आचार्य लोकेश ने हिन्दू टेम्पल शिकागो में सभा को संबोधित किया
धर्म को समाज सेवा से जोड़ना वर्तमान की आवश्यकता– आचार्य लोकेश
अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक प्रख्यात जैन आचार्य डा. आचार्य लोकेश मुनि ने मुख्य अतिथि के रूप में हिन्दू टेम्पल ग्रेटर शिकागो में विशाल समूह को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म को समाज सेवा से जोड़ना वर्तमान की आवश्यकता है | इससे ही विश्व कल्याण और विश्व शांति संभव है | हिन्दू टेम्पल ग्रेटर शिकागो के अध्यक्ष श्री तिलक मारवाह ने आचार्य लोकेश मुनि का परंपरागत रूप से स्वागत किया | पूर्व अध्यक्ष श्री कृष्ण रेड्डी ने आचार्य डा. लोकेश मुनि का परिचय दिया |

आचार्य डा. लोकेश मुनि ने कहा कि हिंदू धर्म में कर्म बेहद महत्वपूर्ण है | कर्म का विधान नैतिकता को संदर्भित करता है जो सामाजिक जिम्मेदारी निर्वाह करने के लिए कहता है| धर्म के मार्ग पर चलते हुए दूसरों के लिए सच्च, अहिंसा, करुणा, कल्याण का जीवन दर्शाता है और समाज को आत्म-सेवा प्रदान करता है | उन्होंने कहा धर्म को समाज सेवा से जोड़कर उसे सामाजिक कल्याण और विकास का मार्ग बनाना वर्तमान की आवश्यकता है |
‘हिंसा रहित विश्व’
आचार्य लोकेश ने ‘हिंसा रहित विश्व’ पर वक्तव्य देते हुए कहा कि धर्म हमें जोड़ना सिखाता है तोड़ना नहीं| धर्म के क्षेत्र में हिंसा, घृणा और नफरत का कोई स्थान नहीं हो सकता| संवाद के द्वारा, वार्ता के द्वारा हर समस्या को बैठ कर सुलझाया जा सकता है| उसके लिए सबसे पहले जरूरी है, हम अपने अस्तित्व की तरह दूसरों के अस्तित्व का, विचारों का सम्मान करना सीखें| मतभेद हो सकते है किन्तु उसे मनभेद में न बदले| विश्व शांति और सद्भावना के लिए सबसे पहले जरुरी है हु विश्व को हिंसा रहित बनाये | हम सभी विकास चाहते है, समृद्धि चाहते है| विकास व शांति का गहरा सम्बन्ध है|

आचार्य लोकेश ने कहा कि अमेरिकी इतिहास में धार्मिक संगठनों का सामाजिक कल्याण में एक महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है| कई महत्वपूर्ण तरीकों से, धार्मिक संगठनों और चर्चों ने अनाथों, दासों, गरीबों, बीमारों और अन्य लोगों से सहायता के लिए अनेक मानवीय कार्यक्रमों और नीतियों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है| यह गौरव का विषय है कि हिन्दू टेम्पल ग्रेटर शिकागो भी अनेक मानव कल्याण की गतिविधियों को आगे बाधा रहा है|
आचार्य लोकेश ने इस बात का उल्लेख किया कि कि भारत ज्ञान व कला का अथाह सागर है | भारत की सदियों पुरानी योग, साधना व प्राकृतिक चिकित्सा विश्व कल्याण के लिए अद्भुत उपहार है | भारत के विभिन्न प्रदेशों में अनेकों कलाएं है जिन्हें एक मंच पर लाना न सिर्फ भारत अपितु विश्व के हित में है | अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता है | भारतीय ज्ञान व कला विश्व के कोने कोने तक पहुंचेगी और विश्व कल्याण में सहयोगी बनेगी | प्राचीन भारतीय सभ्यता को विश्व जनमानस तक ले जाना जरुरी है|
Editorial Review Note
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