साथ इस दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया।
स्वामी जी महाराज ने वहां उपस्थित सभी लोगों को प्रयाग कुम्भ में सहभाग हेतु आमंत्रित किया और कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और कर्मयोगी मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी ने भरपूर कोशिश कर रहे है कि पूरे विश्व के लोग वहां आ सकेे। भारत की संस्कृति विश्व मंगल की संस्कृति है; सार्वभौमिक संस्कृति है उस दिव्य और भव्य संस्कृति से परिचित हो सके और सर्वे भवन्तु सुखिनः के विचारों को लेकर विश्व एक परिवार है इन भावों को लेकर विश्व को अपना एक परिवार समझ सके। समारोह में उपस्थित अनेक लोगों ने स्वामी जी महाराज के आमंत्रण को स्वीकार किया।
Editorial Review Note
Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
Leave a Reply