परमार्थ निकेतन में मनाया अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस
ऋषिकेश, 21 जून; परमार्थ निकतन योगा घाट पर विश्व के 30 से अधिक देशों से आये योग जिज्ञासुओं ने योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास वेद मंत्रों के साथ किया. अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने ध्वजारोहण के साथ किया. सभी योग साधकों और योग जिज्ञासुओं ने राष्ट्रगान के पश्चात वेद मंत्रों के साथ योग का अभ्यास किया.
योग दिवस कार्यक्रम में भारत सहित ब्राजील, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, अमेरिका, स्पेन, यूके, इटली, फ्रांस, मैक्सिको, अर्जेटीना, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, नार्वे, स्विट्जरलैण्ड, पुर्तगाल, जर्मनी, कनाडा, इक्वाडोर और तुर्की आदि देशों के योग साधकों ने सहभाग किया.

परमार्थ निकेतन की योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती जी ने वेद मंत्रों के साथ योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास कराया.
विश्व के अनेक देशों से आये योग के राजदूतों को साध्वी भगवती सरस्वती जी ने पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया.
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने योग साधकों को भेजे अपने संदेश में कहा कि “योग करो, रोज करो और मौज करो. शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने के लिये योग को जीवन में स्थान देना नितांत आवश्यक है. योग जीवन में संतुलन लाता है. उन्होने कहा कि योग केवल आसनों का समुच्चय ही नहीं बल्कि यह तो समग्र जीवन का सार है.’’
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’योग के माध्यम से हम स्वयं को परमात्मा से जोड़ सकते है. विश्व की विभिन्न संस्कृति, भाषा, रंग, वेषभूषा और हम किसी भी देश के निवासी हो परन्तु योग ने सभी का संयोग कराया है; मिलन कराया है. उन्होने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि आज हम माँ गंगा के पावन तट पर योग कर रहे है जहां पर प्रत्येक क्षण हमें माँ गंगा का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है. योग ने पूरे विश्व मंे एकता का संदेश प्रसारित किया है. योग का सम्बंध किसी धर्म या संस्कृति से नहीं है बल्कि योग तो आत्मा का परमात्मा से एक दैविय संबंध का नाम है. योग तो ऋषियों की हजारों-हजारों वर्षों की तपस्या का आशीर्वाद है जो हमें प्राप्त हो रहा है.’

सत्व वेलनेस सेंटर, योगाचार्य श्री आनन्द मेहरोत्रा जी ने कहा कि ‘योग वह तकनीक है जिससे आप जीवन में शान्ति को प्राप्त कर सकते है. योग जीवन को जीने की एक सुव्यस्थित पद्धति है. योग वह सुप्रीम टेक्नोलॉजी है जिसके माध्यम से हम ग्लोबल स्तर पर सतत विकास और शान्ति की स्थापना कर सकते है. उन्होने इस अतुल्य कार्यक्रम में सहभाग हेतु सभी को धन्यवाद दिया.’
मुनि श्री संयमरत्न विजय जी ने योग के आठ अंगों को सहज रूप से समझाते हुये कहा कि हमें समाधी तक पहुंचने के लिये पतंजलि के आठ सूत्रों को आत्मसात करना होगा. उन्होने यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और फिर समाधी पर गूढ़ प्रकाश डाला. उन्होने कहा कि तन, मन और वचन का एक स्थान पर स्थिर हो जाना ही योग है. मन, वचन और काया को जोड़ना ही योग है.’’
लामा खेन्पो शेराब जी ने कहा कि हम आज यहां पर योग दिवस के माध्यम से डे ऑफ़ यूनिटी, डे ऑफ़ यूनियन को सेलिब्रेट कर रहे है जिसके माध्यम से हम मन और शरीर को अलग-अलग कर देख सकते है. वास्तव में योग एक अद्भुत विज्ञान है.
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इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में एलेक्जेनड्रा, वेस्टरबीक चीफ़ कम्युनिकेशन एडवोकेसी ऑफ़ पार्टनशीप -यूनिसेफ इण्डिया, अमृता सिंह, यूनिसेफ इण्डिया, सत्व वेलनेस सेंटर, योगाचार्य श्री आनन्द मेहरोत्रा जी, सीमा डेण्टल कॉलेज के विद्यार्थी, परमार्थ निकेतन के आचार्य संदीप शास्त्री जी, ऋषिकुमार परमार्थ गुरूकुल, आरोग्य योग स्कूल आचार्य श्री रजनीश जी एवं विद्यार्थी, आदि योगी पीठ, आचार्य सुमित जी एवं विद्यार्थी, ओम शान्ति ओम आचार्य दिनेश जी एवं विद्यार्थी, शिव योगपीठ आचार्य सिद्धार्थ जी एवं विद्यार्थी, अक्शी योगशाला आचार्य श्री विवेक जी एवं विद्यार्थी, एकत्व योग/हरि योग आचार्य कल्पेन्द्र जी एवं विद्यार्थी, आत्म योग शाला आचार्य अमित जी एवं विद्यार्थी, समत्वा योगशाला आचार्य श्री नटवर जी एवं विद्यार्थी, हरिओम योगशाला, आचार्य हरिओम जी, एकम्योग शाला योगाचार्य प्रीति जी एवं विद्यार्थी, योग आनन्दम् आचार्य श्री मनीष जी एवं विद्यार्थी, श्री अजय गुप्ता जी, अनेक योगाचार्यो एवं योग जिज्ञासुओं ने सहभाग किया.
परमार्थ निकेतन से डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी, साध्वी आभा सरस्वती (माताजी), सुश्री गंगा नन्दिनी जी, डॉ. इन्दू शर्मा जी, वन्दना शर्मा जी, श्री अमित जी, श्री नरेन्द्र बिष्ट जी, स्वामी शान्तानन्द जी, स्वामी सेवानन्द जी, श्री सोमेश शर्मा जी, सुश्री प्रीति जी एवं अनेक सदस्यों ने सहभाग किया.
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी को योग करो, रोज करो और मौज करो का संकल्प कराया. तत्पश्चात सभी ने परमार्थ निकेतन की नवोदित परम्परा विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया एवं सभी विशिष्ट अतिथियांे को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया
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