नौ दिवसीय नवरात्रि अध्यात्मिक शिविर में आये 50 योगी

- धरती मां तब है जब मानव पुत्रवत व्यवहार करें
- प्रार्थना और प्रेरणा का केन्द्र है परमार्थ
- शक्ती का पूजन करें, प्रकृति का करें संरक्षण -स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- आज बेटी बचाएंगे तभी घर में अष्ठमी को कंजकों की पूजा कर सकेंगे-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 17 अक्टूबर। देशभर में आज महाअष्ठमी का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है वही परमार्थ निकेतन में आयोजित नौ दिवसीय नवरात्रि अध्यात्मिक शिविर में अमेरिका, हौलेन्ड, साॅउथ अफ्रीका, आॅस्ट्रेलिया मैक्सिको एवं इग्लैंड़ आदि कई देशों से योग एवं ध्यान साधकों ने अष्ठमी विधिवत मनायी।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, नवरात्रि अध्यात्मिक शिविर में आये शिविरार्थियों ने परमार्थ परिसर में वृक्षारोपण किया। महाअष्ठमी पर वृक्षारोपण कर धरती का हरियाली से श्रृंगार करने का संदेश दिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हम महागौरी का श्रृंगार करते हैं उसी तरह प्रकृति का श्रृंगार इंसान के हाथ है और इंसान को चाहिए कि वह हरियाली लगा कर प्रदूषण बचाकर प्रकृति का श्रृंगार करे। उन्होंने कहा की प्राकृतिक असंतुलन को वृक्षारोपण अभियान से काफी कुछ नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वामी जी ने कहा कि कन्या सृष्टि के लिए उस अंकुर के समान होती हैं जिससे समस्त विश्व की उत्पत्ति होती है। कन्याएं पृथ्वी पर मां दुर्गा का प्रतिनिधित्व करती हैं, उनके बिना सृष्टि की कल्पना ही नहीं हो सकती।यदि आज बेटी बचाएंगे, तभी घर पर नवरात्रों के दिनों में कंजकों की पूजा कर सकेंगे। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के बारे में भी श्रद्धालुओं को जागरूक किया और कहा कि कन्या पूजन के बाद कन्याओं को उपहार दिया जाता है और उनके पैर छूकर उन्हें विदा किया जाता है। कन्या पूजन में आने वाले बच्चे हर घर में प्रसाद तो नहीं खा पाते, जाते समय उन्हें प्लास्टिक में गर्म हलवा और पूरी कई लोग रख देते हैं तो प्लास्टिक का केमीकल भी खाने में चला आता है। हमें इस पर विशेष ध्यान देना चाहिये धरती मां दुनिया का बोझ उठाने में सक्षम है, लेकिन स्वार्थी मानव धरती को बंजर बनाने पर तुला है। विकास के नाम पर इसका शोषण कर रहा है। शास्त्रों में शिव-शक्ति का वर्णन आता है। जिसमें शिव को पुरुष और शक्ति को प्रकृति रूप कहा गया है। धरती तब तक मां है जब तक मानव पुत्रवत व्यवहार करे। प्राकृतिक विकास ही भौतिक और आर्थिक प्रगति की नींव है।

नवरात्रि अध्यात्मिक शिविर में आये शिविरार्थियों ने योग एवं ध्यान की विभिन्न विधाओं को आत्मसात किया। साथ ही परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती एवं सायंकालीन बेला में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और साध्वी भगवती सरस्वती जी के सत्संग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन का लाभ लिया।
सभी योग शिविर के सहभागियों ने कहा कि हम परमार्थ क्या आ गये स्वर्ग आ गये हम जब भी यहां आते है यहां की दिव्यता और आध्यात्मिक वातावरण हमें मंत्रमुग्ध कर देता है। उन्होने कहा कि प्रार्थना और प्रेरणा का केन्द्र है परमार्थ।

स्वामी जी महाराज ने सभी योगियों को वृक्षारोपण का संकल्प कराया और कहा की सभी अपने अपने गंतव्य जाकर आस पास की गलियों और पार्को का भी स्वच्छता एवं हरियाली से श्रंगार करे। नवरात्रि अध्यात्मिक शिविर में आये योगियों ने दोनों हाथ उठाकर जल बचाने व प्रदूूषित न करने का संकल्प किया।
Editorial Review Note
Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
Leave a Reply