नवरात्रि में शक्तिपीठ के दर्शन की परंपरा रही है। शक्तिपीठ की स्थापना भगवान शिव की पत्नी देवी सती (शक्ति) की वजह से हुई थी। देवी पुराण के मुताबिक, शक्तिपीठ की संख्या 51 है। जिनमें से 42 भारत में हैं। इनके अलावा 9 शक्तिपीठ हमारे 5 पड़ोसी देशों में हैं। एक शक्तिपीठ पाकिस्तान में, 4 बांग्लादेश में, 2 नेपाल में और एक-एक शक्तिपीठ श्रीलंका व तिब्बत में (चीन) हैं। जिनमें से पाकिस्तान में हिंगलाज शक्तिपीठ, तिब्बत में मानस शक्तिपीठ, श्रीलंका में लंका शक्तिपीठ, नेपाल में गण्डकी शक्तिपीठ व गुह्येश्वरी शक्तिपीठ, बांग्लादेश में सुगंध शक्तिपीठ, करतोयाघाट शक्तिपीठ, चट्टल शक्तिपीठ और यशोर शक्तिपीठ हैं। इनके अलावा अपने देश के अंदर स्थित शक्तिपीठ के दर्शन तो कोई भी कर सकते हैं, किंतु जो अब विदेशों में हैं, वहां भी हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए जाते हैं।
पाकिस्तान में एकमात्र शक्तिपीठ
हिंगलाज माता शक्तिपीठ पाकिस्तान में मौजूद एकमात्र शक्तिपीठ है। यह वहां के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगलाज की पहाड़ियों में मौजूद है। इस मंदिर में नवरात्रि का जश्न करीब-करीब भारत जैसा ही होता है। कई बार इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि ये मंदिर पाक में है या भारत में। कोरोना महामारी से पहले नवरात्रि के दौरान यहां 3 किमी एरिया में मेला लगता था। दर्शन के लिए आने वाली महिलाएं गरबा करती थीं। पूजा-हवन होता था। कन्याओं को भोजन कराया जाता था। मां के गानों की गूंज भी सुनाई देती थी।
हिंदू-मुस्लिमों में नहीं कोई अंतर
हिंगलाज शक्तिपीठ के एक पुजारी के मुताबिक, यह मंदिर हिंदू और मुस्लिम दोनों मजहब के लोगों में पूजनीय है। नवरात्रि के दौरान भी इस मंदिर में हिंदू-मुस्लिम का कोई फर्क नहीं दिखता। कई बार पुजारी-सेवक मुस्लिम टोपी पहने दिखते हैं। वहीं, मुस्लिम देवी माता की पूजा के दौरान साथ खड़े मिलते हैं। इनमें से अधिकतर बलूचिस्तान-सिंध के होते हैं।
चूंकि हिंगलाज मंदिर को मुस्लिम ‘नानी बीबी की हज‘ या पीरगाह के तौर पर मानते हैं, इसलिए पीरगाह पर अफगानिस्तान, इजिप्ट और ईरान के लोग भी आते हैं।
भारत के अलावा बांग्लादेश, अमेरिका और ब्रिटेन से भी लोग आते हैं। मंदिर के रास्ते में लगे बोर्ड पर सरकार ने ‘नानी मंदिर’ लिखवाया भी है।
यह भी पढ़ें-दहकते अंगारों के बीच जाख देवता करते हैं हैरतअंगेज नृत्य
अमरनाथ से भी ज्यादा कठिन है यात्रा
हिंगलाज माता शक्तिपीठ पहुंचना अमरनाथ यात्रा से ज्यादा कठिन माना जाता है। जिस जमाने में अच्छी गाड़ियां नहीं थीं, तब कराची से हिंगलाज तक पहुंचने में 45 दिन का समय लग जाता था। आज भी यहां पहुंचने में कई बाधाएं आती हैं। जैसे- रास्ते में हजार फीट तक ऊंचे पहाड़, दूर तक फैला सुनसान रेगिस्तान, जंगली जानवरों से भरे घने जंगल और 300 फीट ऊंचा मड ज्वालामुखी। ऊपर से आतंकियों का भी डर। इस तरह के खतरनाक पड़ाव पार करने के बाद ही माता के दर्शन होते हैं।
इस मंदिर की यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को 2 संकल्प लेने होते हैं। मानें कि, आप कराची के रास्ते जाएंगे तो कराची से 12-14 किमी पर हाव नदी है। यहीं से हिंगलाज यात्रा शुरू होती है। यहां से आपको पहला संकल्प लेना होगा- माता के मंदिर के दर्शन करके वापस लौटने तक संन्यास ग्रहण करने का।
दूसरा संकल्प है- यात्रा के दौरान किसी भी सहयात्री को अपनी सुराही का पानी ना देना, भले ही प्यास से तड़प कर दम ही क्यों न टूट जाए। कहा जाता है कि, ये दोनों शपथ हिंगलाज माता तक पहुंचने के लिए भक्तों का इम्तिहान लेने के लिए चली आ रही हैं। इन्हें पूरा नहीं करने वाले की यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती।
ऐसे हुई थी शक्तिपीठ की स्थापना
हिंदू धर्म शास्त्रों व पुराणों में दिए गए वर्णन के अनुसार, सती (शक्ति, पार्वती का पहला जन्म) के पिता राजा दक्ष अपनी बेटी का विवाह भगवान शिव से होने से खुश नहीं थे। उन्होंने अपने एक बड़े अनुष्ठान में भी भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। किंतु शिव के मना करने के बावजूद सती अपने पिता के यहां चली गईं। वहां क्रोधित पिता (दक्ष) ने अपशब्द कहे। जिससे दुखी सती ने खुद को हवनकुंड में जला डाला। उधर, शिव को इस बारे में पता लग गया। जिसके चलते उन्हें क्रोध आ गया। शिव ने अपना एक बाल उखाड़कर भूमि पर फेंका। जिससे वीरभद्र प्रकट हुए। वीरभद्र समेत शिव के अन्य गण फिर शीघ्र राजा दक्ष के यहां पहुंचे। वहां वीरभद्र ने राजा दक्ष का वध कर दिया। भगवान शिव भी वहां पहुंच गए। शिव सती के अधजले शव को कंधे पर उठाकर क्रोध में नृत्य करने लगे। सभी देवी-देवता और अन्य प्राणी शिवजी को शांत करने का प्रयत्न करने लगे। मगर शिव शांत नहीं हुए। उसके बाद भगवान विष्णु ने चक्र से सती के 51 टुकड़े कर दिए। सती के वही 51 टुकड़े शक्तिपीठ कहलाए जाते हैं। हिंगलाज इन्हीं में से एक है।
[video_ads]
[video_ads2]
You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in
Editorial Review Note
Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
