Rw Interview : जैन आचार्य चंदनाजी, आध्यात्मिक प्रमुख, वीरायतन
जैन धर्म अपने पांच मूल सिद्धांतों – अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य – से गतिमान है। जैन संत इन सिद्धांतों को व्यवहार में बदलकर समाज में एक अलग पहचान बनाते आए हैें। समय के साथ मानवसेवा की भावना ने संतों को प्रेरित किया और वे सामाजिक विकास के कार्यों में आगे आने लगे हैं। महिलाओं को समणी या साध्वी के तौर पर जैन धर्म में महत्व प्राप्त है। भगवान महावीर के समय से समणियों का एक खास मान रहा है। आज जैन धर्म में आचार्य चंदनाजी ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिससे सभी प्रेरित हैं।
जैन आचार्या आचार्य चंदना जी को लॉस एंजेलेस में आयोजित JAINA कन्वेंशन में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रिलिजन वर्ल्ड भी वहां मौजूद था। रिलिजन वर्ल्ड के फाउंडर भव्य श्रीवास्तव ने आचार्य चंदना जी से खास बात की, इस भेंटवार्ता के प्रमुख अंश..

रिलीजन वर्ल्ड – हमें वीरायतन के बाते में कुछ बताएं. वीरायतन वास्तव में है क्या?
आचार्य चंदनाजी – धर्म की जो परिभाषा है वो मरने के बाद स्वर्ग कैसे प्राप्त हो सकता है, मोक्ष कैसे प्राप्त हो सकता है, उसी की चर्चा ज्यादा होती है यहाँ। फिर आजकल आत्मा को खोजो उसकी बात होती है। वीरायतन एक तरह से जो अज्ञात है, जो दिखाई नहीं देते उनके पीछे जाने के स्थान पर सामने जो बच्चा भूखा है, एक के घर में थाली खाली है, हाथों में काम नहीं है, स्कूलों में बच्चों के लिए पढाई नहीं है, जो बीमार है उनके लिए दवा नहीं है, उन लोगों के जीवन के जो प्रश्न है, इस धरती के जो प्रश्न है जो हमें सामने नज़र आ रहे है जिसका समाधान अवश्यक है वीरायतन असल में उसी पर कार्य करता है।
“इस धरती के जो प्रश्न है जो हमें सामने नज़र आ रहे है जिसका समाधान अवश्यक है वीरायतन असल में उसी पर कार्य करता है”
रिलीजन वर्ल्ड – 49 साल पहले आपने वीरायतन संस्था की शुरुआत की थी, तब जो सोच थी वो आज कहाँ तक पहुंची है?
आचार्य चंदनाजी – मुझे ऐसा लगता है जो मैंने उस समय प्रारंभ किया था, निश्चित रूप से इन लोगों के लिए इसे स्वीकार करना मुश्किल था। जैसे-जैसे मैं करती गयी मेरा काम बढ़ता गया। लोगों का विश्वास बढ़ता गया, काम की गति बढती गयी और आज मुझे लगता है कि अब भी बहुत कुछ किया जाना चाहिए लेकिन फिर भी मैं संतुष्ट हूँ। अपने प्रयासों से मैं खुश हूँ. आज अगर 10000 बच्चे मेरे साथ पढ़ रहे हैं या लाखों लोगों को रोशनी प्राप्त हुयी है उन सबको देखती हूँ तो मुझे बहुत ख़ुशी होती है।
“आज अगर 10000 बच्चे मेरे साथ पढ़ रहे हैं या लाखों लोगों को रोशनी प्राप्त हुयी है उन सबको देखती हूँ तो मुझे बहुत ख़ुशी होती है”
रिलीजन वर्ल्ड – हमने देखा भारत और पूरी दुनिया में आपके कई सेंटर्स हैं, जहाँ पर वीरायतन का मुख्य काम चल रहा है। इन सेंटर्स पर क्या क्या होता है?
