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Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation : Devi Vaibhavishriji

Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation : Devi Vaibhavishriji

Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation : Devi Vaibhavishriji
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Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation : Devi Vaibhavishriji

Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation

Yoga Day : हम केवल शरीर या मन नहीं हो सकते क्योंकि अगर ऐसा होता तो शायद हममें और मशिन में कोई फर्क नहीं होता। इस बात को हम धर्म से न जोड़े और खुद चिंतन करें तो हमें यह अनुभव होता है कि कुछ तो है जो हमारे शरीर और मन को नियंत्रित है जो एक “शक्ति” या “चेतना” या “आत्मा” है।

Devi Vaibhavishriji

Yoga Day : From stress to stretch to strengthen the nation (Hindi)
Yoga Day

Yoga Day

Yoga – योग ! 5000 वर्ष पुराना ज्ञान एवं गूढ़ विज्ञान जिसे आज पूरी दुनिया ने माना है| हमारे देश की ऋषि परंपरा योग को आज विश्व भी अपना रहा है। यही वो विज्ञान या संस्कृति है जिसके कारण भारत को विश्वगुरु कहा जाता है| ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, योग हमारे लिये हर तरह से आवश्यक है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है। योग के माध्यम से आत्मिक संतुष्टि, शांति और ऊर्जावान चेतना की अनुभूति प्राप्त होती है, जिससे हमारा जीवन तनाव मुक्त तथा हर दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढता है।

आधुनिक युग में योग का महत्व बढ़ गया है। इसके बढ़ने का कारण व्यस्तता और मन की व्यग्रता है। आधुनिक मनुष्य को आज योग की ज्यादा आवश्यकता है, जबकि मन और शरीर अत्यधिक तनाव, वायु प्रदूषण तथा भागमभाग के जीवन से रोगग्रस्त हो चला है। योग केवल रोगों को दूर करने की प्रक्रिया नहीं है। योग का आशय शरीर के समस्त रोगों को दूर कर, मस्तिष्क को तनाव मुक्त कर, मन को पवित्र बनाकर, आत्मा का ईश्वर से सम्बन्ध स्थापित करना है।

शरीर का मन पर और मन का शरीर पर प्रभाव पड़ता है| इसलिए योग ही एकमात्र ऐसी सम्पूर्ण पद्धति है जो मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली बनाती है। जीवन की समस्याओं में हम उलझे रहते है जिसके कारण धीरे धीरे हमारा स्वंय पर नियन्त्रण नहीं रहता लेकिन योग एक ऐसा साधन जिससे हमारा मन और शरीर पर सम्पूर्ण नियंत्रण होने लगता है। और सबसे बड़ी बात यह है “योग” मनुष्य को आत्म संतुष्टि प्रदान करता है।

अनेक सकारात्मक ऊर्जा  के लिये योग का गीता में भी विशेष स्थान है। भगवद्गीता के अनुसार – “सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते |”

अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। कर्म की कुशलता के लिए योग ही आज के जीवन का सहारा बन सकता है।

RW

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By Religion World June 20, 2018 3 min read
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