15 मार्च से मलमास का आरम्भ, नहीं होंगे कोई मांगलिक कार्य
15 मार्च को यानी आज सुबह लगभग 8 बजकर 10 मिनट पर सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर शुरू हो जाएगा. इसलिए 15 मार्च से लेकर 14 अप्रैल 2019 तक मीन संक्रान्ति जनित खरमास दोष रहेगा। इस लगभग एक महीने के समय में भगवान की आराधना करने का विशेष महत्व है।
धर्मग्रंथों के अनुसार, इस माह में सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शौच, स्नान, संध्या आदि करके भगवान का स्मरण करना चाहिए और मलमास के नियम पूरे करने चाहिए। इससे भगवान की कृपा बनी रहती है।
इस महीने में तीर्थों, घरों व मंदिरों में जगह-जगह भगवान की कथा होनी चाहिए। भगवान की विशेष पूजा होनी चाहिए और भगवान की कृपा से देश तथा विश्व का मंगल हो एवं गो-ब्राह्मण तथा धर्म की रक्षा हो, इसके लिए व्रत-नियम आदि का आचरण करते हुए दान, पुण्य और भगवान की पूजा करना चाहिए. इस मास के संबंध में धर्म ग्रंथों में लिखा है…
येनाहमर्चितो भक्त्या मासेस्मिन् पुरुषोत्तमे.
धनपुत्रसुखं भुकत्वा पश्चाद् गोलोकवासभाक्..
अर्थ- इस मास में नियम से रहकर भगवान की विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तिपूर्वक उन भगवान की पूजा करने वाला यहां सब प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु के बाद भगवान के दिव्य गोलोक में निवास करता है.
करें इस मंत्र का जाप
धर्म ग्रंथों में ऐसे कई श्लोक भी बताए गए हैं जिनका जाप खर मास में किया जाए तो पुण्य मिलता है. प्राचीन काल में श्रीकौण्डिन्य ऋषि ने यह मंत्र बताया था. मंत्र जाप किस प्रकार करें इसके बारे में भी बताया गया है. मंत्र जाप करते समय विष्णु भगवान का ध्यान करना चाहिए. ऐसा ध्यान करना चाहिए कि वो नवीन और मेघ के समान श्याम हैं. वो दो भुजधारी हैं. पीले वस्त्र पहने हुए हैं और बांसुरी बजा रहे हैं. श्रीराधिकाजी के सहित ऐसे श्रीपुरुषोत्तम भगवान का ध्यान करना चाहिए.
मंत्र…
गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्.
गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्..
इस मंत्र का एक महीने तक भक्तिपूर्वक बार-बार जाप करने से पुरुषोत्तम भगवान की प्राप्ति होती है, ऐसा धर्मग्रंथों में लिखा है।
Editorial Review Note
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