बाल विवाह को समाप्त करने हेतु विश्व रिकाॅर्ड की तैयारी
- ’’शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ हस्ताक्षर कैम्पेन में 120,000 लोगों ने किये हस्ताक्षर
- ’’शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ हेतु हस्ताक्षर कैम्पेन यूनिसेफ और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस, परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वाधान में परमार्थ निकेतन शिविर कुम्भ मेला प्रयागराज में चलाया गया
- नारियाँ है विश्व विजेता, भारत की सभी बेटियाँ है चैंपियन, एक दिन नहीं हर दिन है माँ का – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- ’’शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ हस्ताक्षर कैम्पेन में श्री नितिन गड़करी जी, भारत के सड़क परिवहन व राज्यमंत्री एवं गंगा संरक्षण मंत्री, मुख्यमंत्री गुजरात श्री विजय रूपानी जी, बालीवुड अभिनेता श्री संजय मिश्रा जी, फिल्म निदेशक श्री अभिनव कश्यप जी, बालीवुड अभिनेत्री श्रीमती लुबना सलीम जी, न्यूज एंकर रोहित सरदाना जी, प्रसिद्ध अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी जी और अन्य गणमान्य लोगों ने हस्ताक्षर कर इस अभियान को सफल बनाया
8 मार्च, ऋषिकेश। विश्व महिला दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत की सभी बेटियाँ है चैंपियन। हमारे देश की नरियाँ विश्व विजेता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की बेटियों को सशक्त करने हेतु उन्हें शिक्षित करना नितांत आवश्यक है। बेटियों की शादी से पहले शिक्षा जरूरी है। इसी परिपेक्ष्य में कुम्भ मेला प्रयागराज में ’’शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ हेतु हस्ताक्षर कैम्पेन चलाया गया था जिसके माध्यम से हम इस आवाज को हर व्यक्ति, समुदाय तक इस कैम्पेन के माध्यम से पहंुचा रहे है। साथ साथ हम ’गिनीज़ बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड’ हेेतु आगे चल रहे है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि एक दिन नहीं हर दिन है माँ का; माँ के बिना कैसा जीवन, माँ के बिना सुना जीवन-सुनी दुनिया, माँ है तो सब है। स्वामी जी ने बताया कि आज हम विश्व महिला दिवस मना रहे है तब रिकाॅर्ड ब्रेक किया मातृ शक्ति के लिये। शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ हस्ताक्षर कैम्पेन में 120,000 लोगों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया यह अभियान अब आगे बढ़ते रहेगा।

स्वामी जी महाराज ने बताया कि कुम्भ मेला प्रयागराज में परमार्थ निकेतन शिविर से हमने इस अभियान का जोरदार आगाज किया। ’’शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ हस्ताक्षर कैम्पेन हेतु एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने सहभाग किया। तथा इस कार्यक्रम में अनेक आध्यात्मिक, सामाजिक और राजनैतिक महिला लीडर्स ने अपने विचार व्यक्त किये जो वास्तव में प्रेरणा का स्रोत रहा।

बाल विवाह जैसे प्रथायें आज भी समाज में व्याप्त है और इसके अनेक दुस्परिणाम है और सबसे घातक है शिशु और माता की मृत्यु दर। बाल विवाह से शारीरिक और मानसिक विकास पूर्ण नहीं हो पाता। जब तक किसी भी देश की नारियां सशक्त नहीं होगी वह देश भी उन्नति नहीं कर सकता। इससे पहले भी बाल विवाह निषेध अधिनियम पारित हुये थे लेकिन जागरूकता के अभाव में आज भी समाज में बाल विवाह व्याप्त है। स्वामी जी महाराज ने बताया कि हमने कुम्भ में इस अभियान को चलाकर हर व्यक्ति तक इस संदेश को पहुंचाने कि कोशिश की है और इसके विलक्षण परिणाम प्राप्त हुये।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने भारत की बेटियों और उनके माता-पिता का आह्वान करते हुये कहा कि बेटियां बोझ नहीं है उन्हंे शिक्षित करें और उनके सपनों को उड़ान दे; उन्हें बंधनों से मुक्त खुला आसमान प्रदान करें। उन्होने कहा कि हम बेटियों का बाल विवाह कर उनके जीवन और शिक्षा के अधिकार से उन्हें वंचित कर रहे है। आईये हम अपनी बेटियों के लिये एक भयमुक्त राष्ट्र का निर्माण करे जहां पर वे खुलकर सांस ले सके।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने गंगा आरती में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को ’’शिक्षा को हाँ और बाल विवाह को ना’’ का संकल्प कराया तथा इस हस्ताक्षर कैम्पेन को सफल बनाने हेतु सभी का अभिनन्दन किया।
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