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युनिवर्सल पीस फेडेरेशन ने आचार्य लोकेश को शांति दूत पुरस्कार से नवाजा

युनिवर्सल पीस फेडेरेशन ने आचार्य लोकेश को शांति दूत पुरस्कार से नवाजा

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युनिवर्सल पीस फेडेरेशन ने आचार्य लोकेश को शांति दूत पुरस्कार से नवाजा

युनिवर्सल पीस फेडेरेशन ने आचार्य लोकेश को शांति दूत पुरस्कार से नवाजा

  • विकास के लिए शांति आवश्यक – आचार्य लोकेश

नई दिल्ली : अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक प्रख्यात जैनाचार्य डा. लोकेश मुनि को युनिवर्सल पीस फेडरेशन ने कॉंस्टीट्यूशन क्लब में भारतीय अंतरधार्मिक संवाद के दौरान ‘शांति दूत’ सम्मान से उनके विश्व शांति, अंतर धार्मिक सद्भावना, अहिंसा व भाई चारे की स्थापना के अथक प्रयासों के लिए अलंकृत किया। कार्यक्रम में विभन्न देशों व धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आचार्य लोकेश ने ‘ संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य में धार्मिक संगठनो की भूमिका ‘ विषय को संबोधित करते हुए कहा कि वृहत स्तर पर एक देश या समुदाय की खुशहाली सतत् विकास, सांस्कृतिक मूल्यों के परिरक्षण और संवर्धन, प्राकृतिक वातावरण के संरक्षण तथा सुशासन की स्थापना के स्तंभों पर आधारित होते है। वर्तमान परिस्थितों में ऐसे समसामयिक विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करना राष्ट्र व समाज के लिए कल्याणकारी है। मौजूदा समय में  हम जिस दौर से गुजर रहे है, आज न केवल भारत बल्कि अमेरिका,चीन सहित सम्पूर्ण विश्व हिंसा व आतंकवाद से प्रभावित है। सीरिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, ईराक, बांग्लादेश, फ़्रांस, रूस में  आये दिन धर्म, जाति व सम्प्रदाय के नाम पर बेगुनाहों का कत्लेआम हो रहा है। ऐसे समय में अंतरधार्मिक संवाद की बहुत आवश्यकता है, क्योंकि हिंसा और आतंकवाद किसी समस्या का समाधान नहीं है| हिंसा प्रतिहिंसा को जन्म देती है।

आचार्य लोकेश ने कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है तोड़ना नहीं। धर्म के क्षेत्र में हिंसा, घृणा और नफरत का कोई स्थान नहीं हो सकता | संवाद के द्वारा, वार्ता के द्वारा हर समस्या को बैठ कर सुलझाया जा सकता है| उसके लिए सबसे पहले जरूरी है, हम अपने अस्तित्व की तरह दूसरों के अस्तित्व का, विचारों का सम्मान करना सीखें| मतभेद हो सकते है किन्तु उसे मनभेद में न बदले। हम सभी विकास चाहते है, समृद्धि चाहते है। विकास व शांति का गहरा सम्बन्ध है| धर्मगुरु, राजनेता व समाज के विभिन्न  क्षेत्रों के प्रमुख जब एक मंच से शांति व सद्भावना का सन्देश देंगे तो निश्चित रूप से इसका प्रभाव होगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री बीरेन्द्र सिंह चौधरी, नेपाल के पूर्व मंत्री व यू.पी.ऍफ़. एशिया पैसिफिक के अध्यक्ष श्री एक नाथ ढाकाल, सांसद भुवनेश्वर कलिता, आर. रामकृष्णन, यू.पी.ऍफ़. के अन्तर्राष्ट्रीय सलाहकार रेव. नों-ही पाक व रेव. हयूंग ताई किम, श्री चैतन्या प्रेम संगठन से डा. अंजलि सयाल, अखिल भारतीय इमाम संगठन के अध्यक्ष इमाम उमर अहमद इलियासी, फादर फ्रांसिस, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फ़ेडरेशन के महासचिव लामा लोब्ज़ंग, डा. मोहिन्दर सिंह, अमेरिका में सिख धर्म के दूर भाई सतपाल सिंह खालसा ने संबोधित किया। 

RW

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By Religion World October 30, 2017 3 min read
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