श्रद्धांजलि : ब्रह्मर्षि श्रीश्री मौनी बाबा जी

मौनतीर्थ उज्जैन के संस्थापक पूज्य सन्त “श्री मौनी बाबा जी” का पुणे में इलाज के दौरान महाप्रयाण हो गया हैं।
उनके नश्वर शरीर को विमान द्वारा उज्जैन लाया जा रहा हैं। दोपहर में समाधि/अन्तिम संस्कार/दर्शन की संभावना हैं।
महान तपस्वी, शताधिक आयु प्राप्त,मौनतीर्थ के निर्माता, राष्ट्र संत,उज्जयिनी की धरती को अपनी उपस्थिति से गरिमा प्रदान करने वाले ब्रह्मर्षि मौनी बाबा ने आज प्रातः काल 6 .30 पर पुणे में शिवलोक गमन किया।
ब्रह्मर्षि श्रीश्री मौनी बाबा जी
पुराणों में वर्णित “ऋषि” के दर्शन परम पूज्य श्री श्री मौनी बाबा के दर्शन करने से हो जाते हैं| तपस्या , साधना, भक्ति के परम धाम मौनी बाबा अपने भक्तो की परम आस्था का केंद्र है | वे सतत मौन रहते है तथा अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करते हैं| मौनी बाबा के कठोर तप से मौनतीर्थ गंगा घाट का वातावरण चमत्कारिक शांति व प्रसन्नता प्रदान करता है | उनके दर्शन के पश्चात् जीवन के अनेक प्रसंगों में शुभ परिवर्तन के संकेत मिलते है | कहा जाता है कि परम पूज्य मौनी बाबा के दर्शन जीवन में अत्यंत दुर्लभ क्षण में होते है | उनके आशीर्वाद से अनेक भक्त गण लाभ प्राप्त कर चुके है | परम पूज्य मौनी बाबा ब्रह्मर्षि हैं, ऋषि श्रेष्ठ हैं तथा तपस्या रत योगी हैं | उनका प्रत्येक भक्त उनके आशीर्वाद के पश्चात् हुए चमत्कारों से अभिभूत है |परम पूज्य ब्रह्मर्षि श्री श्री मौनी बाबा के दर्शन हेतु मौन तीर्थ आश्रम में संपर्क कर समय निर्धारित करना होता है|
परम पूज्य ब्रह्मर्षि श्री श्री मौनी बाबा के के दिग्दर्शन और श्रीराम चरितमानस कथा के मर्मज्ञ सुमन भाई के कुशल नेतृत्व में यह धाम राष्ट्र व समाज को आध्यात्मिकता के रास्ते पर ले जाकर वेद ज्ञान के माध्यम से चरित्र निर्माण का पाठ पढ़ा रहे हैं।
मौन तीर्थ धाम में प्राचीन गुरुकुल परम्परा मौजूद है, जहां विद्यार्थी पीली धोती व सफेद कुर्ते में शुद्ध आचरण व वेद का अध्ययन कर अच्छे नागरिक बनने की तैयारी कर रहे हैं। यहां की गौशाला भी निराली है, जहां पल रही 60 गायों को उनके अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। विभिन्न देवियों व नदियों के नाम से रखे गए इन नामों की नेमप्लेट भी उनके सामने लगी है यानी आप नेमप्लेट देखकर भी गायों को उनके नामों से जान व पुकार सकते हैं। मौन तीर्थ आश्रम में कल्पवृक्ष के दर्शन भी होते हैं, जिसकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए वहां नंगे पैर जाया जाता है।
मौनतीर्थ धाम में उस शालीग्राम के दर्शन भी सहजता के साथ होते हैं, जिसे कभी गोस्वामी तुलसीदास ने अपने हाथों से चढ़ाया था। इस धाम में जहां नवग्रह का अनूठा मंदिर है, वहीं नवग्रहों की पूजा कर उन्हें शांत करने की यज्ञशाला भी भव्यता के साथ बनाई गई है। धाम परिसर में वाग्देवी का मंदिर आस्था जगाता है तो धार्मिक प्रवचनों, संत समागम और मानस कथा व्यास सुमन भाई के श्रीमुख से भगवान राम की आदर्श कथा सुनने के लिए भव्य सभागार भी बनाया गया है।
यही नहीं, मौन तीर्थ सेवार्थ फाउंडेशन के तत्वावधान में कला, साहित्य, सस्ंकृति, वीरता, राष्ट्रभक्ति में कुछ अच्छा करने वालों को प्रोत्साहित भी किया जाता है। यहां के विदुषी विद्योत्तमा महर्षि जटायु व मानस वंदन नाम से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर दिए जा रहे सम्मानों की अपनी अलग पहचान है।
कई एकड़ क्षेत्रफल में पल्लवित इस धाम से कई धार्मिक, आध्यात्मिक व सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पत्र-पत्रिकाएं भी प्रकाशित होती हैं, जिनके माध्यम से मौनी बाबा के संदेशों को देश-विदेश तक पहुंचाया जाता है लेकिन शिप्रा नदी के प्रवाह में आए ठहराव या फिर धीमी गति के कारण नदी का जल शुद्ध न रह पाने से साधकों की भावना आहत होती दिखाई पड़ती है, जिससे मध्य प्रदेश सरकार को ध्यान देने की जरूरत है अन्यथा वेद ज्ञान का जो प्रकाश उज्जैन का मौनतीर्थ धाम वेद विद्यालय के रूप में फैला रहा है, उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा होनी ही चाहिए, जिसके लिए पूरा मौनतीर्थ मानस परिवार वंदनीय है।
मौनतीर्थ गंगाघाट, उज्जैन के “चित्रकूट” परिसर में प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को श्री रामनाम सेवा आश्रम न्यास के उपक्रम श्री सीताराम सेवा संघ द्वारा प्रतिवर्ष चैत्र माह की नवरात्रि पर श्री रामचरित मानस के नवाह्न पारायण का भव्य आयोजन किया जाता है तथा इस तिथि को श्री रामचरितमानस जयंती समारोहपूर्वक मनाई जाती है | शिप्रा के सुरम्य तट पर १०८ ब्राह्मणों द्वारा नौ दिवस तक सतत श्री रामचरितमानस का पाठ किया जाता है |। कदाचित् गीता जयंती की तरह मानस जयंती मनाने का श्रेय अखण्डमौनव्रती श्रीश्री मौनीबाबा की साधना-स्थली मौनतीर्थ उज्जयिनी को ही प्राप्त है। मानसानुरागी संतजनों, भक्तजनों एवं जन-जन से हमारी अपेक्षा है कि ‘मानस जयंती’ राष्ट्रव्यापी स्तर पर आयोजित कर श्रीरामकथा की विराट् प्रसिद्धि और प्रचार-प्रसार की अभिवृद्धि में सहयोग पदान करें। भारतीय साहित्य, संस्कृति एवं दर्शन के मंगलमय संगम रामचरितमानस को ईश्वर का यह वरदान तो प्राप्त है ही—
यावत् स्थास्यंति गिरय: सरितश्च महीतले।
तावद् रामायण-कथा लोकेषु प्रचरिष्यति।।
श्री राम नाम सेवा आश्रम न्यास
पुराणों में प्रसिद्ध एवं सप्तपुरियों में से एक भूतभावन भगवान महाकालेश्वर की पावन नगरी उज्जयिनी में मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तीर पर स्थित सद् गुरुदेव प्रातः स्मरणीय वन्दनीय परमपूज्य श्री श्री मौनी बाबा के आशीर्वाद से एवं मार्गदर्शन में स्थापित राम नाम सेवा आश्रम न्यास संत श्री सुमन भाई जी के सत्प्रयत्नो से लोक कल्याण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है | इस न्यास की स्थापना के मूल में यही भावना है कि परमार्थ से बढकर कोई सुख हो ही नहीं सकता | इस न्यास की स्थापना का उद्देश्य बिलकुल स्पष्ट है – “समस्त मानव जाति के परम कल्याण का दिव्य संकल्प”
साभार – https://vinayakvaastutimes.wordpress.com/
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