RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

रुद्राक्ष के रहस्य : शिवपुराण के अनुसार

रुद्राक्ष के रहस्य : शिवपुराण के अनुसार

रुद्राक्ष के रहस्य : शिवपुराण के अनुसार
Visual Archive

रुद्राक्ष के रहस्य : शिवपुराण के अनुसार

शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं। शिवपुराण के अनुसार रुद्राक्ष को आकार के हिसाब से तीन भागों में बांटा गया है….

1- उत्तम श्रेणी– जो रुद्राक्ष आकार में आंवले के फल के बराबर हो वह सबसे उत्तम माना गया है।
2- मध्यम श्रेणी– जिस रुद्राक्ष का आकार बेर के फल के समान हो वह मध्यम श्रेणी में आता है।
3- निम्न श्रेणी – चने के बराबर आकार वाले रुद्राक्ष को निम्न श्रेणी में गिना जाता है।

जिस रुद्राक्ष को कीड़ों ने खराब कर दिया हो या टूटा-फूटा हो, या पूरा गोल न हो। जिसमें उभरे हुए दाने न हों। ऐसा रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए।
वहीं जिस रुद्राक्ष में अपने आप डोरा पिरोने के लिए छेद हो गया हो, वह उत्तम होता है।एकमुखी रुद्राक्ष पहनने वाला नहीं होता गरीब, शिवपुराण में लिखी है ये बातें…..भगवान शिव भस्म रमाते हैं और नाग उनका आभूषण है। शिव के तीन नेत्र हैं और वे चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण करते हैं। ऐसी अनेक बातें हैं जो भगवान शिव के स्वरूप से जुड़ी हैं। इसी प्रकार रुद्राक्ष भी भगवान शिव के स्वरूप से जुड़ा है। शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं। एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला कभी गरीब नहीं होता, ऐसा शिवपुराण में लिखा है।

जानिए कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति

रुद्राक्ष का अर्थ है रुद्र अर्थात शिव की आंख से निकला अक्ष यानी आंसू। रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से मानी जाती है। इस बारे में पुराण में एक कथा प्रचलित है। उसके अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर संसार के कल्याण के लिए सैकड़ों सालों तक तप किया। एक दिन अचानक ही उनका मन दु:खी हो गया। जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो उनमें से कुछ आंसू की बूंदें गिर गई। इन्हीं आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ।

शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं। सभी का महत्व व धारण करने का मंत्र अलग-अलग है। इन्हें माला के रूप में पहनने से मिलने वाले फल भी भिन्न ही हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार इन रुद्राक्षों को विधि-विधान से धारण करने से विशेष लाभ मिलता है। सावन के पवित्र महीने में हम आज आपको बता रहे हैं रुद्राक्ष के प्रकार, उन्हें धारण करने के मंत्र तथा होने वाले लाभ के बारे में

1- एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप है। यह भोग और मोक्ष प्रदान करता है। जहां इस रूद्राक्ष की पूजा होती है, वहां से लक्ष्मी दूर नहीं जाती अर्थात जो भी इसे धारण करता है वह कभी गरीब नहीं होता।

धारण करने का मंत्र – ऊं ह्रीं नम:

2- दो मुख वाला रुद्राक्ष देव देवेश्वर कहा गया है। यह संपूर्ण कामनाओं और मनोवांछित फल देने वाला है। जो भी व्यक्ति इस रुद्राक्ष को धारण करता है उसकी हर मुराद पूरी होती है।

धारण करने का मंत्र- ऊं नम:

3- तीन मुख वाला रुद्राक्ष सफलता दिलाने वाला होता है। इसके प्रभाव से जीवन में हर कार्य में सफलता मिलती है तथा विद्या प्राप्ति के लिए भी यह रुद्राक्ष बहुत चमत्कारी माना गया है।

धारण करने का मंत्र- ऊं क्लीं नम:

4- चार मुख वाला रुद्राक्ष ब्रह्मा का स्वरूप है। उसके दर्शन तथा स्पर्श से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

5 – पांच मुख वाला रुद्राक्ष कालाग्नि रुद्र स्वरूप है। वह सब कुछ करने में समर्थ है। सबको मुक्ति देने वाला तथा संपूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। इसको पहनने से अद्भुत मानसिक शक्ति का विकास होता है।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

6 – छ: मुख वाला रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का स्वरूप है। इसे धारण करने वाला ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है। यानी जो भी इस रुद्राक्ष को पहनता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं हुं नम:

7- सात मुख वाला रुद्राक्ष अनंग स्वरूप और अनंग नाम से प्रसिद्ध है। इसे धारण करने वाला दरिद्र भी राजा बन जाता है। यानी अगर गरीब भी इस रुद्राक्ष विधिपूर्वक पहने तो वह भी धनवान बन सकता है।

धारण करने का मंत्र- ऊं हुं नम:

8 – आठ मुख वाला रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरवस्वरूप है। इसे धारण करने वाला मनुष्य पूर्णायु होता है। यानी जो भी अष्टमुखी रुद्राक्ष पहनता है उसकी आयु बढ़ जाती है और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

धारण करने का मंत्र- ऊं हुं नम:

9 – नौ मुख वाले रुद्राक्ष को भैरव तथा कपिलमुनि का प्रतीक माना गया है। भैरव क्रोध के प्रतीक हैं और कपिल मुनि ज्ञान के। यानी नौ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से क्रोध पर नियंत्रण रखा जा सकता है। साथ ही, ज्ञान की प्राप्ति भी हो सकती है।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं हुं नम।

10 – दस मुख वाला रुद्राक्ष भगवान विष्णु का रूप है। इसे धारण करने वाले मनुष्य की संपूर्ण कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम

11 – ग्यारह मुखवाला रुद्राक्ष रुद्ररूप है। इसे धारण करने वाला सर्वत्र विजयी होता है। यानी जो इस रुद्राक्ष को पहनता है, किसी भी क्षेत्र में उसकी कभी हार नहीं होती।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं हुं नम:

12- बारह मुख वाले रुद्राक्ष को धारण करने पर मानो मस्तक पर बारहों आदित्य विराजमान हो जाते हैं। यानी उसके जीवन में कभी इज्जत, शोहरत, पैसा या अन्य किसी वस्तु की कोई कमी नहीं होती।

धारण करने का मंत्र- ऊं क्रौं क्षौं रौं नम:

13 – तेरह मुख वाला रुद्राक्ष विश्वदेवों का रूप है। इसे धारण कर मनुष्य सौभाग्य और मंगल लाभ प्राप्त करता है।

धारण करने का मंत्र- ऊं ह्रीं नम:

14 – चौदह मुख वाला रुद्राक्ष परम शिवरूप है। इसे धारण करने पर समस्त पापों का नाश हो जाता है।

धारण करने का मंत्र- ऊं नम

===========

पं. विशाल दयानंद शास्री, ज्योतिषविद् 

परामर्श सेवाएं उपलब्ध हैं।

संपर्क करें – 09039390067

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World September 24, 2017 5 min read
Share:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *