नोएडा, १२ जून; रमजान में रोज़ा रखना इस्लाम के पांच फर्जों में से एक माना जाता है. और इस फ़र्ज़ का पालन लगभग हर मुसलमान करता है. जेपी ग्रुप में जनरल मैनेजर के पद पर तैनात शाहिद अली भी इस फ़र्ज़ को हर साल बखूबी निभाते हैं. नॉएडा के जिस एरिया में इनका घर है वहां से कुछ दूरी पर सनातन धर्म मंदिर है जहां रोजाना शाम को आरती के समय घंटियाँ बजती है. शाहिद कहते हैं यह इत्तेफाक होता हैं कि मंदिर में आरती का समय और रोज़ा खोलने यानि इफ्तार का समय एक ही होता है, इसलिए जब भी मंदिर से घंटियों की आवाज़ आती है तभी तो हम सब काफी उत्साहित हो जाते हैं और घंटियों की आवाज़ से अपना रोज़ा खोलते हैं.
शाहिद अली आगे बताते हैं कि उनके परिवार को मंदिर से आती हुयी घंटियों की आवाज़ से कभी कोई समस्या नहीं हुयी. वे कहते हैं कि चाहे मस्जिद की अज़ान हो या मंदिर की घंटियां सभी से एक तरह की रूहानी ताकत मिलती है. वह कहते हैं कि उनका परिवार कई सालों से रोज़ा रखता है और जब भी संभव होता है तो ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं.
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