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ऋषि पंचमी 2025 कब है? व्रत कथा और पूजा का महत्व जानें

ऋषि पंचमी 2025 कब है? व्रत कथा और पूजा का महत्व जानें

ऋषि पंचमी 2025 कब है? व्रत कथा और पूजा का महत्व जानें
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ऋषि पंचमी 2025 कब है? व्रत कथा और पूजा का महत्व जानें

ऋषि पंचमी 2025 कब है? व्रत कथा और पूजा का महत्व जानें

भारतीय सनातन संस्कृति में ऋषि पंचमी का विशेष महत्व है। यह व्रत हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन सप्तऋषियों—कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, वशिष्ठ, जमदग्नि और गौतम—को समर्पित है। इन महान ऋषियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का यह अवसर माना जाता है।

धार्मिक महत्व
ऋषि पंचमी को विशेष रूप से स्त्रियों के लिए महत्वपूर्ण व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से पिछले जन्मों और वर्तमान जीवन के पाप नष्ट होते हैं। ऋषियों ने मानव समाज को वेद, शास्त्र और जीवन जीने की दिशा प्रदान की है, इसलिए इस दिन उनके प्रति आभार व्यक्त करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

पूजन विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद सप्तऋषियों की मूर्तियों या चित्रों की स्थापना कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पूजा में हल्दी, चावल, पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। महिलाएँ इस दिन उपवास रखती हैं और कथा श्रवण करती हैं। व्रत के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना भी अत्यंत शुभ माना गया है।

व्रत कथा
प्रचलित कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण परिवार में पुत्री अपने मासिक धर्म के दिनों में अशुद्धता का पालन किए बिना कार्य करती रही। इससे वह पाप की भागी बनी। मृत्यु के बाद वह कन्या अन्य लोकों में कष्ट भोगने लगी। अंततः एक महात्मा के मार्गदर्शन से अगले जन्म में उसने ऋषि पंचमी का व्रत किया और पापमुक्त हुई। इसीलिए कहा गया है कि इस व्रत का पालन पापों के नाश का उपाय है।

तालिका

श्रेणी विवरण
तिथि 28 अगस्त 2025 (गुरुवार)
पंचमी तिथि 27 अगस्त 3:44 PM – 28 अगस्त 5:56 PM
मुहूर्त सुबह 11:05 AM – 1:39 PM
उद्देश्य ऋषियों की पूजा, पाप हरण, शुद्धि
पूजा विधि स्नान, सप्तऋषियों की स्थापना, दान, व्रत भोजन
कथा पापों से मुक्ति

लाभ और फल
ऋषि पंचमी व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप मिटते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। विशेषकर महिलाएँ इस व्रत से शुद्धता प्राप्त करती हैं और पारिवारिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन ऋषियों की कृपा पाने और आध्यात्मिक उन्नति का साधन माना जाता है।

ऋषि पंचमी केवल एक व्रत ही नहीं, बल्कि यह ऋषियों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और जीवन की दिशा दी, उन्हें स्मरण कर हम अपने जीवन को और अधिक पवित्र और सार्थक बना सकते हैं।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

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By Religion World August 22, 2025 3 min read
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