कई वर्षों के बाद ऐसा योग बन रहा है, जिसके कारण एक माह के अन्दर तीन ग्रहण लग रहे हैं। इसमें दो चन्द्रग्रहण और एक सूर्यग्रहण शामिल है।
आज 5 जून दिन शुक्रवार को चंद्रग्रहण लगने वाला है, इसके बाद फिर 5 जुलाई को भी चंद्रग्रहण लगेगा। इन दोनों चंद्रग्रहण की विशेष बात यह है कि ये दोनों ही छाया चंद्रग्रहण होंगे। आइये जानते हैं छाया चंद्रग्रहण और उसके पड़ने वाले प्रभावों के बारे में।
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छाया चंद्रग्रहण का प्रभाव
छाया चंद्रग्रहण किसी भी विशेष राशि के गर्भस्थ नहीं होने के कारण लोक मान्य नहीं है। यह बात अवश्य है कि इन दोनों छाया चंद्रग्रहण का दुष्प्रभाव शासक एवं शासन की व्यवस्थाओं पर अवश्य ही पड़ेगा।
आपको बता दें कि इस छाया ग्रहण में चन्द्रमा का कोई भी पक्ष पृथ्वी की छाया से ग्रस्त नहीं होगा, किन्तु चन्द्रमा की कान्ति कुछ धीमी अवश्य दिखाई देगी।
यही कारण है कि इसका धर्मशास्त्रीय प्रभाव एवं प्रतिबन्ध नहीं होता है। छाया ग्रहण की विस्तृत व्याख्या शास्त्र में नहीं के बराबर है। मुख्य रूप से रविवार, 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण ही ज़्यादा प्रभावशाली होगा। चूँकि पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर नहीं पड़ेगी, इसलिए पृथ्वी-लोक पर इसका प्रभाव मान्य नहीं है।
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