वृंदावन की श्रीपाद गोशाला में रह रहीं गायों की संख्या अब बढ़ती जा रही है। वर्ष 1987 में यहां मात्र 80 गाय हुआ करती थीं, लेकिन आज इस गोशाला में गायों की संख्या छह हजार से अधिक है। यही कारण है कि प्रतिदिन इन गायों के चारे-पानी का खर्चा दो लाख रुपये तक हो जाता है।
मथुरा-वृंदावन रोड स्थित श्रीपाद गोशाला के संचालक बाबा दामोदर दास पिछले 20 वर्षों से यहां सेवा में लगे हैं। यहां की सभी गाय बाबा के इशारों पर चलती हैं। चारा मिलाने के लिए यहां अलग मशीन है तो बीमार गायों के इलाज के लिए अलग से मेडिकल स्टोर।
गौशाला की खासियत
इस गोशाला की खासियत यह है कि गायों से सिर्फ उतना ही दूध दुहा जाता है जितना की गोशाला को जरूरत हो। चारा डालने के लिए यहां जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद ली जाती है, जिसके संचालन के लिए 30 लोगों की लेबर कार्यरत है। बाबा दामोदर दास कहते हैं कि उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। समय-समय पर सेवाभावी लोग गायों की सेवा करने आगे आ जाते हैं। गोशाला में कुछ सांड़ भी हैं।
प्रतिदिन इतना होता है खर्च
50 क्विंटल गन्ने की खोई (300 रुपये प्रति क्विंटल)- 15 हजार रुपये
275 क्विंटल मटर का छिलका (125 रुपये प्रति क्विंटल) – करीब 35 हजार रुपये
22 क्विंटल सोयाबीन का छिलका (1500 रुपये प्रति क्विंटल) -33 हजार रुपये
40 कट्टे कैटल फीड (800 रुपये प्रति कट्टा) -32 हजार रुपये
70 क्विंटल भूसा (850 रुपये प्रति क्विंटल) -करीब 60 हजार रुपये
अन्य खर्चे-15 से 20 हजार रुपये प्रतिदिन
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कारखानों से होती है अधिकांश सप्लाई

गायों को चारे के रूप में दिए जाने वाले मटर के छिलके व गन्ने की खोई की सप्लाई के लिए बाबा ने कारखानों से संपर्क कर रखा है। यहां प्रतिदिन दो ट्रक मटर का छिलका मंगाया जा रहा है। वहीं अन्य सामान के लिए अलग से गोदाम बना हुआ है।
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