RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?
Visual Archive

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

12वीं और 13वीं सदी में दिल्ली के सिंहासन पर दिल्ली सल्तनत का राज था। सुल्तान ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए कई बार मेवाड़ पर आक्रमण किया। इन आक्रमणों में से एक आक्रमण अलाउदीन खिलजी ने सुंदर रानी पदमिनी Padmavati को पाने के लिए किया था। ये कहानी अलाउदीन के इतिहासकारों ने किताबों में लिखी थी, ताकि वो राजपूत प्रदेशों पर आक्रमण को सिद्ध कर सके। कुछ इतिहासकार इस कहानी को गलत बताते हैं, क्योंकि ये कहानी मुस्लिम सूत्रों ने राजपूत शौर्य को उत्तेजित करने के लिए लिखी गयी थी। आइये इसकी पूरी कहानी आपको बताते है।

रानी पद्मिनी का बचपन और स्वयंवर में रतन सिंह से विवाह

Rani Padmini रानी पदमिनी के पिता का नाम गंधर्वसेन और माता का नाम चंपावती था। Rani Padmini रानी पद्मिनी के पिता गंधर्वसेन सिंहल प्रान्त के राजा थे। बचपन में पदमिनी के पास “हीरामणी ” नाम का बोलता तोता हुआ करता था, जिससे साथ वो अपना अधिकतर समय बिताती थीं। रानी पदमिनी बचपन से ही बहुत सुंदर थी और बड़ी होने पर उसके पिता ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। इस स्वयंवर में उसने सभी हिन्दू राजाओं और राजपूतों को बुलाया। एक छोटे प्रदेश का राजा मलखान सिंह भी उस स्वयंवर में आए थे।

राजा रावल रतन सिंह भी पहले से ही अपनी एक पत्नी नागमती होने के बावजूद स्वयंवर में गए थे। प्राचीन समय में राजा एक से अधिक विवाह करते थे, ताकि वंश को अधिक उत्तराधिकारी मिले। राजा रावल रतन सिंह ने मलखान सिंह को स्वयंवर में हराकर पदमिनी Padmavati से विवाह कर लिया। विवाह के बाद वो अपनी दुसरी पत्नी पदमिनी के साथ वापस चित्तौड़ लौट आए।

संगीतकार राघव चेतन का अपमान और निर्वासन

उस समय चित्तौड़ पर राजपूत राजा रावल रतन सिंह का राज था। एक अच्छे शासक और पति होने के अलावा रतन सिंह कला के संरक्षक भी थे। उनके दरबार में कई प्रतिभाशाली लोग थे जिनमे से राघव चेतन संगीतकार भी एक था. राघव चेतन के बारे में लोगो को ये पता नही था कि वो एक जादूगर भी है. वो अपनी इस बुरी प्रतिभा का उपयोग दुश्मन को मार गिराने में उपयोग करता था. एक दिन राघव चेतन का बुरी आत्माओ को बुलाने का कृत्य रंगे हाथो पकड़ा जाता है. इस बात का पता चलते ही रावल रतन सिंह ने उग्र होकर उसका मुह काला करवाकर और गधे पर बिठाकर अपने राज्य से निर्वासित कर दिया. रतन सिंह की इस कठोर सजा के कारण राघव चेतन उसका दुश्मन बन गया।

प्रतिशोध की आग में जला राघव चेतन पहुचा खिलजी के पास

अपने अपमान से नाराज होकर राघव चेतन दिल्ली चला गया जहा पर वो दिल्ली के सुल्तान अलाउदीन खिलजी को चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए उकसाने का लक्ष्य लेकर गया। दिल्ली पहुंचने पर राघव चेतन दिल्ली के पास एक जंगल में रुक गया जहां पर सुल्तान अक्सर शिकार के लिया आया करते थे. एक दिन जब उसको पता चला कि की सुल्तान का शिकार दल जंगल में प्रवेश कर रहा है तो राघव चेतन ने अपनी बांसुरी से मधुर स्वर निकालना शुरु कर दिया।

जब राघव चेतन की बांसुरी के मधुर स्वर सुल्तान के शिकार दल तक पहुंची तो सभी इस विचार में पड़ गये कि इस घने जंगल में इतनी मधुर बांसुरी कौन बजा सकता है. सुल्तान ने अपने सैनिको को बांसुरी वादक को ढूंढ कर लाने को कहा. जब राघव चेतन को उसके सैनिको ने अलाउदीन खिलजी के समक्ष प्रस्तुत किया तो सुल्तान ने उसकी प्रशंसा करते हुए उसे अपने दरबार में आने को कहा. चालाक राघव चेतन ने उसी समय राजा से पूछा कि “आप मुझे जैसे साधारण संगीतकार को क्यों बुलाना चाहते है जबकि आपके पास कई सुंदर वस्तुए है. ”

राघव चेतन की बात ना समझते हुए खिलजी ने साफ़-साफ़ बात बताने को कहा. राघव चेतन ने सुल्तान को Rani Padmini  रानी पदमिनी की सुन्दरता का बखान किया जिसे सुनकर खिलजी की वासना जाग उठी. अपनी राजधानी पहुचने के तुरंत बात उसने अपनी सेना को चित्तौड़ पर आक्रमण करने को कहा क्योंकि उसका सपना उस सुन्दरी को अपने हरम में रखना था।

रानी पद्मिनी की एक झलक पाने खिलजी पहुचा चित्तोड़

बेचैनी से चित्तौड़ पहुचने के बाद अलाउदीन को चित्तौड़ का किला भारी सुरक्षा में दिखा। उस प्रसिद्ध सुन्दरी Padmavati की एक झलक पाने के लिए सुल्तान बेताब हो गया और उसने राजा रतन सिंह को ये कहकर भेजा कि वो Rani Padmini  रानी पदमिनी को अपनी बहन समान मानता है और उससे मिलना चाहता है. सुल्तान की बात सुनते ही रतन सिंह ने उसके रोष से बचने और अपना राज्य बचाने के लिए उसकी बात से सहमत हो गया. रानी पदमिनी अलाउदीन को कांच में अपना चेहरा दिखाने के लिए राजी हो गयी. जब अलाउदीन को ये खबर पता चली कि रानी पदमिनी उससे मिलने को तैयार हो गयी है वो अपने चुनिन्दा योद्धाओं के साथ सावधानी से किले में प्रवेश कर गया.

