RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

शांतिकुंज में पितृ अमावस्या में हुए सामूहिक तर्पण संस्कार

शांतिकुंज में पितृ अमावस्या में हुए सामूहिक तर्पण संस्कार

शांतिकुंज में पितृ अमावस्या में हुए सामूहिक तर्पण संस्कार
Visual Archive

शांतिकुंज में पितृ अमावस्या में हुए सामूहिक तर्पण संस्कार

शांतिकुंज में पितृ अमावस्या में हुए सामूहिक तर्पण संस्कार

  • शहीदों व प्राकृतिक आपदा की मृत्मात्मों को भी दी सामूहिक श्रद्धांजलि, नौ पारियों में हुआ श्राद्ध संकार

हरिद्वार 8 अक्टूबर। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में पितृ अमावस्या को निःशुल्क सामूहिक तर्पण संस्कार सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से आये हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की याद करते हुए जलांजलि अर्पित की। पितृ अमावस्या के दौरान शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री शिवप्र्रसाद मिश्र के नेतृत्व में आचार्यों की टीम ने नौ पारियों में तर्पण संस्कार कराया। एक पारी में करीब तीन सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने श्राद्ध संस्कार में भागीदारी की।

इस अवसर पर श्री मिश्र ने कहा कि मृत्यु के बाद शरीर के साथ-साथ आत्मा समाप्त नहीं हो जाती। उसका अपना अस्तित्व बना रहता है। आत्मा अमर, अजर, सत्य और शाश्वत है। जिस प्रकार पुराने, जीर्ण वस्त्र त्याग करके मनुष्य नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा जीर्ण शरीर का त्याग करके नया शरीर धारण करती है। उन्होंने कहा कि जब जीवात्मा एक जन्म पूरा करके अपने दूसरे जीवन की ओर उन्मुख होती है, तब जीव की उस स्थिति को भी एक विशेष संस्कार के माध्यम से बाँधा जाता है, जिसे मरणोत्तर संस्कार या श्राद्ध कर्म कहा जाता है। यह संस्कार बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद जीवात्मा का और कोई संस्कार सम्पन्न नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पितृ पक्ष के प्रत्येक दिन महापुरुषों, संतों, शहीदों, प्राकृतिक आपदाओं में असमय काल कवलित हुई मृत्मात्मों की सद्गति के साथ-साथ कन्या भ्रुण हत्या में जो शिशु आत्माएँ दिवंगत होती हैं, उनके निमित्त विशेष वैदिक कर्मकाण्ड के साथ जलांजलि दी गयी। 

 

शांतिकुंज के संस्कार प्रकोष्ठ से मिली जानकारी के अनुसार पन्द्रह दिन चले श्राद्ध पक्ष में शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्त्ताओं के अलावा जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उप्र, मप्र, बिहार, राजस्थान, तेलगंाना, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडू, गुजरात सहित देशभर से आये हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की याद में एक-एक पौधा रोपने का संकल्प लिया। 

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World October 9, 2018 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

अमावस्या से उभरती रोशनी—पहले चंद्र दर्शन का रहस्य और शुभता

अमावस्या से उभरती रोशनी—पहले चंद्र दर्शन का रहस्य और शुभता हिंदू परंपराओं में चंद्रमा का विशेष स्थान है। चंद्रमा मन, भावनाओं, शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना…

Read now
Hinduism

Chandra Darshan: अमावस्या के बाद चंद्रमा का प्रथम दर्शन क्यों होता है शुभ?

Chandra Darshan: अमावस्या के बाद चंद्रमा का प्रथम दर्शन क्यों होता है शुभ? भारतीय संस्कृति में चंद्रमा का विशेष महत्व है। अमावस्या के अगले दिन जब पहली बार…

Read now
Hinduism

आषाढ़ अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?

आषाढ़ अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है? आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि हिन्दू धर्म में एक विशेष महत्व रखती है। यह दिन पितरों को…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *