ज्योतिष : कर्नाटक चुनाव 12 मई 2018 की भविष्यवाणी

भारतीय निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव मई में कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कर्नाटक की वर्तमान (13वीं) विधानसभा का पांच वर्ष का कार्यकाल तीन जून को समाप्त हो जाएगा।
225 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में 224 सीटों पर सीधे चुनाव के जरिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं जबकि राज्य में आंग्ल-भारतीयों को प्रतिनिधित्व देने के लिए एक सीट पर नामांकन के जरिए प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है। 224 सदस्यों वाले कर्नाटक विधानसभा के लिए 12 मई को मतदान होगा और वोटों की गिनती 15 मई को की जाएगी। कांग्रेस और भाजपा दोनो ही दलों के लिए ये चुनाव बहुत अहम है।
चुनाव कार्यक्रम के एलान के साथ ही कर्नाटक में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। आयोग ने चुनाव के लिए जहां तमाम अहम बंदोबस्त किए हैं वहीं राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मीडिया के लिए दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं।
कर्नाटक में 4 करोड़ 96 लाख मतदाता अपने मत का इस्तेमाल करेंगे। इनके लिए 56 हजार 696 पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। दिव्यांगों व महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। 450 से अधिक बूथों की कमान महिलाओं के हाथ में होगी चुनाव के दौरान इवीएम के साथ- साथ वीवीपैट मशीन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। चुनावी खर्च पर विशेष नजर रखी जाएगी। बिना दस्तावेज के बड़ी रकम जब्त कर ली जाएगी। कर्नाटक में केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती होगी। रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होगा ।
224 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 113 सीटों की जरुरत होती है। फिलहाल कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बिगुल बजने के साथ ही राजनीतिक दलों की सरगर्मियां तेज होना स्वाभाविक है। कनार्टक भाजपा, कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) तीनों के लिए अहम है। इस वक्त वहां कांग्रेस की सरकार है। देश में कांग्रेस के पास कर्नाटक ही बड़ा राज्य बचा है। बाकी पंजाब, मिजोरम और पुडुचेरी में ही कांग्रेस की सरकार है। 21 राज्यों में देश के 68 फीसदी भूभाग पर भाजपा या राजग की सरकार है। कनार्टक में वापसी कर भाजपा फिर से दक्षिण में एंट्री करना चाहती है। दक्षिणी राज्यों में से अभी तक केवल आंध्र प्रदेश में ही भाजपा चंद्रबाबू की पार्टी टीडीपी के साथ गठबंधन में थी, लेकिन हाल में यह गठबंधन भी टूट गया है। इससे पहले भी 2008 में भाजपा ने कर्नाटक में ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर दक्षिण में पहली एंट्री की थी।
राज्य में 419 लाख सशक्त निर्वाचन क्षेत्र हैं तथा 50,446 मतदान केंद्र हैं। राज्य में लगभग 99 फीसदी मतदाताओं के पास मतदाता पहचान पत्र हैं। राज्य में अधिकतर राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से दो-तीन चरणों की बजाय एक ही तारीख में चुनाव संपन्न कराने का अनुरोध किया है।कर्नाटक में इस बार भाजपा, कांग्रेस व जदएस-बसपा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला की उम्मीद भी है। पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा व उनके बेटे कुमारस्वामी की पार्टी जदएस के लिए राजनीतिक अस्तित्व का प्रश्न है। इस राज्य में अभी तक अधिकांश मुख्यमंत्री लिंगायत या वोक्कालिगा समुदाय से रहे हैं, हालांकि सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय से हैं। कर्नाटक की सौ सीटों पर लिंगायत का प्रभाव है।
