बरनावा गांव में आबादी के बीच स्थित सैकड़ों वर्ष पुराना भव्य श्रीचंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र मंदिर है। अपनी विशेषताओं के कारण यह दिगंबर जैन मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।
श्रीचंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र मंदिर का इतिहास
जैन पुराण साहित्य में बरनावा का उल्लेख मिलता है। हरिवंश पुराण , पांडव पुराण में इसका वर्णावत नाम से उल्लेख है। यहां लाक्षागृह से प्राप्त पुरा अवशेष और दिगंबर जैन मंदिर की अति प्राचीन भगवान चंद्रप्रभु की चतुर्थ कालीन भव्य मूर्ति इस क्षेत्र की ऐतिहासिकता वह प्राचीनता के सशक्त हस्ताक्षर हैं।
दीर्घकाल की चक्रगति के बीच न जाने कितनी बार जीर्णता व विनाशता को चुनौती देते हुए आज भी यह पावन क्षेत्र अपने काल की कलाकारी की महानता का परिचय दे रहा है।
लोग बताते हैं कि प्राचीन काल में यहां जैन समुदाय के चार सौ परिवार रहा करते थे। श्रीचंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र मंदिर के चारों ओर ऊंचे-ऊंचे भवनों पर धर्म ध्वजा लहराती थी। कलिकाल के प्रभाव से भले ही जैन परिवारों को पलायन करना पड़ा हो, लेकिन मंदिर का अतिशय ज्यों का त्यों बना रहा।
जब मुगलकाल प्रारंभ हुआ तो यहां मु़गल शासकों ने हिदू मंदिरों में तोड़फोड़ की। इन्होंने श्रीचंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र मंदिर पर भी हमला बोला। जब जैन मंदिर तोड़ने लगे तो भगवान श्रीचंद्रप्रभु के अतिशय क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सके। तभी यह क्षेत्र अतिशय क्षेत्र कहलाने लगा।
जन श्रुतियों के आधार पर बताया जाता है कि बरनावा में भगवान पार्श्वनाथ की भव्य मूर्ति एवं बहुमूल्य संपदा अभी भी लुप्त है।
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
मंदिर में हजारों वर्ष पुरानी भगवान श्रीचंद्रप्रभु की अतिशयकारी प्रतिमा विद्यमान है। इसको लेकर मान्यता है कि यह इस क्षेत्र पर खुदाई के दौरान निकली थी। मंदिर में आकर जो भी श्रद्धालु इस प्रतिमा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करता हैं उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
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देशभर से आते हैं श्रद्धालु
यहां रोज मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, आंध्रप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आकर भगवान के दर्शन करते हैं। रविवार में तो यहां भारी भीड़ रहती है।
श्रीचंद्रप्रभु अतिशय क्षेत्र मंदिर का शिखर 131 फुट ऊंचा
इस समय मंदिर में 131 फुट ऊंचे शिखर का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण पूरा होने पर मंदिर की भव्यता दूर से ही दिखेगी। इसके अलावा परिसर में भव्य कमल मंदिर भी है। भव्यता के चलते पर्यटकों के लिए भी यह मंदिर आकर्षण का केंद्र है।
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