रक्षाबंधन पर बन रहा है “महालक्ष्मी योग”

रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार 26 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार रक्षाबंधन पर महालक्ष्मी योग बन रहा है। दरअसल सावन पूर्णिमा (रक्षा बंधन) पर इस बार बेहद खास योग बन रहा है। आप अपने भाई के राशि चिन्ह के आधार पर राखी खरीद सकती हैं। राशि चिन्ह एक व्यक्ति के स्वभाव को दर्शाता है। इस बार रक्षाबंधन पर भ्रदा का साया न होने के कारण पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार 4 साल के बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।
भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा। सूर्योदय से पूर्व ही भद्रा समाप्त हो जाने से बहनें दिन भर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।
सूर्योदय व्यापिनी तिथि मानने के कारण रात में भी राखी बांधी जा सकेगी। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पंचांग के मुताबिक पूर्णिमा 25 अगस्त दोपहर 3:15 से 26 अगस्त को शाम 5:30 बजे तक रहेगी।
विशेष बात यह है कि इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र भी है। यह नक्षत्र दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। वहीं 26 अगस्त को पूर्णिमा शाम 5:30 बजे है। इससे रक्षाबंधन पूरे दिन मनाया जाएगा।
इस बार श्रावण पूर्णिमा पहले से मुक्त रहने के चलते रक्षाबंधन सौभाग्यशाली रहेगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त के लिए पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि रक्षाबंधन का एक आवश्यक नियम है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है। इस वर्ष एक अच्छी बात यह है कि भद्रा सूर्योदय के पूर्व ही समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार भाई बहन के इस पवित्र महापर्व को प्रेम और श्रद्धा पूर्वक मनाने से भाई का संबंध बना रहता है।
भद्रा का साया रक्षाबंधन के दिन पहले ही समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा रक्षाबंधन के दिन राजयोग भी बन रहा है। इसके अलावा धनिष्ठा नक्षत्र भी इसी दिन लग रहा है। पूर्णिमा में रक्षाबंधन ग्रहण से मुक्त रहेगा। इसके कारण बहनों के लिए यह पर्व बहुत सौभाग्यशाली रहेगा। राजयोग में राखी बांधने पर बहनों का सौभाग्य और सुख समृद्धि में वृद्धि होती है और भाइयों का भाग्य चमकता है।
राखी बांधने के लिए सुबह से शाम तक काफी समय मिलेगा। लेकिन इस बात का खास ख्याल रखना होगा जब राहु काल हो तब राखी ना बांधे। 26 अगस्त 2018 को शाम 4:30 से 6 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस बार रक्षा बंधन का मुहुर्त 26 अगस्त की सुबह 5 बजकर 59 मिनट से शाम 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इस हिसाब से बहनों को करीब साढ़े ग्यारह घंटे का समय राखी बांधने के लिए मिलेगा। इस दौरान कभी भी रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है।
भाई को पूर्वाभिमुख, पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। भाई के माथे पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधे।
रिवाजों के अनुसार बहनें भाई दूज की तरह इस दिन भी भाई की गोद में नारियल देती हैं। बहन भाई की आरती करती हैं और बुरी नजर उतारती हैं। आरती के समय बहन भाई की लबी उम्र की कामना करती है. साथ ही भाई भी बहन को उपहार देता है और एक दूसरे का मुंह मीठा करते हैं। यह त्योहार स्नेह के साथ मनाया जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि रक्षासूत्र का अर्थ होता है कि वह भाई को अला बला व बुरी नजर से बचाता है व सुरक्षा करता है।
सूर्योदय व्यापिनी तिथि मानने के कारण रात्रि में भी राखी बांधी जा सकेगी।
रक्षा बंधन पर पुराणों में देवताओं या ऋषियों द्वारा जिस रक्षासूत्र को बांधने की बात की गई हैं वह धागे की बजाय कोई मंत्र या गुप्त सूत्र भी हो सकता है। धागा केवल उसका प्रतीक है। इसका सबसे पहला उदाहरण राक्षसों से इन्द्रलोक को बचाने के लिए देव गुरू बृहस्पति ने इन्द्र देव की पत्नि को एक उपाय बताया था। इन्द्र देव की पत्नि ने देवासुर संग्राम में असुरों पर विजय पाने के लिए मंत्र सिद्ध करके श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षा सूत्र बांधा था, इसी सूत्र की शक्ति से देवराज युद्ध में विजयी हुए।
रक्षाबंधन पर इस मंत्र का उच्चारण करें..
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे, मा चल, मा चल।

- ज्योतिर्विद पण्डित दयानन्द शास्त्री
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