लिंगायत अगड़ी जाति मानी जाती है और भाजपा का बड़ा वोट बैंक भी यही समुदाय है। भाजपा नेता व सीएम के दावेदार येद्दियुरप्पा भी लिंगायत समुदाय से ही हैं। कांग्रेस सरकार की ओर से लिंगायत को अलग धर्म के रूप में मान्यता देने से चुनाव पर कितना असर पड़ेगा यह वक्त ही बताएगा। कर्नाटक चुनाव नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी के लिए भी महत्वपूर्ण है। चूंकि इस चुनाव के नतीजे देश के मूड को बयां करेंगे, इसलिए ये 2019 में लोकसभा चुनाव के लिए भी अहम हैं। भाजपा व कांग्रेस दोनों को अपनी स्थिति का पता लग जाएगा।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक 43.3 फीसदी मत के साथ कुल 28 लोकसभा सीट में से 17 सीटें मिली थीं। 9 सीटों व 41.2 फीसदी वोट के साथ कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी। जदएस को केवल 11.1 फीसदी वोट व दो सीटें मिली थीं। इसलिए भाजपा का पलड़ा इस वक्त भारी लग रहा है। हालांकि कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का दांव खेला है।
दूसरी ओर सबसे अधिक दलित वोट वाले इस प्रदेश में जदएस ने मयावती की पार्टी बसपा के साथ गठबंधन किया है। कर्नाटक में दलित 19 फीसदी, लिंगायत 17 फीसदी, मुसलमान 16, वोक्कालिगा 11, ओबीसी 16 प्रतिशत, कुरुबा 7 फीसदी, अनुसूचित जनजाति 5 फीसदी व ब्राह्मण 3 फीसदी हैं। वोक्कालिगा समुदाय जनता दल-एस के वोट बैंक माने जाते हैं। ऐसे में दलित व वोक्कालिगा अगर एक हो गए तो जदएस-बसपा का पलड़ा मजबूत माना जाएगा।
ज्योतिर्विद पंडित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की कर्नाटक चुनाव 2018 में इस दफा जो भी होगा, आपने सपने में भी नहीं सोचा होगा। ऐसी बाजी पलटेगी कि देखने वाले बस देखते ही रह जायेंगे । 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस को 52-67 सीटें तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 118-126 सीटें मिलने के साथ एक बहुमत वाली विधानसभा बनने की भविष्यवाणी है। ज्योतिर्विद पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार बाकी की अधिकतर सीटें जनता दल (सैकुलर) अथवा जद (एस) को मिलने की सम्भावना बनती है। हम (ज्योतिर्विद पंडित दयानन्द शास्त्री) यह भविष्यवाणी करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत (224 सीटों में से 112 से अधिक ) प्राप्त कर सकती है।
भविष्यवाणी – 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस को 52-67 सीटें तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 118-126 सीटें मिलने के साथ एक बहुमत वाली विधानसभा बनने की भविष्यवाणी है।
हमारी (ज्योतिर्विद पंडित दयानन्द शास्त्री) गणना यह बताती है कि कांग्रेस को 112 की जादुई संख्या को छूने के लिए लोकप्रिय मतों के कुल 40 प्रतिशत की जरूरत होगी। दूसरी ओर भाजपा को 112 की संख्या तक पहुंचने के लिए लोकप्रिय मतों के कुल केवल 37 प्रतिशत की जरूरत होगी, यदि पार्टी के वोटों का बंटवारा 2013 के पैटर्न के ही अनुरूप हो।
दूसरी तरह से देखें तो कांग्रेस को 2013 में 36.6 प्रतिशत लोकप्रिय मत मिले थे और इसे अपने पक्ष में और 3.4 प्रतिशत मत हिस्सेदारी की जरूरत है ताकि पूर्ण बहुमत प्राप्त कर सके। तीनों पाॢटयां जो अब भाजपा बनाती हैं, को 2013 में मिल कर 32.5 प्रतिशत वोट मिले थे तथा इसे भी बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए अपने पक्ष में मात्र 3.5 प्रतिशत
पाठकों को याद होगा कि 2013 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येद्दियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगने के बाद भाजपा में कई विभाजन हुए थे। येद्दियुरप्पा ने अपनी खुद की पार्टी कर्नाटक जनता पक्ष (के.जे.पी.) बनाने के लिए भाजपा छोड़ दी थी। येद्दियुरप्पा मंत्रिमंडल के एक सदस्य बी.श्रीराममुलु भी अपनी खुद की पार्टी (बी.एस.आर. कांग्रेस) बनाने के लिए भाजपा से अलग हो गए।
इस फूट से भाजपा को 2013 के चुनावों में काफी धक्का पहुंचा था और उसकी सीटें 40 तक सिमट गई थीं। जद (एस) दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस को आराम से बहुमत मिल गया था।
के.जे.पी. तथा बी.एस.आर.सी. बाद में 2014 के आम चुनावों से पूर्व भाजपा में लौट आई थी तथा येद्दियुरप्पा और श्रीराममुलु दोनों ने भाजपा की टिकटों पर लोकसभा चुनाव जीते। मोदी लहर के चलते भाजपा कर्नाटक में 28 लोकसभा सीटों में से 17 जीतने में सफल रही।
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पंडित दयानन्द शास्त्री,
(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)
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