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जानिये क्या है प्रधानमंत्री मोदी की अपील 9 बजे, 9 मिनट के पीछे का विज्ञान

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जानिये क्या है प्रधानमंत्री मोदी की अपील 9 बजे, 9 मिनट के पीछे का विज्ञान
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जानिये क्या है प्रधानमंत्री मोदी की अपील 9 बजे, 9 मिनट के पीछे का विज्ञान

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने रविवार 5 अप्रैल के लिए देशवासियों से एक खास अपील की है । रात 9 बजे 9 मिनट तक प्रकाश करने का आह्वाहन किया है ।



दिया, मोमबत्ती, मोबाइल की फ्लैश लाइट, टॉर्च या किसी भी प्रकार से आप अपने दरवाजे या बालकनी या छत से खड़े होकर ये रौशनी कर सकते हैं । आइये जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीया-मोमबत्ती अपील के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस अपील का सीधा संबंध योग वशिष्ठ के छठे अध्याय से संबंधित है। पद्मश्री अवार्डी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि इस पुस्तक का छठा अध्याय सामूहिक चेतना के सिद्धांत के बारे में बताता है।

प्रधानमंत्री मोदी की अपील 9 बजे, 9 मिनट के पीछे का विज्ञान

यह भी पढ़ें-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की रविवार को रात 9 बजे 9 मिनट के लिए की ये अपील

क्या है एसीई-2 रिसेप्टर्स 

हमारे शरीर और सामूहिक चेतना के सिद्धांत के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं कि जिस सिद्धांत को पुस्तक में रेखांकित किया गया है, उसमें शरीर के एसीई-2 रिसेप्टर्स को दुरुस्त करने की शक्ति है।अब सवाल है कि यह एसीई-2 रिसेप्टर क्या है!

एसीई-2 रिसेप्टर्स एक तरह का एंजाइम है, जो मानव शरीर के हृदय, फेफड़े, धमनियों, गुर्दे और आंत में कोशिका की सतह से जुड़ा होता है। यह रिसेप्टर गंभीर सांस संबंधी सिंड्रोम का कारण बनने वाले कोरोना वायरस के लिए कार्यात्मक और प्रभावी होता है।

एसीई-2 रिसेप्टर्स को निंयत्रित और दुरुस्त करने वाला हमारी सामूहिक चेतना का विज्ञान क्वांटम फिजिक्स की अवधारणाओं पर आधारित है। अगर हम सभी सामूहिक रूप से शरीर में कोरोना वायरस को नहीं रहने देने का निर्णय लेते हैं तो हमारी सामूहिक चेतना ऐसा सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

कनाडा स्थित ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक कोशिका की झिल्ली पर मौजूद प्रोटीन एसीई-2 इस महामारी के केंद्र में है, क्योंकि यह कोरोना वायरस (सार्स-कोव-2) के ग्लाइकोप्रोटीन बढ़ाने के लिए प्रमुख रिसेप्टर यानी अभिग्राहक है।

इससे पहले भी टोरंटो विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रिया स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मॉल्युकूलर बायोलॉजी के शोधार्थियों ने भी यह पाया था कि मानव शरीर में एसीई-2 सार्स संक्रमण के मुख्य अभिग्राहक है।



मालूम हो कि सार्स वायरस, सांस की बीमारी का कारण होता है और साल 2003 में इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। वैज्ञानिक अपने शोध में एसीई-2 रिसेप्टर को लक्षित कर कोरोना का इलाज ढूंढने के लिए रिसर्च कर रहे हैं।

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By Shweta April 5, 2020 2 min read
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