आचार्य चंदनाजी – सेंटर्स तो बहुत हैं, जिसमें शिक्षा, स्वस्थ्य सेवा, लोगों को रोज़गार, पुरस्कार दिए जाते हैं, लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जाती है, सबके लिए प्रार्थना, स्वाध्याय, अध्ययन यह सब होता है।

रिलीजन वर्ल्ड – यह विचार आपके मन में आया कहाँ से? आपके जीवन मों कोई टर्निंग पॉइंट था?
उत्तर – मुझे बचपन से ही इस काम से प्रेम था। मेरे परिवार में मेरी मां भी इसी विचारों की थी और मां के संस्कार ने मुझे इस दिशा में अधिक प्रेरित किया।
रिलीजन वर्ल्ड – हमने देखा है कि हमारे देश में बहुत सी महिलाएं काम कर रही हैं माता अमृतानंदमयी से लेकर और भी बहुत है… क्या महिला के तौर पर आपको किसी चुनौती का सामना भी करना पड़ा है?
आचार्य चंदनाजी – मुझे ऐसा लगा की आसान रहा मेरा रास्ता। महिला होने के तौर पर मैं जहाँ-जहाँ गयी वहां मातृशक्ति का जो सम्मान इस देश में उन्होंने मुझे अत्यधिक सहयोग किया है। मेरा रास्ता और आसान बना है। मैंने देखा उसी जगह पर जो कार्य पुरुषों ने किया वो सफल नहीं हो सके. लेकिन मैंने वहां पर सफल कार्य किया है।
रिलीजन वर्ल्ड – समय के साथ हम देख रहे हैं सभी धर्मों में सोशल डेवलपमेंट, सोशल इनिशिएटिव्स पर बड़ा जोर है। आपको क्या लगता है यह कितना सही है, कितना बैलेंस है?
आचार्य चंदनाजी – मैं उन विषय में ज्यादा विचार ही नहीं करती, लोग क्या सोचते हैं, क्या करते हैं। मुझे लगता हैं मैं अपने काम में ही व्यस्त हूँ और खुश हूँ।
रिलीजन वर्ल्ड – यह प्रेरणा कहाँ से मिलती है आपको खुद को मोटिवेट रखने की?
आचार्य चंदनाजी – यह सहज है, यह मेरा नेचर है। मुझे इसके लिए कभी कोशिश नहीं करनी पड़ती। मैं 83 साल की हूं। बचपन से लेकर अब तक मैंने कभी किसी पर हाथ लगाया हो, या गुस्सा किया हो ऐसा मुझे याद नहीं हैं। मैं जैसी तब थी, वैसी ही अब हूं।
रिलीजन वर्ल्ड – कई बार लोग धर्म को नेगेटिव ताकत की तरह देखने लगे हैं ऐसे में आपको क्या महसूस होता है?
आचार्य चंदनाजी – मुझे तो ऐसा लगता है कि उस परमात्मा की शक्ति, उसका प्रेम और और उसका आशीर्वाद, उसकी शक्ति के कारण मुझे कभी कोई नकारात्मक भाव नहीं घेरते, न ही मुझे किसी बात की चिंता है और न ही कभी किसी ने मुझे डराया है।

रिलीजन वर्ल्ड – आज JAINA (जैना) ने आपको आपके काम को लेकर सम्मानित किया, वीरायतन को सम्मानित किया तो आपको कैसा लग रहा है?
आचार्य चंदनाजी – मेरे कार्य को सराहा गया, उसे सम्मान दिया गया इस बात की बेहद ख़ुशी है.
रिलीजन वर्ल्ड – इंटरफेथ को लेकर पूरे देश में आजकल बड़ा माहौल है…इससे समाधान होता दिखता है ?
आचार्य चंदनाजी – अगर किसी धार्मिक दृष्टि से सद्भावना का रास्ता बनता है और संघर्ष कम होता हो तो बहुत अच्छी बात है।
रिलीजन वर्ल्ड – समाज को बदलने में धर्म पॉजिटिव रोल प्ले करता है?
आचार्य चंदनाजी – मुझे ऐसा लगता है कि राष्ट्र के नव धार्मिक गुरुओं ने जितने प्रश्न इस समाज में पैदा किये हैं ऐसा किसी और ने नहीं किया।
रिलीजन वर्ल्ड – आजकल धर्मिक संस्थाएं जैसे अक्षय पात्रा, सरकार की मदद करके लोगों तक खाना पहुंचा रही है…धार्मिक संस्थाओं का रोल बढ़ रहा है…कैसे देखती हैं इसे ?
आचार्य चंदनाजी – जो भी ऐसा कार्य करते हैं, वो बहुत अच्छा करते हैं लेकिन मैं ऐसा ज़रूर सोचती हूँ कि जो भी काम किया जाए वो पूरी शिद्दत और क्वालिटी के साथ किया जाए। मतलब जो खाना हम खाते हैं वही खाना उन्हें दें, जैसा बिस्तर हम इस्तेमाल करते हैं वैसा ही उन्हें भी करने को दें। जो दवा हम इस्तेमाल करते हैं उनका इलाज भी उन्ही दवाओं से हो।
रिलीजन वर्ल्ड – ऐसा आंकड़ा है कि कितने जीवन को आपने टच (सेवा) किया है ?
आचार्य चंदनाजी – मैं कम से कम डेढ़-दो लाख लोगों के संपर्क में आई हूँ और शिक्षा की दृष्टि से हजारों बच्चों से मैं जुडी हुयी हूँ।
रिलीजन वर्ल्ड – एक चीज़ समझना चाहूँगा की यूएन से लेकर बहुत सारी संस्थाएं, बहुत सारे धर्मगुरु, बहुत सारे सोशल एक्टिविस्ट समाज को सही दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं , लेकिन बदलाव बहुत कम दिख रहे हैं ?
आचार्य चंदनाजी – समस्याएं भी बहुत ज्यादा हैं। यदि एक जाति, एक राष्ट्र, और एक धर्म पूरी दुनिया में हो जाये तो दुनिया के कई अनावश्यक प्रश्न दूर होंगे। शस्त्रों के निर्माण में हम अपनी जितनी ताकत लगा रहे हैं उसके स्थान पर प्रेम के शास्त्र को बड़ा करके उसका उपयोग हम करें तो दुनिया की 80 फ़ीसदी समस्याएं स्वतः ही सुलझ जाएँगी।
रिलीजन वर्ल्ड – पिछले कई सालों से हम Universal Consciosness की बात सुनता आया हूँ. यह कितना संभव है?
आचार्य चंदनाजी – सभी लोग चाहें तो यह हो सकता है, पर थोड़े लोगों से यह संभव नहीं है। देखिये चर्चाएं तो हो रही हैं लेख छपते हैं, मीडिया में बातें होती हैं लेकिन जब तक फील्ड में एक्टिव होकर कार्य नहीं करेंगे तब तक कैसा होगा।
रिलीजन वर्ल्ड – अगले 50-100 सालों के लिए वीरायतन का विज़न क्या है?
आचार्य चंदनाजी – शिक्षा के माध्यम से, संस्कार के माध्यम से लोगों के हाथ में स्किल डेवलपमेंट देकर उन्हें स्वाबलंबी बनाने की दृष्टि से, ज़रूरतमंद लोगों के स्वास्थ्य के लिए काम करके निरंतर कार्य करने की अपेक्षा है।
रिलीजन वर्ल्ड – हमारी एक संस्था है रिलिजन वर्ल्ड नाम की, जो रिलिजन और सोशल डेवलपमेंट पर कार्य करती है। हमारी वेबसाइट 100 से अधिक देशों में पढ़ी जाती है। हमारे पाठकों के लिए कोई सन्देश?
आचार्य चंदनाजी – जितने भी लोग हैं बस एक बात सोचें की हम किसी की स्पर्धा में नहीं है, किसी से संघर्ष नहीं है। हम भी अपना एक छोटा सा योगदान उस मानवजाति के कल्याण के लिए समर्पित कर दें, इस दृष्टिकोण से हम बहुत कुछ कार्य कर सकते हैं। अगर रिलिजन वर्ल्ड के लोग इस दृष्टिकोण से कार्य करते रहेंगे तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।
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