रानी पद्मिनी की सुन्दरता पर मोहित हो खिलजी ने रतन सिंह को बनाया बंदी

Rani Padmini  रानी पदमिनी के सुंदर चेहरे को कांच के प्रतिबिम्ब में जब अलाउदीन खिलजी ने देखा तो उसने सोच लिया कि रानी पदमिनी को अपनी बनाकर रहेगा. वापस अपने शिविर में लौटते वक़्त अलाउदीन कुछ समय के लिए रतन सिंह के साथ चल रहा था. खिलजी ने मौका देखकर रतन सिंह को बंदी बना लिया और पदमिनी की मांग करने लगा. चौहान राजपूत सेनापति गोरा और बादल ने सुल्तान को हराने के लिए एक चाल चलते हुए खिलजी को संदेश भेजा कि अगली सुबह पद्मिनी को सुल्तान को सौप दिया जाएगा.

राजा रतन सिंह को बचाने पहुचे गोरा और बादल

अगले दिन सुबह भोर होते ही 150 पालकियां किले से खिलजी के शिविर की तरफ रवाना की. पालकियां वहा रुक गयी जहा पर रतन सिंह को बंदी बना रखा था. पालकियो को देखकर रतन सिंह ने सोचा, कि ये पालकिया किले से आयी है और उनके साथ रानी भी यहाँ आयी होगी, वो अपने आप को बहुत अपमानित समझने लगा। उन पालकियों में ना ही उनकी रानी और ना ही दासियां थीं और अचानक से उसमे से पूरी तरह से सशस्त्र सैनिक निकले और रतन सिंह को छुड़ा दिया और खिलजी के अस्तबल से घोड़े चुराकर तेजी से घोड़ो पर पर किले की ओर भाग गये. गोरा इस मुठभेड़ में बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये जबकि बादल, रतन सिंह को सुरक्षित किले में पहुचा दिया.

सुल्तान ने किया चित्तौड़ पर आक्रमण

जब सुल्तान को पता चला कि उसके योजना नाकाम हो गयी, सुल्तान ने गुस्से में आकर अपनी सेना को चित्तौड़ पर आक्रमण करने का आदेश दिया। सुल्तान के सेना ने किले में प्रवेश करने की कड़ी कोशिश की लेकिन नाकाम रहा। अब खिलजी ने किले की घेराबंदी करने का निश्चय किया. ये घेराबंदी इतनी कड़ी थी कि किले में खाद्य आपूर्ति धीरे धीरे समाप्त हो गयी. अंत में रतन सिंह ने द्वार खोलने का आदेश दिया और उसके सैनिको से लड़ते हुए रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हो गया. ये सुचना सुनकर Rani Padmini  पद्मिनी ने सोचा कि अब सुल्तान की सेना चित्तैड़ के सभी पुरुषो को मार देगी. अब चित्तौड़ की औरतों के पास दो विकल्प थे या तो वो जौहर के लिए प्रतिबद्ध हो या विजयी सेना के समक्ष अपना निरादर सहे।

अपनी आबरू बचाने के लिए रानी पद्मिनी ने किया जौहर

सभी महिलाओ का पक्ष जौहर की तरफ था। एक विशाल चिता जलाई गयी और रानी पदमिनी के बाद चित्तौड़ की सारी औरतें उसमें कूद गयी और इस प्रकार दुश्मन बाहर खड़े देखते रह गये। अपनी महिलाओं की मौत पर चित्तौड़ के पुरुष के पास जीवन में कुछ नही बचा था। चित्तौड़ के सभी पुरुषों ने साका प्रदर्शन करने का प्रण लिया जिसमे प्रत्येक सैनिक केसरी वस्त्र और पगड़ी पहनकर दुश्मन सेना से तब तक लड़े जब तक कि वो सभी खत्म नही हो गये. विजयी सेना ने जब किले में प्रवेश किया तो उनको राख और जली हुई हड्डियों के साथ सामना हुआ। जिन महिलाओं ने जौहर किया उनकी याद आज भी लोकगीतों में जीवित है जिसमे उनके गौरवान्वित कार्य का बखान किया जाता है।

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta November 10, 2017 7 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Astrology

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन भारत के अलग-अलग राज्यों में

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन भारत के अलग-अलग राज्यों में रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्यार, विश्वास और सुरक्षा के अटूट बंधन का प्रतीक है।भारत…

Read now
Hinduism

भारत में कोरोना वायरस के स्टेज-3 से लड़ने की तैयारी पूरी

नयी दिल्ली, 28 मार्च;   इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ कोविड -19 टास्क फोर्स के सदस्यों ने इस बात को बनाए रखा है कि…

Read now
Hinduism

कोरोना वायरस: इतने राज्यों में पहुंचा कोरोना वायरस, 5 की मौत, 200 से ज्यादा संक्रमित

नई दिल्ली, 20मार्च; कोरोना वायरस से भारत में अबतक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे पहली मौत कर्नाटक के कुलबर्गी से, दूसरी मौत देश की राजधानी…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *