RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

रक्षाबंधन पर प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का संकल्प

रक्षाबंधन पर प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का संकल्प

रक्षाबंधन पर प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का संकल्प
Visual Archive

रक्षाबंधन पर प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का संकल्प

रक्षाबंधन पर प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का संकल्प

 

  • प्रकृति और संस्कृति की रक्षा सर्वोपरि – योगभूषण महाराज

राजधानी दिल्ली के मुगलकालीन प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर, पटपड़गंज में वर्षाकालीन चातुर्मासिक धर्मयोग प्रवास कर रहे परम श्रद्धेय धर्मयोगी श्री योगभूषण जी महाराज ने वात्सल्य महापर्व (रक्षाबंधन) के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज रक्षाबंधन के दिन हम सभी को प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लेना चाहिये । जो प्रकृति हमारे जीवन की दिनरात रक्षा करती है आज उसी का नाश किया जा रहा है ; जिस भारतीय संस्कृति में हमारा जन्म हुआ है हम उसी संस्कृति को गलत बताकर पश्चिमी सभ्यता को अपनाने लगे हैं और ये दोनों ही कामों की वजह से हमारा जीवन संकट में है ।

आज अगर सही तरीके से रक्षाबंधन बनाना है तो बहिन की रक्षा के संकल्प के साथ-साथ प्रकृति और संस्कृति की रक्षा का भी संकल्प करना चाहिये।

वात्सल्य महापर्व का धार्मिक महत्व बताते हुये उन्होंने कहा कि आज का यह दिन नैमित्तिक पर्व के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि आज के दिन ही हस्तिनापुर में श्री अंकपनाचार्य आदि 700 मुनियों के ऊपर चलरहे घोर उपसर्ग से विक्रिया ऋद्धिधारी महामुनि श्री विष्णुकुमार जी ने रक्षा कर वात्सल्य धर्म का परिचय दिया था ! श्रमण संस्कृति की रक्षा हुई तब से यह पर्व वात्सल्य महापर्व के रूप में उद्घोषित हुआ ।
हमारी संस्कृति हमें सभी जीवों के प्रति मैत्री के भाव के साथ निस्वार्थ प्रेम करना सिखाती है । वर्तमान में हमारी दूषित मानसिक विकृति के कारण हमारा वात्सल्य और निस्वार्थ प्रेम समाप्ति के कगार पर है , आज प्रेम के मायने बदल गये हैं , आज रिश्ते सिर्फ नाम भर के रह गये हैं ! हृदय की विशालता अब सिकुडती जा रही है ! जिसका परिणाम आज संपूर्ण विश्व में अशांति , बैर , विद्वेष, कलह बढते जा रहे है !
हमारे जीवन पर भी प्रकृति और संस्कृति की विकृति का असर पड रहा है ; दिन पर दिन बीमारियां बढती जा रही हैं तनाव , चिंता ने जीवन को दूभर कर दिया है ।

तब आज पुनः हमें पिछले दौर की तरफ लौटना आवश्यक प्रतीत होता नजर आ रहा है।  जब-जब प्रकृति में विकृति आती है तब-तब देश में भूकंप, बाढ और तूफान जैसे हालात पैदा हो जाते हैं और जब-जब संस्कृति में विकृति आती है तब-तब मानवता, इंसानियत और धार्मिक सद्भावना समाप्त होती नजर आती है ।

श्री योगभूषण महाराज ने सभा में उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुये कहा कि आज का रक्षाबंधन यदि सार्थक रूप से मनाना है तो किसी पेड, पौधों के वृक्षाबंधन कर प्रकृति की रक्षा का संकल्प करना और हमारी श्रमण संस्कृति की रक्षा के लिये तन-मन-जीवन अपरित करने के लिये हमेशा तैयार रहना।

उन्होनें राष्ट्र की रक्षा में समर्पित थलसेना , जल सेना , वायु सेना के जवानों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करवाया । प्रकृति, संस्कृति, समाज और परिवार के प्रति भी रक्षा हेतु धन्यवाद ज्ञापित करवाया। सभा में मयूर विहार, पांडव नगर , राधेपुरी , पटपडगंज आदि शैली के श्रद्धालुजन मौजूद थे ।

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World August 27, 2018 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Jainism

Mahavir Jayanti 2026: Significance, Celebrations and Life of Mahavira

Mahavir Jayanti 2026 will be celebrated on March 31, 2026, as Jains in India and around the world mark the birth anniversary of Lord Mahavira, the 24th and…

Read now
Hinduism

प्रेमानंद जी महाराज और जैन आचार्य लोकेश की वृंदावन में भेंट, विश्व शांति पर चर्चा

प्रेमानंद जी महाराज और जैन आचार्य लोकेश की वृंदावन में हुई मुलाकात में विश्व शांति, अहिंसा, शांति शिक्षा और युवा पीढ़ी के आध्यात्मिक विकास पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

Read now
Hinduism

विश्व शांति केंद्र मिशन हेतु मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, दिल्ली (17–25 जनवरी 2026)

भूमिका भारतीय संस्कृति में रामकथा केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और मानवता का संदेश है। जब-जब समाज में अशांति, तनाव और वैचारिक भ्रम…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *