गुरूदेव श्री श्री रविशंकर जी ने नदी के परियोजना स्थल का दौरा किया
चिकमंगलूर, 6 अगस्त; गुरूदेव श्री श्री रविशंकर जी बुधवार को आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखने के लिए चिकमंगलूर पहुॅंचे। वे वहाॅं पर उन किसानों से मिले जिन्हे इससे फायदा मिल रहा है।
श्री श्री ने परियोजना को चला रहे समन्वयकों, स्वयंसेवकों को बधाई दी, जिन्हौने 6786 संरचनाओं को समुदाय के साथ मिलकर पुर्नजीवित किया।
चिकमंगलूर जिले के बेरनहल्ली गांव के किसान थामे गौडा कहते हैं कि उनके बोरवेल में पानी नहीं था और आर्ट आॅफ लिविंग के द्वारा बनाई गई संरचनाओं से जमीनी पानी का स्तर 450 फीट से 30 फीट पर आ गया है। आज मैं नई फसले उगा पा रहा हूॅं और 30-40 हजार की जगह पर 1.5 से 2.5 लाख तक कमा पा रहा हूॅं।

किसानों, स्थानीय अधिकारियों तथा मीडिया के साथ बात करते हुए श्री श्री ने इस बात पर जोर दिया कि हमें नीम, बड़, कदम्ब, पीपल ज्यादा लगाना चाहिये जो बरसात को आकर्षित करते हैं। युकेलिप्टस जैसे पेडों पानी ज्यादा अवशोषित करते हैं। उन्हौने आगे कहा कि वे झीलों को अस्वीकार नहीं करते हैं लेकिन छोटे-छोटे पानी के निकायों को संरक्षित करने की आवश्यकता है।
चित्रदुर्ग, चिकमंगलूर और हसन में संरचानाओं के पुर्नजीवित करने के साथ वनीकरण की संयुक्त कार्यशैली तथा कई तरह के स्वयंसेवकों जिनमे हाइड्रोलाॅजिस्ट, रिमोट सेंसिंग विषेषज्ञ ने मिलकर क्षेत्र की छवि को बदल दिया है।
चिकमंगलूर जिला परिषद की अध्यक्ष श्रीमती बी. चित्राशी कहती हैं, ‘‘मैं गुरूदेव श्री श्री रविशंकर जी के इस कदम के लिए आभारी हूॅं कि इससे किसानों को बहुत फायदा मिल रहा है। पुर्नजीवन की इन गतिविधियों ने जमीनी जल स्तर को उॅंचा उठा दिया है।’’ काडूर तालूका के प्रमुख श्री रिवाना कहते हैं, ‘‘यह एक अद्भूत परियोजना है, क्योकि पिछले तीन सालों से हमारे यहाॅं पानी कम गिर रहा है और हम यदि यह सब नहीं करते तो हमारा भविष्य संकट में पडता दिख रहा था।’’

आर्ट आॅफ लिविंग की इस नदी कायाकल्प अभियान के निदेषक डाॅ. लिंगराजु याले बताते हैं कि ‘‘यहाॅं पर किया गया कायाकल्प पूर्णतः वैज्ञानिक है। हमने नदी के बहाव को धीमा किया और पानी को जमीन में रिसने के लिए पर्याप्त समय दिया और परिणाम आपके सामने हैं। बोरवेल, कुए सभी का जल स्तर बढ़ा है।‘‘
गुरूदेव चिकमंगलूर में मीडिया के साथ बात करते हुए कहते हैं कि इस तकनीक को सभी के साथ साझा किया जाना चाहिये। वे आगे कहते हैं कि कावेरी के विवाद को हल करने के लिए हमने अन्य नदियों का कायाकल्प करने का निर्णय लिया और इसी के तहत हमने तमीलनाडू में भी यह कार्य हाथ में लिया है। वर्ष 2015 में आर्ट आॅफ लिविंग ने नांगेधी नदी के कायाकल्प का बीडा उठाया जा चुका है।

गुरूदेव ने परियोजना के लिए आवष्यक दिशा -निर्देश दिये और इससे आशा है कि लगभग 15 लाख लोगों को सीधे फायदा होगा। इस दौरे के दौरान उन्हौने ‘‘वाटर वारियर्स मार्च’’ में भी शिरकत की। इस मार्च में एमएलए, किसान, स्वयंसेवकों ने भाग लिया। मार्च के अंत में सभी ने पानी बचाने और उसे प्रदूषित नहीं करने, पेड लगाने और पानी के संरक्षण करने की शपथ ली।
विदित है कि आर्ट आॅफ लिविंग अभी तक 30 नदियों के कायाकल्प पर कार्य कर चुका है। श्री श्री ने कुमुदवती नदी पर चल रहे कार्यों की भी जानकारी ली।
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