तमिलनाडु के पलानी मंदिर के पंचामिर्थम प्रसाद को मिला GI टैग
तमिलनाडु, 30 अगस्त; तमिलनाडु के प्रसिद्ध मुरुगन मंदिर में मिलने वाले पलानी पंचामिर्थम को भौगोलिक संकेत GI टैग प्रदान किया गया है। यह पहली बार है जब किसी मंदिर के प्रसाद को जीआई टैग की सूची में जगह दी गई है। प्रसाद को जीआई टैग की सूचि में शामिल करने के लिए आवेदन ज्वाइंट कमिश्नर, अरुल्मिगु धान्दयुथापनी स्वामी थिरुकोकिल, उत्तर गिरिवेठी, आदिवरम, पलानी द्वारा दायर किया गया था।
चिन्नीराजा जी नायडू, भौगोलिक संकेतों के डिप्टी रजिस्ट्रार, ने पंचामिर्थम को जीआई टैग प्रदान करने की पुष्टि की थी। साथ ही उन्होंने कहा- “प्रसाद को दिए गए जीआई टैग का प्रमाण पत्र जल्द ही जीआई वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया जाएगा“। पंचामिर्थम को बनाने के लिए पाँच प्रकृतिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है- जैसे केला, गुड़, गाय का घी, शहद, इलायची को मिलाकर ये पंचामिर्थम तैयार किया जाता है। इसमें स्वाद के लिए खजूर और हीरा मिश्री भी मिलाई जाती है।
क्या है पंचामिर्थम

पंचामिर्थम एक अभिषेक प्रसाद है, जिसे भगवान के अभिषेक उपरांत ग्रहण किया जाता है। प्रसाद हल्का गाढ़ा और स्वाद में मीठा होता है। यह पलानी हिल्स पर स्थित अरुल्मिगु धन्दयुथापनी मंदिर के प्रमुख देवता भगवान धन्दयुथापनी स्वामी के लिए प्रमुख प्रसाद में से एक है। पंचामिर्थम को बनाते समय पानी की एक बूंद तक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह प्रसाद हल्की गाड़ी अवस्था में बेहद स्वादिष्ट होता है जिसे बनाते समय किसी भी प्रकार के संरक्षक पदार्थ का और ना ही किसी कृत्रिम सामग्री का उपयोग किया जाता है।
जीआई आवेदन के अनुसार पंचामिर्थम उत्पाद का भौगोलिक क्षेत्र तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में स्थित पलानी गांव है। यह 10.44° अक्षांश और 77.52° देशांतर पर स्थित है।
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