आगामी 21 जून 2020, (रविवार) आषाढ़ कृष्ण अमावस्या को होने जा रहा सूर्यग्रहण भारत में खंडग्रास के रूप में ही दृश्य होगा। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि यह सूर्य ग्रहण गंड योग और मृगशिरा नक्षत्र में होगा।
पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की यह ग्रहण क्योंकि मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लग रहा है इसलिए मिथुन वालों पर इस ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा।
भारत में इस सूर्यग्रहण का आरम्भ प्रातः 10 बजकर 13 मिनट से दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। भारत केअतिरिक्त यह खंडग्रास सूर्यग्रहण विदेश के कुछ क्षेत्रों में भी दिखाई देगा।
इस ग्रहण का व्यापक प्रभाव भारत, दक्षिण पूर्वी यूरोप, अफ्रीका, अफगानिस्तान, चीन, पाकिस्तान, बर्मा पर दिखाई देगा।
कब लगेगा इस सूर्य ग्रहण का सूतक
सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। इस सूर्यग्रहण का सूतक 20 जून को रात्रि 10 बजकर 14 मिनट से आरम्भ हो जाएगा, जो कि सूर्यग्रहण ग्रहण के समाप्त होने तक रहेगा।
21 तारीख को देश की राजधानी दिल्ली में सुबह 9 बजकर 15 मिनट से यह ग्रहण आरंभ हो जाएगा। इस ग्रहण का परमग्रास 99.4 प्रतिशत रहेगा, यानी कुछ स्थानों पर सूर्य पूरी तरह छुप जाएगा। यह ग्रहण करीब 5 घंटे, 48 मिनट 3 सेकंड का रहेगा।
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यह होगा इस काकण सूर्य ग्रहण का भारत देश के ऊपर प्रभाव
ग्रहण के समय 6 ग्रहों का वक्री होना इस बात का संकेत दे रहा है कि प्राकृतिक आपदाओं यथा समुद्री चक्रवात, तूफान, अत्यधिक वर्षा, महामारी आदि से जन-धन की हानि हो सकती है।
पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार वर्ष 2020 में मंगल अग्नि तत्व का प्रतीक है और यह जलीय राशि में 5 मास तक रहेंगे इस कारण सामान्य रूप से अत्यधिक वर्षा और महामारी का भय बना रहेगा।
इस ग्रहण के समय कुल 6 ग्रह वक्री होंगे और ग्रहण के समय मंगल जलीय राशि मीन में बैठकर सूर्य चंद्रमा बुद्ध व राहू को देख रहा होगा , जो अच्छा संकेत नहीं है। इससे समंदर में चक्रवात, तूफान, बाढ़ वह अत्यधिक बारिश जैसे प्राकृतिक प्रकोप के आसार बनेंगे।
ज्योतिर्विद पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की इस सूर्य ग्रहण काल में शनि और गुरु का मकर राशि में वक्री होने से पड़ोसी देशों में राजनितिक उठापठक से भारत को चिंता बनी रहेगी।
शनि, मंगल और गुरु इन तीनों ग्रहों के प्रभाव से देशों में आर्थिक मंदी का असर बना रहेगा बना रहेगा। चीन की सामरिक गतिविधिया जल, थल और आकाश में बढ़ने से पड़ोसी देशो के मध्य चिंता का कारण बनेगा।
इस ग्रहण के कारण भारत का पड़ोसी देशों से संबंध प्रभावित हो सकता है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का सरकार का प्रयास बाधित होगा।
कोरोना से बड़ी संख्या में लोग पीड़ित हो सकते हैं जिससे सरकार को नई रणनीति तैयार करनी होगा। शनि, मंगल और गुरु के प्रभाव से विश्व के कई बड़े देशों में आर्थिक मंदी का असर एक वर्ष तक देखने को मिलेगा।
लेकिन स्वतंत्र भारत की कुंडली के ग्रह गोचर की स्थिति के मुताबिक भारत के लिए राहत की बात यह होगी कि देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। विश्व में भारत की साख भी बढ़ेगी।
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