RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप
Visual Archive

श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

श्रावण के इस पावन महीने  में हम आज आपको भगवान शंकर  से जुड़े वो रहस्य  बताएँगे जिनके बारे में शायद आप न जानते हो। आइए जानते हैं भगवान शिव से जुड़े रहस्य-



भगवान भोलेनाथ का विवाह राजा दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। परंतु उनके पिता के द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उन्होंने यज्ञकुंड में अपनी आहुति दे दी थी। उसके बाद उन्होंने पार्वती जी के रुप में राजा हिमालय के यहां जन्म लिया और माता पार्वती के साथ शिव जी का विवाह हुआ। कहा जाता है कि गंगा, काली और उमा भी भगवान शिव की ही पत्नियां थी।

भगवान शिव से विवाह के बाद दोनों की शक्ति से कार्तिकेय का जन्म हुआ था। गणेश जी माता पार्वती के पुत्र थे। वे माता के उबटन से जन्में थे।

भगवान शिव के तेज से जलंधर उत्पत्ति हुई थी। तो वहीं भूमा ने शिव जी के ललाट की पसीने की बूंद से जन्म लिया था। भगवान भोलेनाथ और मोहिनी के संयोग अय्यप्पा का जन्म हुआ था। भगवान भोलेनाथ के दो और पुत्र थे जिनका नाम अंधक और खुजा था। इन दोनों के बारे में कहीं पर ज्यादा उल्लेख नहीं किया गया है।

सप्तऋषियों को शिव का प्रारंभिक शिष्य कहा गया है। इन ऋषियों के द्वारा ही शिव के ज्ञान का प्रचार पूरे पृथ्वी लोक पर हुआ। कहा जाता है सर्वप्रथम शिव जी से ही गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्तें की शुरुआत हुई थी। वशिष्ठ और अगस्त्य मुनि का नाम भी शिव के शिष्यों में लिया जाता है। सप्तऋषियों के अलावा गौरशिरस मुनि भी शिव के शिष्य थे।

भगवान शिव ने हर युग में भक्तों के दर्शन दिए हैं। सतयुग में समुद्र मंथन के समय भी शिव थे और उन्होंने समस्त सृष्टी के कल्याण के लिए विषपान किया था। त्रेता युग में भी राम के समय शिव थे। भगवान शिव द्वापर युग में महाभारत काल में भी थे। भविष्य पुराण में कहा गया है कि मरुभूमि पर राजा हर्षवर्धन को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। कलिकाल में विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का जिक्र मिलता है।

भगवान शिव असुर, दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, आदिवासी और सभी वनवासियों के आराध्य देव हैं। इसलिए शिव को पशुपति नाथ भी कहा जाता है। चंद्रवंश की शुरुआत भगवान शिव को कारण ही हुई थी तो वहीं सूर्यवंशी, खुद मनु थे। इसलिए चंद्रवंशी, सूर्यवंशी अग्निवंशी और नागवंशी आदि सभी को भी शिव की ही परंपरा का ही माना जाता है।

शैव धर्म शिव से संबंधित भारत के आदिवासियों का धर्म है। सभी दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव धर्म के ही संप्रदाय हैं इसलिए इन सभी के देवता भगवान शिव हैं।



ऐसा माना जाता है कि भगवान बुद्ध शिव जी ही का अवतार थे। पालि ग्रंथों में 27 बुद्धों का उल्लेख किया गया है। जिसमें बुद्ध के तीन  अतिप्राचीन नाम बताए गए हैं- बुद्ध के तीन नाम तणंकर, शणंकर और मेघंकर भी थे।

[video_ads]
[video_ads2]

You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta July 9, 2020 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

लिंगायत कौन हैं? क्या ये हिंदू धर्म से अलग एक पंथ हैं?

लिंगायत कौन हैं? क्या ये हिंदू धर्म से अलग एक पंथ हैं? लिंगायत (Lingayat) दक्षिण भारत का एक प्रमुख धार्मिक समुदाय है, जो मुख्यतः कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश…

Read now
Hinduism

नागों की उत्पत्ति: नाग वंश की शुरुआत कैसे हुई ?

नागों की उत्पत्ति: नाग वंश की शुरुआत कैसे हुई ? भारतीय संस्कृति में नाग केवल सर्प नहीं हैं – वे शक्ति, रहस्य और आस्था का प्रतीक हैं। नागों…

Read now
Hinduism

शैव संप्रदाय क्या है, इसका इतिहास क्या है

शैव संप्रदाय क्या है, इसका इतिहास क्या है शैव संप्रदाय हिंदू धर्म की एक प्रमुख शाखा है, जिसमें भगवान शिव को सर्वोच्च ईश्वर माना जाता है। इस संप्रदाय…

Read now