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नदियों के पहरेदार बनें, रिस्पना से ऋषिपर्णा यात्रा : स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने एक करोड़ धन राशि देने की घोषणा

नदियों के पहरेदार बनें, रिस्पना से ऋषिपर्णा यात्रा : स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने एक करोड़ धन राशि देने की घोषणा

नदियों के पहरेदार बनें, रिस्पना से ऋषिपर्णा यात्रा : स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने एक करोड़ धन राशि देने की घोषणा
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नदियों के पहरेदार बनें, रिस्पना से ऋषिपर्णा यात्रा : स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने एक करोड़ धन राशि देने की घोषणा

नदियों के पहरेदार बनें, रिस्पना से ऋषिपर्णा यात्रा

  • अब हर कदम  रिस्पना की ओर, स्वच्छ उत्तराखण्ड-स्वच्छ भारत
  • सरकार, सेना, संत, समाज और सभी संस्थायें यदि साथ आ जाये और उसमें भी युवा शक्ति और महिला शक्ति को जोड़ लें तो कुछ भी असम्भव नहीं
  • ’ठेकेदारी से नहीं बल्कि पहरेदारी से बनेंगी बात’-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
  • स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने एक करोड़ धन राशि देने की घोषणा की जिसका उपयोग रिस्पना के किनारों पर पौधे और कूडादान लगाने के लिये किया जाएगा

ऋषिकेश, 6 अक्टूबर। उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में रिस्पना के पूर्ण उद्धार हेतु एक ऐतिहासिक मुहिम की शुरूआत हुई। इस मुहिम में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेद्र सिंह रावत जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार जी, जिलाधिकारी श्री एसए मुरूगेशन जी, वन विभाग से मीनाक्षी जोशी, सेना के अधिकारी श्री राणा जी, डीएफओ मसूरी श्री साकेत बडोला जी, स्थानीय विधायक श्री गणेश जोशी जी अन्य अनेक अधिकारियों एवं स्कूल के छात्र-छात्राओं ने सहभाग किया तथा स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस मुहिम में श्री राजेन्द्र सिंह जी जिन्होने कई नदियों का उद्धार सरकारी प्रयास से नहीं बल्कि सहकारिता से सबके प्रयास से किया उन्हे भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था, श्री राजेन्द्र सिंह जी ने भी सहभाग किया।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि ’सरकार, संत, सेना, समाज और सभी संस्थायें यदि साथ आ जाये और उसमें भी युवा शक्ति और महिला शक्ति को जोड़ लें तो मुझे लगाता है कुछ भी असम्भव नहीं है। अब समय आ गया है नदियों के ठेकेदार नहीं बल्कि पहरेदार बने; अब ’ठेकेदारी से नहीं बल्कि पहरेदारी से बनेंगी बात’ आईये नदियों के पहरेदार बनें। उन्होने कहा कि जिन नदियों ने हमें आवाज दी है, जिन नदियों से हमें सभ्यता मिली है उन नदियों के लिये अब खडे़ं होने का समय आ गया है; जिन नदियों ने हमें खड़े होना सिखाया है उन नदियों के लिये अब हमें खड़े होना है; जिन नदियों ने हमें आवाज दी है उनकी हमें आवाज बनना है इसलिये आज शुरू हुई यह रिस्पना से ऋषिपर्णा यात्रा।

स्वामी जी ने कहा कि आज मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई, मानो, मेरा स्वप्न साकार हो गया। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड के संत हृदय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेद्र सिंह रावत जी, जिनसे मेरी पहली मुलाकात ही रिस्पना के प्र्रदूषण भरे माहौल में हुयी थी। जब रिस्पना नदी एक नाले में तब्दील हो चुकी थी, उस रिस्पना की सफाई करते हुये ही हमारी भेंट हुयी थी। माननीय मुख्यमंत्री जी ने उस क्षण को याद करते हुये; उस स्वप्न को साकार करने के लिये संकल्प  लिया और उनके साथ सभी ने लिया संकल्प यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी, आईये इस संकल्प से जुड़े और ’संकल्प को करें साकार’।
स्वामी जी ने कहा कि देहरादून के लिये तो रिस्पना और बिन्दाल ही गंगा है, उन्होने देहरादूनवासियों से आहृवान किया कि आईये अपनी गंगा को स्वच्छ रखे।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने एक करोड़ धन राशF परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार की ओर से देने की घोषणा की जिसका उपयोग रिस्पना के किनारों को हरा-भरा रखने हेतु पौधे और कूडादान लगाने के लिये किया जायेगा ताकि वहां पर स्वच्छ एवं हरियाली युक्त वातावरण निर्मित हो सकें और उत्तराखण्ड की भूमि से पूरे भारत और सम्पूर्ण विश्व को यह संदेश जाये की प्रदूषण की  समस्यायें है परन्तु उत्तराखण्ड की जनता; भारत की जनता उन समस्याओं को हल करना भी जानती है। उन्होेने कहा कि इन समस्याओं का हल कहीं और नहीं बल्कि इसके लिये ’हम है समाधान’। स्वामी जी ने कहा कि कौन से पौधें कहा लगेंगे इस हेतु वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों (वन विभाग और फाॅरेस्ट रिसर्च इंस्टीटयूट) की राय से पेड़ों को लगाने का कार्य किया जायेगा।


स्वामी जी एवं मुख्यमंत्री जी ने संकल्प कराया की हम सब साथ-साथ हाथों में हाथ लेकर नदियों की स्वच्छता की मुहिम में सहभाग करें और प्रदूषित होती नदियों के लिये मिलकर प्रयास करें। स्वामी जी हरियाली का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। भारत की ज्वलंत समस्या जल संकट एवं नदी प्रदूषण है परन्तु इसका निदान निकाला जा सकता है आईये एकजुट होकर हम सभी मिलकर कार्य करें तथा बदलाव की क्रान्ति का सूत्रपात करें। समाधान के लिये हम और इन्तजार नहीं कर सकते हम सभी को स्वीकार करना होगा की ’हम स्वयं समाधान हैं’।

RW

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By Religion World November 13, 2017 4 min read
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