राम मंदिर पर सरगर्मी तेज़, आज अयोध्या में श्री श्री रविशंकर
लखनऊ, 16 नवम्बर; अयोध्या मसले में मध्यस्थता को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख श्रीश्री रविशंकर ने बुधवार को लखनऊ में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व कई हिंदू संगठनों से चर्चा की. इसके बाद श्रीश्री गुरुवार को अयोध्या जाएंगे. मुलाकात के बाद सीएम योगी ने कहा, चर्चा से कोई विवाद हल हो, इससे अच्छा कुछ हो नहीं सकता.
उधर, विहिप ने बयान जारी कर साफ कहा कि बातचीत की जरूरत नहीं है. पुरातत्व सबूत हिंदुओं के पक्ष में हैं और कोर्ट सबूतों से चलती है. वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने श्री श्री से नए फ़ॉर्मूले की डिमांड की. उनका कहना है कि 12 साल पहले उनकी ऐसी कोशिश नाकाम हो चुकी है.
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योगी से मुलाकात के बाद श्रीश्री ने कहा, “देश में शांति व सद्भाव से जुड़े हर मुद्दे पर बात हुई. मुझे उम्मीद है, मैं किसी से नफरत नहीं करता. यह शुरुआत है. हम सब से बात करेंगे.” याद रहे श्रीश्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह स्वेच्छा से मध्यस्थ बने हैं. वह देश में एकता व सद्भाव चाहते हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अफसर ने सीएम योगी व श्रीश्री की मुलाकात सौजन्य भेंट थी. यह करीब 40 मिनट चली. इसमें योगी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार विवाद में पक्षकार नहीं है. सरकार किसी भी हल और कोर्ट के फैसले का आदर के साथ स्वागत करेगी.
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आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के प्रतिनिधि गौतम विज ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि श्रीश्री हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों को सुन रहे हैं. फिलहाल समाधान का कोई फॉर्मूला या प्रस्ताव तैयार नहीं है. दोनों पक्षों का रवैया बहुत सकारात्मक है.
विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने लखनऊ में बयान जारी कर कहा, “राम-जन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर किसी समझौते के शोर की कोई प्रासंगिकता नहीं है. पुरात्तव के सबूत हिंदुओं के पक्ष में हैं और कोर्ट सबूतों पर फैसला देती है. विहिप श्रीश्री का आदर करती है, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि अतीत में ऐसे प्रयास विफल हो चुके हैं, जबकि उनमें प्रधानमंत्री, सरकारें व शंकराचार्य शामिल थे.“

अयोध्या आंदोलन से जुड़े संत रामविलास वेदांती ने पहले ही उनकी मध्यस्थता को अस्वीकार कर दिया था उनका का कहना था- “जेल गए हम, लाठियां खाईं हमने और अचानक से श्रीश्री रविशंकर कहां से आ गए? रविशंकर तब कहां थे जब हम संघर्ष कर रहे थे? अयोध्या में राम मंदिर बनेगा तो ठीक है, वरना किसी भी कीमत पर मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी.“
संत रामविलास वेदांती जी ने एक निजी समाचार वेबसाइट के सामने अपना मत रखते हुए कहा, “श्री श्री रविशंकर अपने फायदे के लिए अयोध्या आ रहे हैं. वह अयोध्या आकर अपना NGO बढ़ाना चाहते हैं. उनके पास कोई फार्मूला नहीं है.” वेदांती जी आगे कहते हैं कि, ” रविशंकर ने राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े लोगों को नज़रंदाज़ किया है.वेह सिर्फ राम के नाम पर धन बटोरना चाहते हैं. हम रविशंकर से किसी भी प्रकार की मुलाकात नहीं करेंगे.”
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उम्मीद जताई कि श्रीश्री द्वारा किए जा रहे सुलह व मध्यस्थता प्रयास सार्थक होंगे और अयोध्या विवाद शांतिपूर्वक हल हो जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बंधनकारी होगा.
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 21 मार्च को अयोध्या विवाद बातचीत से हल करने का सुझाव दिया था. कोर्ट 5 दिसंबर को अगली सुनवाई करेगी. इसके एक दिन बाद अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने की 25 वीं बरसी है.
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