संगम के तट पर योग का महासंगम : प्रयागराज कुम्भ में सात दिवसीय योग महाकुम्भ का आयोजन

- संगम के तट पर योग का महासंगम
- योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्रीराम कथाकार संत मुरलीधर जी महाराज ने बहायी ’’संगम के तट पर संगम योग की धारा’’
- परमार्थ निकेतन, भारतीय योग संस्थान और पतंजलि योगपीठ के संयुक्त तत्वाधान में उत्तरप्रदेश सरकार, अतुल्य भारत और कुम्भ मेला प्रशासन के सहयोग से परमार्थ निकेतन शिविर, प्रयागराज में सात दिवसीय योग महाकुम्भ का आयोजन
- पतंजलि योगपीठ, परमार्थ निकेतन, आर्ट आफ लिविंग, कृष्णामाचार्य योग संस्थान, कैवल्यधाम, व्यासा, योग विद्या गुरूकुल, एम डीएनआई वाय संस्थान, श्री रामचन्द्र मिशन, द योगा इस्टीट्यूट, श्री मोहन संस्थान तथा भारत की 32 से अधिक विख्यात योग संस्थानों के योगाचार्यों और हजारों योग जिज्ञासुओं ने किया सहभाग
प्रयागराज/ऋषिकेश, 03 फरवरी। परमार्थ निकेतन शिविर, अरैल क्षेत्र सेक्टर, 18 संगम, प्रांगण में प्रातःकाल सूर्यउदय के साथ योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज एवं परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में हजारों की संख्या मेें आये योग जिज्ञासुओं ने योग एवं प्राणायाम की विभिन्न विधाओं का अभ्यास किया।
सात दिवसीय योग शिविर का आयोजन भारतीय योग संस्थान और परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। इसमें भारत की 32 से अधिक विख्यात योग संस्थानों के योगाचार्यों ने सहभाग किया।

प्रातःकालीन सत्र में योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने अनुलोम विलोम, कपालभाति और योगाभ्यास कराया। आज के योग सत्र में भारत सहित आस्ट्रेलिया, पेरू, कोलम्बिया, अमेरिका, साइबेरिया, कनाडा, मलेशिया, नेपाल, नार्वे, स्पेन, इन्डोनेशिया, तिब्बत, कम्बोडिया, श्रीलंका, थाइलैंड, ब्राजील, जमर्नी, जापान, सिंगापुर, क्रोवाशिया, अर्जेन्टीना, मेक्सिको, हाॅलैैण्ड और विश्व के अन्य देशों के योग साधकों ने किया सहभाग।
योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि श्री राममन्दिर निर्माण के साथ श्रीराम जैसा चरित्र भी राष्ट्र में निर्मित होना चाहिये ’’मेरे देश में चरित्र का निर्माण होना चाहिये, मेरे देश में चरित्र की महानता रहे यही तो योग का उद्घोष है।’’ कुम्भ मंथन का पर्व है। कपालभाति और अनुलोम विलोम से भी मंथन होता है। उन्होने कहा कि हमारी नाभि में अमृत होता है, नाभि का अमृत जो योग से जगा लेते है वे मृत्यु के पार चले जाते है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि वेद, धर्म ही हमारा धर्म है। योग को हमने कन्द्राओं, गुफाओं और ग्रंथों से बाहर निकालकर मैदान में लाकर सर्वसुलभ बना दिया अतः योग करो और निरोग रहो।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम पर हम सभी योग कर रहे है इस योग ने पूरे विश्व मंे संगम योग को जन्म दिया है। भारत को ’’संगम का योग’’ की आवश्यकता है। इस देश में संगम है तो भारत है, इस बात को हमें समझना होगा। संमग पैदा होता है एक सोच से और सोच आती है जागरूकता से। आईये संगम से एक संदेश लेकर जाये और संगम को एक संदेश देकर जाये ’’संगम से संदेश और संगम को संदेश।’’
मोरारजी देसाई संस्थान से आये योगाचार्य श्री राहुल सिंह चैहान जी ने योगनिद्रा का अद्भुत अभ्यास कराया। साथ ही विभिन्न योग संस्थानों से आये योग जिज्ञासुओं ने योग चिकित्सा, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया।
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