RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

12 राशियों की अवधारणा कहां से आई?

12 राशियों की अवधारणा कहां से आई?

12 राशियों की अवधारणा कहां से आई?
Visual Archive

12 राशियों की अवधारणा कहां से आई?

12 राशियों की अवधारणा कहां से आई?

आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने अपनी राशि के बारे में न सुना हो। मेष से लेकर मीन तक, 12 राशियों का उल्लेख हमें अखबारों, मोबाइल ऐप्स, टीवी और सोशल मीडिया पर रोज़ देखने को मिलता है। लेकिन सवाल यह है कि 12 राशियों की यह अवधारणा आखिर शुरू कैसे हुई और इसका आधार क्या है? क्या यह केवल विश्वास का विषय है या इसके पीछे इतिहास और खगोल विज्ञान छिपा है?

दरअसल, राशियों की अवधारणा मानव द्वारा आकाश और समय को समझने की एक प्राचीन कोशिश है। जब मनुष्य ने देखा कि सूर्य, चंद्रमा और तारे निश्चित क्रम में चलते हैं और ऋतुएँ बदलती हैं, तब उसने इनके प्रभाव को जीवन से जोड़ना शुरू किया।

सूर्य की गति और राशियां

पृथ्वी जब सूर्य की परिक्रमा करती है, तो सूर्य हमें आकाश में अलग-अलग तारामंडलों के सामने दिखाई देता है। इन प्रमुख तारामंडलों की संख्या 12 मानी गई। इन्हीं को आगे चलकर 12 राशियों के रूप में जाना गया।
हर राशि लगभग 30 डिग्री के आकाशीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे पूरा 360 डिग्री का चक्र बनता है।

बेबीलोनियन सभ्यता की भूमिका

इतिहासकार मानते हैं कि राशियों को व्यवस्थित रूप देने का श्रेय बेबीलोनियन सभ्यता को जाता है। लगभग 2000 ईसा पूर्व, उन्होंने सबसे पहले राशिचक्र को 12 भागों में बाँटा। उनके लिए ज्योतिष केवल भविष्य जानने का साधन नहीं था, बल्कि यह कृषि, युद्ध और शासन के निर्णयों से जुड़ा था।

यूनानी प्रभाव

बेबीलोनियन ज्ञान को यूनानियों ने अपनाया और उसे दर्शन तथा गणित से जोड़ा। यूनानी ज्योतिष में राशियों को मानव स्वभाव और मानसिक प्रवृत्तियों से जोड़ा गया। आज पश्चिमी देशों में प्रचलित Zodiac Signs इसी परंपरा से आए हैं।

भारतीय वैदिक परंपरा

भारत में राशियों की अवधारणा वैदिक ज्योतिष का हिस्सा रही है। वेदांग ज्योतिष, सूर्य सिद्धांत और पाराशर होरा शास्त्र में राशियों का गहरा विश्लेषण मिलता है।
भारतीय ज्योतिष में राशि को केवल जन्मतिथि से नहीं, बल्कि चंद्रमा की स्थिति से तय किया जाता है, जो इसे और अधिक सूक्ष्म बनाता है।

12 की संख्या का महत्व

12 की संख्या भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है— 12 आदित्य, 12 ज्योतिर्लिंग, 12 महीने, 12 भाव। यह संख्या पूर्णता और संतुलन का प्रतीक मानी जाती है।

🧠 क्या राशियां विज्ञान हैं?

राशियां पूर्ण रूप से आधुनिक विज्ञान नहीं हैं, लेकिन यह कहना भी गलत होगा कि इनका कोई आधार नहीं। ये खगोल विज्ञान, अनुभव और सांस्कृतिक परंपराओं का मिश्रण हैं।

12 राशियों की अवधारणा मानव सभ्यता की उस जिज्ञासा का परिणाम है, जिसमें उसने आकाश को पढ़कर जीवन को समझने की कोशिश की। यह केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि समय और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

RW

Editorial Review Note

Religion World is the country's only website that provides complete information on all religions. Religion World will always present information about all religions impartially. You can send us all kinds of information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com.You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Religion World January 7, 2026 3 min read
Share: