शिव की धरती से दिया योग का संदेश : पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक शाही विवाह
- योग गुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, आचार्य बालकृष्ण जी एवं गुप्ता बंधुओं की शादी में आये अतिथियों ने की आज के दिन की शुरूआत योग के साथ
- उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने वर शशांक और वधु शिवांगी को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर विवाह की शुभकामनायें दी
- उत्तराखण्ड की दिव्य धरती पर विवाह की रस्मों के साथ योग का अद्भुत संगम
ऋषिकेश, 22, जून। उत्तराखण्ड की खूबसुरत वादियों में बसे औली में आज दक्षिण अफ्रीका और दुबई में बसे भारतीय मूल के उद्योगपति अतुल गुप्ता जी के सुपुत्र शशांक और दुबई के कारोबारी विशाल जालान जी की बेटी शिवांगी की पर्यावरण संरक्षण को समर्पित संस्कारी शादी में योग गुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और आचार्य बालकृष्ण जी ने सहभाग किया।
वर शशांक और वधु शिवांगी को शुभकामनाएं देते हुये उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर नव जीवन की हरित शुरूआत करने हेतु प्रेरित किया।


हिमालय की वादियों में बसे औली में आज सूर्यउदय के साथ ही योग गुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, आचार्य बालकृष्ण जी और गुप्ता बंधुओं के विवाह में देश विदेश से आये अतिथियों ने योग, ध्यान और प्राणायाम की विभिन्न विधाओें का अभ्यास किया। शशांक और शिवांगी के विवाह का सामरोह आज योगाभ्यास के साथ आरम्भ हुआ। उत्तराखण्ड की दिव्य धरती पर विवाह की रस्मों के साथ योग का अद्भुत संगम देखने को मिला।

गुप्ता बधुंओं ने पूज्य संतों के सान्निध्य में हरित विवाह एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुये हिमालय की धरती पर आज 120 पौधों का रोपण किया, जिसमें देवदार, चीड़, बुरांस सहित पहाड़ी वातावरण में पायें जाने वाले पौधों का रोपण किया। इससे यह संदेश जाता है कि हमारे मानवीय व्यवहार से जो कुछ भी पर्यावरण को नुकसान हुआ होगा उसके लिये हमें कुछ प्रयास तो अवश्य करने चाहिये।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गुप्ता बंधुओं का विवाह समारोह वास्तव के प्रेरणा देने वाला है। विदेश की धरती से आकर अपने देश की माटी में संस्कार, संस्कृति और वेद मंत्रों के साथ विवाह का आयोजन करना अत्यंत प्रेरणादायक है। साथ ही विवाह की सभी रस्मों में भारतीय संस्कृति और भारतीय भोजन का समावेश भारतीय मूल्यों से पोषित परिवार ही कर सकता है। उन्होने कहा कि शराब से रहित शादी तथा शाकाहारी, प्याज और लहसुन से रहित भोजन, एकल उपयोग प्लास्टिक का कहीं पर नामोनिशान नहीं, चारों ओर वेद मंत्र, संकीर्तन और संतों का दर्शन वास्तव में आज की सम्पन्न युवा पीढ़ियों के लिये उत्कृष्ट उदाहरण है यह शादी।

योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि गुप्ता बंधुुओं का पाणिग्रहण संस्कार भी पर्यावरण संरक्षण संस्कार के साथ सम्पन्न हुआ वास्तव में यह परिवार के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी उठाने का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

आचार्य श्री बालकृष्ण जी ने कहा कि गुप्ता बंधुओं ने विवाह समारोह को अपने देश, अपनी जड़ों, संस्कारों, संस्कृति, भारतीय मूल्यों, योग ओर पर्यावरण से जोड़कर जो दिव्य संदेश दिया वास्तव में साधुवाद के पात्र है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, योगगुरू रामदेव जी महाराज और आचार्य श्री बालकृष्ण जी ने वर शशांक और वधु शिवांगी के नव जीवन में प्रवेश के पावन अवसर पर शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये हरित नव जीवन की शुरूआत का आशीर्वाद दिया।
दादी अंगूरी देवी, श्री अजय गुप्ता जी, श्री अतुल गुप्ता जी और परिवार के अन्य सदस्य विवाह समारोह में पूज्य संता का आशीर्वाद और दर्शन प्राप्त कर अभिभूत हुये।
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